मिडिल-ईस्ट एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ा दिख रहा है, जहां शांति और युद्ध के बीच सिर्फ कुछ घंटे का फासला बाकी है. ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तेज़ी से बढ़ता दिख रहा है. इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने इस आशंका को और गहरा कर दिया है कि आने वाले 24 घंटे बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं. दो हफ्ते का अस्थायी सीजफायर बुधवार, 22 अप्रैल की शाम खत्म हो रहा है. यानी भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह तड़के सीजफायर खत्म होने की डेडलाइन है.
ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ सीजफायर बुधवार शाम खत्म हो जाएगा. अगर उससे पहले कोई समझौता नहीं हो पाता है, तो इस संघर्ष-विराम को आगे बढ़ाए जाने की संभावना बहुत कम है. यानी भीषण जंग फिर से शुरू होने की पूरी आशंका है.
नेतन्याहू ने भी कहा, "ईरान के खिलाफ इजरायल का ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है. ईरान में हमारा काम अभी बाकी है." यह बयान सिर्फ एक सियासी मैसेज नहीं है, बल्कि संभावित सैन्य कार्रवाई की तरफ इशारा भी माना जा रहा है.
अमेरिका-इजरायल और ईरान की तरफ से हो रही बयानबाजी के बीच सीजफायर खत्म होने से पहले बचा वक्त बेहद निर्णायक साबित होने वाला है. ऐसे में अगले 24 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं क्योंकि इस फेज में या तो कोई बड़ा सैन्य कदम उठाया जा सकता है, या फिर डिप्लोमेसी के जरिए तनाव कम करने की कोशिश की जा सकती है. इजरायल की सेना हाई अलर्ट पर है, ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई की तैयारी की खबरें भी आ रही हैं. और इस बीच अमेरिका की तरफ से आ रहे बयान अनिश्चितता और बढ़ा दिए हैं.
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और टॉप अधिकारी बातचीत के संभावित दूसरे दौर से पहले मंगलवार को पाकिस्तान के लिए रवाना हो सकते हैं. सोमवार देर रात एक फ़ोन इंटरव्यू में ट्रंप ने यकीन जताया कि तेहरान बातचीत के लिए आगे आएगा. हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इससे पहले ज़ोर देकर कहा था कि अभी कोई बातचीत नहीं हो रही है.
ईरान के सरकारी मीडिया ने रविवार शाम को बताया कि तेहरान अभी अमेरिका के साथ नई बातचीत में हिस्सा लेने की योजना नहीं बना रहा है. यह बात तब सामने आई, जब ईरान की सेना ने अमेरिका पर दोनों देशों के बीच हुई नाज़ुक सीज़फ़ायर का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. यह आरोप डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के कुछ ही घंटों बाद लगाया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह इस्लामाबाद में बातचीत के लिए अपने प्रतिनिधि भेज रहे हैं.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ऐलान किया कि एक ईरानी मालवाहक जहाज़, जिसने होर्मुज़ स्ट्रेट के पास अमेरिका द्वारा लगाई गई नाकाबंदी को पार करने की कोशिश की थी, उसे ज़ब्त कर लिया गया है.
ईरान की सेना ने बताया कि यह जहाज़ चीन से आ रहा था. सरकारी मीडिया ने ईरान के एक सैन्य प्रवक्ता के हवाले से कहा, "हम चेतावनी देते हैं कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान की सशस्त्र सेनाएं जल्द ही अमेरिकी सेना द्वारा की गई इस सशस्त्र समुद्री डकैती का जवाब देंगी और इसका बदला लेंगी."
'धमकियों के साये में कोई बातचीत नहीं...'
ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसद के स्पीकर मोहम्मद ग़ालिबाफ़ ने डोनाल्ड ट्रंप पर धमकियों और सीजफायर के उल्लंघन के ज़रिए कूटनीति को कमज़ोर करने का आरोप लगाया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि तेहरान दबाव में आकर बातचीत नहीं करेगा.
सोशल मीडिया पोस्ट में ग़ालिबाफ़ ने कहा, "वॉशिंगटन बातचीत को सरेंडर की मेज़ में बदलने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि अगर तनाव और बढ़ता है, तो ईरान 'युद्ध के मैदान में नए पत्ते खोलने' के लिए तैयार है.
गालिबाफ का यह बयान तब आया, जब ट्रंप ने 22 अप्रैल की समय-सीमा से पहले, दो हफ़्ते के नाज़ुक सीजफायर को लेकर एक कड़ी चेतावनी जारी की. PBS News से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर कोई निर्णायक नतीजा नहीं निकलता है, "तो फिर बहुत सारे बम फटने लगेंगे."
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