चीन ने बुलाया, किम दौड़े चले आए, क्या दबाव में हैं उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर!

चीन के उच्चाधिकारियों का कहना है कि वह राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आमंत्रण पर पहुंचे हैं और यह उनकी निजी यात्रा है. हालांकि, उनकी अचानक इस यात्रा को लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.

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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग (फोटो: रायटर्स) चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग (फोटो: रायटर्स)

दिनेश अग्रहरि

  • नई दिल्ली,
  • 28 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 1:13 PM IST

उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन चीन के चार दिवसीय दौरे पर रविवार को बीजिंग पहुंचे. राष्ट्राध्यक्ष बनने के बाद वह पहली बार अपने देश से बाहर निकले हैं. चीन के उच्चाधिकारियों का कहना है कि वह राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आमंत्रण पर पहुंचे हैं और यह उनकी निजी यात्रा है. हालांकि, उनकी अचानक इस यात्रा को लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. कुछ जानकारों का कहना है कि किम पर एक तरह से चीन आने का दबाव बनाया गया है. आइए जानते हैं कि क्या है पूरा माजरा-

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जानकारों के अनुसार, किम की इस यात्रा से साफ लगता है कि वह दबाव में हैं. फॉक्स बिजनेस न्यूज वेबसाइट के अनुसार, चीन ने किम पर बीजिंग आने का दबाव बनाया है. वेबसाइट ने प्रसिद्ध पुस्तक 'न्यूक्लियर शोडाउन' के लेखक गोर्डोन चांग के हवाले से कहा है कि चीन ने इसके लिए काफी दबाव बनाया.

गौरतलब है कि किम एक भारी सुरक्षा बंदोबस्त वाली रहस्यमय ट्रेन से रविवार को चीन पहुंचे थे. वह साल 2011 में सत्ता हासिल करने के बाद पहली बार अपने देश से बाहर निकले हैं. चांग ने कहा कि किम के बीजिंग पहुंचने का पहला कारण तो यही है कि चीन ने उन्हें आने को कहा.

महंगी पड़ी चीन से रिश्तों में खटास

अलग-थलग पड़ चुके उत्तर कोरिया के लिए चीन ही एक सहारा था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में काफी सख्ती आ गई थी. संयुक्त राष्ट्र द्वारा उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाने का चीन और रूस ने भी समर्थन किया था.

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चीन ने हाल में ही उत्तर कोरिया को तेल एवं अन्य ईंधन की आपूर्ति रोक दी थी, जिसके बाद किम जोंग के लिए काफी मुश्किल खड़ी हो गई थी, क्योंकि वे पहले ही तमाम अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को झेल रहे हैं. उत्तर कोरिया के लिए चीन ही सबसे बड़ा ईंधन निर्यातक रहा है.

आयात पर रोक से टूट गया उत्तर कोरिया!

चीन ने नवंबर महीने में उत्तर कोरिया के लौह अयस्क, कोयला और शीशे के अपने देश में आयात पर भी रोक लगा दी थी. यह रोक उत्तर कोरिया के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों से भी बड़ी साबित हुई है. इसकी वजह से किम शासन की हालत खराब हो गई. उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था काफी सीमित हो गई है और इसी में से उसे अपने परमाणु और मिसाइल रक्षा कार्यक्रमों के लिए भी धन जुटाना है.

ट्रंप से मिलने से पहले चीन की मुहर जरूरी!

चांग के अनुसार, किम दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जाए से अगले महीने मिलने वाले हैं. इसके बाद मई में वह अमेरिका जाने वाले हैं. ऐसे में चीन का लगा कि वह तो इस इलाके में कूटनीतिक लिहाज से हाशिए पर जा रहा है, इसलिए उसने किम को बुलावा भेज दिया.

किम की इस यात्रा से यह तय है कि वह ट्रंप से मिलने से पहले चीन की मंजूरी लेने और उससे सलाह लेने को तैयार हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स से उत्तर कोरिया मामलों पर चीन की प्रमुख एक्सपर्ट यांग शियु कहती हैं कि इस दौरे से साफ है कि किम जोंग चीन के साथ अपने बिगड़ चुके रिश्ते को सुधारना चाहते हैं. इस दबाव का ही असर है कि किम परमाणु हथियारों को बिल्कुल त्याग देने तो नहीं, लेकिन इस कार्यक्रम को रोकने की संभावना पर बातचीत के लिए तैयार हो गए हैं.

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