पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने पहली बार सीरिया में सैन्य कार्रवाई करने का दावा किया है. ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सीरिया के अल-तन्फ सैन्य ठिकाने पर स्थित एक स्पेशल ऑपरेशंस कमांड सेंटर को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमला किया. ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई उसके सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के बामपोर स्थित सैन्य अड्डे पर हुए अमेरिकी मिसाइल हमले के जवाब में की गई है. ईरानी दावे के मुताबिक उस अमेरिकी हमले में 388वीं ईरानशहर ब्रिगेड के सात सैनिक मारे गए थे.
आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसके हमले में अमेरिकी सेना के विशेष अभियानों में इस्तेमाल होने वाला एक महत्वपूर्ण रडार सिस्टम पूरी तरह नष्ट हो गया और कई सैन्य हेलीकॉप्टर भी तबाह हो गए. ईरान ने यह भी दावा किया कि इस कार्रवाई में कई अमेरिकी सैनिक हताहत हुए हैं. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) और सीरिया की मौजूदा सरकार ने भी अब तक इस हमले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.
इस घटनाक्रम को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) पहले ही कह चुका है कि फरवरी 2026 में अल-तन्फ सैन्य अड्डे से अमेरिकी सैनिकों की पूरी तरह वापसी हो चुकी है और बेस का नियंत्रण सीरियाई प्रशासन को सौंप दिया गया था. ऐसे में ईरान के इस दावे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर उसने किस ठिकाने को निशाना बनाया और वहां वास्तव में कौन मौजूद था.
तेल टैंकर से हथियारों की बरामदगी बनी हमले की वजह?
ईरान के इस कदम के पीछे एक बड़ा कारण हाल ही में सीरिया द्वारा की गई हथियारों की बड़ी बरामदगी हो सकती है. सीरियाई सुरक्षा एजेंसियों ने इराक सीमा के पास अल-तन्फ इलाके में एक खाली तेल टैंकर की तलाशी के दौरान 100 से अधिक फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन और एंटी-टैंक मिसाइलें बरामद करने का दावा किया था. बताया जा रहा है कि यह हथियारों की खेप लेबनान के मिलिशिया संगठन हिज्बुल्लाह तक पहुंचाई जानी थी. लंबे समय से ईरान, इराक और सीरिया के रास्ते हिज्बुल्लाह तक हथियार पहुंचाने के आरोपों का सामना करता रहा है. हालांकि, पहली बार सीरिया ने ऐसी खेप को रोकते हुए जब्त कर लिया. माना जा रहा है कि इसी घटनाक्रम के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.
क्या हिज्बुल्लाह को लेकर बदल रही है सीरिया की रणनीति?
इस घटनाक्रम को हाल ही में सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के अमेरिका दौरे से भी जोड़कर देखा जा रहा है. उस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि हिज्बुल्लाह से निपटने में सीरिया अहम भूमिका निभा सकता है. हालांकि, अल-शरा ने सार्वजनिक तौर पर साफ किया था कि उनकी सरकार हिज्बुल्लाह के खिलाफ सीधे युद्ध में शामिल नहीं होगी. इसके बावजूद तेल टैंकर से हथियारों की बरामदगी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि सीरिया अब अपनी सीमा का इस्तेमाल हिज्बुल्लाह तक हथियार पहुंचाने के लिए नहीं होने देना चाहता. यदि ऐसा है, तो यह ईरान और सीरिया के रिश्तों में बदलाव का संकेत भी हो सकता है.
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