ईरान में 'सुपर पावर' बने मेजर जनरल वाहिदी! IRGC के आगे अराघची बेअसर, क्या छिड़ेगा US से जंग का नया दौर?

अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 48 घंटों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने न सिर्फ सैन्य फैसलों बल्कि कूटनीतिक रुख पर भी पकड़ मजबूत कर ली है. होर्मुज में जहाजों की आवाजाही रोकने जैसे कदम इस बदलाव के संकेत माने जा रहे हैं.

Advertisement
 IRGC कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी ईरान के सैन्य और कूटनीतिक निर्णय ले रहे हैं. (Photo: Reuters) IRGC कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी ईरान के सैन्य और कूटनीतिक निर्णय ले रहे हैं. (Photo: Reuters)

आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 20 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:16 PM IST

ईरान से इस वक्त एक ऐसी खबर आ रही है जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. ईरान में पर्दे के पीछे चल रही सत्ता की जंग अब खुलकर सामने आ गई है. न्यूयॉर्क पोस्ट और अमेरिकी थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान की कूटनीति और उसकी सैन्य मशीनरी पर अब पूरी तरह से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का कब्जा हो गया है.

Advertisement

 रिपोर्ट्स के मुताबिक, IRGC कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी अब ईरान के सबसे ताकतवर शख्स बनकर उभरे हैं. उन्होंने न केवल देश के सैन्य तंत्र को अपने हाथ में ले लिया है, बल्कि अमेरिका के साथ होने वाली शांति वार्ताओं की डोर भी अब उनके और उनके करीबियों के हाथ में है. इस पूरी कवायद में ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई की मौन सहमति बताई जा रही है.

इस पावर शिफ्ट का सबसे खतरनाक असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दिख रहा है. यहां ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस समुद्री रास्ते को खोलने पर सहमत होते दिख रहे थे, वहीं IRGC ने इस फैसले को पलट दिया है. वाहिदी के आदेश पर ईरान की 'फास्ट अटैक शिप्स' ने इस सामरिक रास्ते को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है. पिछले 48 घंटों में तीन जहाजों को निशाना बनाया गया है.

Advertisement
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को इस वक्त साइडलाइन कर दिया गया है. (Photo: Reuters)

 

इससे सैकड़ों जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं. हैरान करने वाली बात ये है कि ईरान के डेलिगेशन में शामिल कट्टरपंथी नेता मोहम्मद बागेर जोलगाद्र ने विदेश मंत्री अरागची की ही शिकायत कर दी. आरोप लगाया गया कि अरागची कूटनीति में 'नरमी' बरत रहे हैं. नतीजा ये हुआ कि पूरी बातचीत टीम को वापस तेहरान बुला लिया गया. अब ईरान में नरमपंथियों की आवाज खामोश कर दी गई है.

वाशिंगटन के थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर का मानना है कि इस बदलाव के बाद अब अमेरिका के साथ किसी भी सार्थक बातचीत की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई है. मंगलवार की डेडलाइन सिर पर है और सीजफायर की डोर बेहद कमजोर है. ऐसे में ये आशंका फिर से बढ़ गई है कि अमेरिका और ईरान के बीच महायुद्ध का दूसरा हिस्सा फिर से शुरू हो सकता है.

समुद्री ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, होर्मुज से आवाजाही पूरी तरह ठप हो चुकी है. केवल ईरानी जहाज ही इस मार्ग का इस्तेमाल कर रहे थे, हालांकि, वे भी अमेरिकी नाकाबंदी रेखा के करीब नहीं पहुंचे. IRGC से जुड़े मीडिया ने यह भी संकेत दिया कि ईरान ने अमेरिका के साथ अगला बातचीत दौर ठुकरा दिया है, क्योंकि अमेरिकी मांगें बहुत ज्यादा हैं. IRGC ने कूटनीतिक में हस्तक्षेप किया है.

Advertisement

रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद में हुई अमेरिका-ईरान बातचीत में भी IRGC की दखल दिखी. मेजर जनरल वाहिदी ने बातचीत के लिए जाने वाली टीम में जोलघाद्र को शामिल करने की कोशिश की थी, लेकिन प्रतिनिधिमंडल के नेताओं संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ और अराघची ने इसका विरोध किया. इसका कारण ये था कि जोलघाद्र के पास कूटनीतिक अनुभव नहीं था. 

माना जा रहा है कि उन्हें बातचीत पर निगरानी रखने और तेहरान को रिपोर्ट देने के मकसद से भेजा जाना था. जोलघाद्र ने बाद में IRGC के वरिष्ठ नेताओं से शिकायत कि थी कि बातचीत के दौरान अराघची ने अपनी सीमाएं लांघीं और 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' पर नरम रुख अपनाया. इसके बाद तेहरान के शीर्ष नेतृत्व ने बातचीत के लिए गई टीम को वापस बुला लिया.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement