'लेबनान में मेरे आदेश पर हुआ था पेजर हमला...', PM नेतन्याहू ने बेबाक माना हिज्बुल्लाह वाला अटैक प्लान!

इस साल 17 और 18 सितंबर के बीच ईरान समर्थित आतंकवादी समूह हिज्बुल्लाह के हजारों पेजर और वॉकी-टॉकी में धमाके हुए, जिसमें लगभग 40 लोग मारे गए और 3,000 से अधिक लोग घायल हो गए. हिज्बुल्लाह के लड़ाकों द्वारा इस्तेमाल किए गए हजारों पेजर महज 30 मिनट में ब्लास्ट कर गए, जबकि हिज्बुल्लाह के लड़ाके इजरायली रडार से बचाने के लिए ऐसे पेजर का इस्तेमाल कर रहे थे जिनमें जीपीएस, माइक्रोफोन और कैमरे नहीं थे.

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इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू (फाइल फोटो) इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 8:39 AM IST

लेबनान में हुए पेजर अटैक को लेकर पहली बार इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बयान सामने आया है. उन्होंने रविवार को पुष्टि की कि उन्होंने ही सितंबर में लेबनान स्थित आतंकवादी समूह हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर पेजर हमले को मंजूरी दी थी, जिसमें लगभग 40 आतंकवादी मारे गए और 3,000 से अधिक घायल हो गए.

नेतन्याहू के प्रवक्ता ओमर दोस्तरी ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया, "नेतन्याहू ने रविवार को पुष्टि की कि उन्होंने लेबनान में पेजर ऑपरेशन को हरी झंडी दी थी."

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रविवार 10 नवंबर को एक कैबिनेट बैठक में नेतन्याहू ने यह भी स्वीकार किया कि इजरायली सेना ने सीधे आदेश मिलने के बाद बेरूत में एक सटीक हमला किया, जिसमें हिज्बुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह की मौत हो गई.

टाइम्स ऑफ इजरायल ने नेतन्याहू के हवाले से कहा, "पेजर ऑपरेशन और (हसन) नसरल्लाह का खात्मा रक्षा प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक क्षेत्र में उनके लिए जिम्मेदार लोगों के विरोध के बावजूद किया गया." 

बता दें कि इस साल 17 और 18 सितंबर के बीच ईरान समर्थित आतंकवादी समूह हिज्बुल्लाह द्वारा इस्तेमाल किए गए हजारों पेजर और वॉकी-टॉकी में धमाके हुए, जिसमें लगभग 40 लोग मारे गए और 3,000 से अधिक लोग घायल हो गए. 

सूत्रों के मुताबिक, लेबनान में हिज्बुल्लाह के लड़ाकों द्वारा इस्तेमाल किए गए पेजर महज 30 मिनट में ब्लास्ट कर गए, जबकि हिज्बुल्लाह के लड़ाके इजरायली रडार से बचाने के लिए ऐसे पेजर का इस्तेमाल कर रहे थे जिनमें जीपीएस नहीं था, कोई माइक्रोफोन और कैमरे नहीं थे.

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लेबनान ने इस हफ्ते की शुरुआत में कहा था कि उसने घातक हमलों को लेकर संयुक्त राष्ट्र की श्रम एजेंसी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें इजरायल पर मानवता, टेक्नोलॉजी के खिलाफ एक भयंकर युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया गया है. 

ईरान ने भी इजरायल पर किया था हमला

बता दें कि लेबनान में इजरायल के ऑपरेशन और हिज्बुल्लाह प्रमुख की हत्या के बाद ईरान ने यहूदी राष्ट्र पर मिसाइलों की बौछार की, जिसमें सैन्य प्रतिष्ठानों सहित इसके प्रमुख क्षेत्र को निशाना बनाया गया. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGS) के अनुसार, ईरान ने इजरायल के खिलाफ हमले में अपनी हाइपरसोनिक फत्ताह मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिसमें 400 से अधिक प्रोजेक्टाइल अपने टारगेट पर लगीं. हालांकि, इजरायल ने ईरान के दावों को खारिज कर दिया और कहा कि अधिकांश मिसाइलों को इजरायल और अमेरिका के नेतृत्व वाले रक्षात्मक गठबंधन द्वारा रोका गया.

गौरतलब है कि हमास द्वारा इजरायल पर अभूतपूर्व हमला करने के बाद मध्य पूर्व में एक साल से भी अधिक समय से उथल-पुथल भरी सुरक्षा स्थिति बनी हुई है, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए और 200 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया. इस हमले ने गाजा में युद्ध को जन्म दिया, जिसमें 41,000 से अधिक लोग मारे गए. वहीं लेबनान और ईरान में भी इजरायली हमले जारी हैं.

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हिज्बुल्लाह का एक और कमांडर ढेर

सऊदी अल-अरबिया आउटलेट की रिपोर्ट के मुताबिक हिज्बुल्लाह कमांडर सलीम जमील अय्यश हाल ही में इजरायली हवाई हमले में मारा गया. सोशल मीडिया पर अपुष्ट रिपोर्ट्स का दावा है कि सीरियाई शहर अल-कुसैर के पास एक हमले में अय्यश मारा गया. अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक अय्यश, जिसके सिर पर वाशिंगटन से 10 मिलियन डॉलर का इनाम था, हिज्बुल्लाह की यूनिट 151 हत्या दस्ते का एक वरिष्ठ सदस्य था. 2020 में, अय्यश को 2005 में बेरूत में एक आत्मघाती बम विस्फोट में पूर्व लेबनानी प्रधानमंत्री रफीक हरीरी की हत्या के लिए संयुक्त राष्ट्र समर्थित न्यायाधिकरण द्वारा अनुपस्थिति में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.

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