'जहां से आए हो, वहीं जाओ', 40 घंटे ट्रैवल करके होर्मुज पहुंचे बांग्लादेशी जहाज को ईरान ने लौटाया

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के कारण बांग्लादेशी जहाज बांग्लार जॉयजात्रा को होर्मुज स्ट्रेट पार करने की अनुमति नहीं मिली. जहाज के कैप्टन ने कई बार होर्मुज से गुजरने की इजाजत मांगी लेकिन उसे इजाजत नहीं मिली. कहा गया कि वो जहां से आया है, वापस वही चला जाए.

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बांग्लादेशी जहाज को ईरान ने होर्मुज पार नहीं करने दिया है (Photo: BSS/Reuters) बांग्लादेशी जहाज को ईरान ने होर्मुज पार नहीं करने दिया है (Photo: BSS/Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:22 PM IST

ईरान जंग ने बांग्लादेश की कमर तोड़ दी है और अब उसके एक इनकार से बांग्लादेशी जहाज को बीच समंदर से यू-टर्न लेकर वही जाना पड़ा है जहां से वो आया था. बांग्लादेश की सरकारी जहाज और तेल टैंकर कंपनी बांग्लादेश शिपिंग कोर्पोरेशन (BSC) का जहाज बांग्लार जॉयजात्रा होर्मुज स्ट्रेट को पार नहीं कर सका है. ईरानी अधिकारियों ने बांग्लादेशी जहाज को होर्मुज पार करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है.

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मिडिल ईस्ट में सीजफायर के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट पार करने की अनुमति न मिलने के कारण जहाज वापस संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शारजाह एंकरिज पर लौट आया. यह जानकारी BSC के मैनेजिंग डायरेक्टर महमुदुल मलेक ने बांग्लादेश की स्थानीय मीडिया को दी.

उन्होंने बताया कि ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण यह जहाज करीब 40 दिनों तक मिडिल ईस्ट में फारस की खाड़ी में फंसा रहा. मलेक ने कहा कि जहाज 37,000 टन फॉस्फेट उर्वरक लेकर सऊदी अरब के रास अल खैर बंदरगाह से केपटाउन (दक्षिण अफ्रीकी शहर) के लिए होर्मुज स्ट्रेट पार करने की इजाजत मांग रहा था.

मलेक ने बताया, 'गुरुवार रात जब जहाज स्ट्रेट के करीब पहुंचा और ईरानी अधिकारियों से संपर्क किया, तो उसे होर्मुज स्ट्रेट पार करने की इजाजत नहीं दी गई.'

उन्होंने कहा कि अब जहाज सुरक्षित स्थान पर समंदर में रुककर इंतजार करेगा. बांग्लादेश की सरकार ईरान से बात करेगी और होर्मुज से सुरक्षित रास्ता निकालने की कोशिश करेगी. उन्होंने उम्मीद जताई कि रविवार या सोमवार तक ट्रांजिट की मंजूरी मिल सकती है.

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इस जहाज पर 31 बांग्लादेशी क्रू मेंबर सवार हैं. जहाज के चीफ इंजीनियर मोम्मद रशीदुल आलम ने बताया कि गुरुवार रात करीब 10 बजे (स्थानीय समय) जहाज स्ट्रेट से लगभग 60 नॉटिकल मील दूर पहुंच गया था.

बांग्लादेशी जहाज को ईरानी अधिकारियों ने नहीं दिया क्लियरेंस

उन्होंने कहा कि ईरानी अधिकारियों से VHF रेडियो के जरिए दो बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली. तीसरी बार में कैप्टन का संपर्क ईरानी अधिकारियों से हुआ और उन्होंने होर्मुज से गुजरने की इजाजत मांगी लेकिन ईरानी अधिकारियों ने क्लियरेंस देने से इनकार कर दिया.

इसके बाद जहाज यूएई की ओर बढ़ा और स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 3 बजे शारजाह में लंगर डाल दिया.

उन्होंने बताया कि फिलहाल जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से लगभग 20 नॉटिकल मील दूर शारजाह एंकरिज पर खड़ा है और मंजूरी का इंतजार कर रहा है, साथ ही जल्द मार्ग मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है. जहाज करीब 40 घंटे की यात्रा के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तक पहुंच गया था.

उन्होंने आश्वस्त किया कि जहाज पर मौजूद 31 नाविकों के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध है और जहाज रोजाना 18 टन समुद्री पानी को शुद्ध कर सकता है, हालांकि इसके लिए इंजन को फुल स्पीड पर चलाना पड़ता है. राशनिंग के जरिए पानी की खपत घटाकर 6 टन प्रतिदिन कर दी गई है.

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उन्होंने यह भी बताया कि नाविकों का मनोबल बढ़ाने के लिए रोजाना भोजन भत्ता 7 डॉलर से बढ़ाकर 12 डॉलर प्रति व्यक्ति कर दिया गया है और बेसिक सैलरी के बराबर वॉर अलाउंस भी दिया जा रहा है.

इससे पहले भारत से माल लेकर खाड़ी पहुंचा था बांग्लादेशी जहाज

BSC के अनुसार, बांग्लार जॉयजात्रा 2 फरवरी को भारत से माल लेकर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते फारस की खाड़ी में दाखिल हुआ था. इसके बाद उसने कतर के एक बंदरगाह से स्टील कॉइल लोड किया और 27 फरवरी को जेबेल अली पोर्ट (यूएई) पहुंचा.

अगले दिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने मिडिल ईस्ट में पलटवार किया और संघर्ष और बढ़ गया.

11 मार्च को जेबेल अली पोर्ट पर माल उतारने का काम पूरा हो गया था और कुवैत के एक बंदरगाह से नया माल लोड करने की प्लानिंग थी. लेकिन क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के कारण BSC ने जहाज को सुरक्षित स्थान पर लौटाने का फैसला किया.

हालांकि फिर जहाज ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की ओर यात्रा शुरू कर दी थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से उसे वापस शारजाह लौटना पड़ा.

इसके बाद बांग्लार जॉयजात्रा ने नया माल लोड किया और सऊदी अरब के रास अल खैर पोर्ट पहुंचा. वहां से उसे 37,000 टन उर्वरक लेकर पिछले बुधवार को केप टाउन के लिए रवाना होना था. लेकिन अब जहाज को फिर से लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.

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