लाहौर HC से बरी हुए हाफिज सईद के साथी मक्की समेत 6 दहशतगर्द, आतंक का सबूत नहीं दे पाई पुलिस

लाहौर हाईकोर्ट (Lahore Highcourt) ने हाफिज सईद के प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा (JuD) के छह वरिष्ठ नेताओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने के मामले में बरी कर दिया. क्योंकि अभियोजन पक्ष संदेह से परे प्रतिवादियों के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा.

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आतंकी हाफिज सईद. आतंकी हाफिज सईद.

aajtak.in

  • लाहौर,
  • 07 नवंबर 2021,
  • अपडेटेड 1:45 PM IST
  • पाकिस्तान में हाफिज सईद के साथियों को राहत
  • JuD के 6 आतंकी टेरर फाइनेंसिंग मामलों में बरी
  • लाहौर HC ने निचली अदालत के फैसले को किया रद्द

लाहौर हाईकोर्ट (Lahore High court) ने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा (JuD) के छह वरिष्ठ नेताओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने के मामले में बरी कर दिया. अदालत ने लोअर कोर्ट द्वारा दोषी ठहराने के फैसले को रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया है.

हाफिज सईद के नेतृत्व वाला प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा (JuD) लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का मुखौटा संगठन है. लश्कर-ए-तैयबा साल 2008 के मुंबई हमले को अंजाम देने के लिए जिम्मेदार आतंकवादी संगठन है. मुंबई में हुए इस हमले में छह अमेरिकियों सहित 166 लोग मारे गए थे.

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पंजाब पुलिस के आतंकवाद रोधी विभाग (CTD) द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद लाहौर की आतंकवाद-निरोधी अदालत ने इस साल अप्रैल में जमात-उद-दावा से जुड़े आतंकी प्रो. मलिक जफर इकबाल, याह्या मुजाहिद (जेयूडी के प्रवक्ता), नसरुल्ला, समीउल्लाह और उमर बहादुर को नौ-नौ साल की कैद और हाफिज अब्दुल रहमान मक्की को छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी.

लोअर कोर्ट ने इन नेताओं को आतंकवाद के वित्तपोषण का दोषी पाया था. यानी कि ये आतंकी गतिविधियों के लिए धन मुहैया करा रहे थे. वे धन इकट्ठा कर लश्कर-ए-तैयबा को अवैध रूप से धन मुहैया करा रहे थे. अदालत ने आतंकवाद के वित्तपोषण के माध्यम से एकत्र किए गए धन से अर्जित संपत्ति को जब्त करने का भी आदेश दिया था.

निचली अदालत के फैसले को किया रद्द

अदालत के एक अधिकारी ने बताया, शनिवार को मुख्य न्यायाधीश मुहम्मद अमीर भट्टी और न्यायमूर्ति तारिक सलीम शेख की खंडपीठ ने जेयूडी के छह नेताओं के खिलाफ सीटीडी की प्राथमिकी मामले में निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा.

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'अभियोजन पक्ष के गवाह का बयान विश्वसनीय नहीं'

अधिकारी ने कहा कि खंडपीठ ने जेयूडी नेताओं की याचिका को यह कहते हुए स्वीकार कर लिया कि अभियोजन पक्ष के गवाह का बयान विश्वसनीय नहीं है क्योंकि वह कोई सबूत नहीं है. जेयूडी आतंकियों के वकील ने लाहौर हाईकोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं का लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के साथ कोई संबंध नहीं है.

 

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