अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने के बाद दुनिया की नजर जिस जगह पर सबसे ज्यादा टिकी है, वह है होर्मुज स्ट्रेट. यही वह समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और एलएनजी की सप्लाई होती है. अब सवाल है कि क्या यहां हालात पूरी तरह सामान्य हो गए हैं? आइए इसका जवाब तलाशते हैं.
समुद्री ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, बुधवार को होर्मुज स्ट्रेट से सिर्फ 34 कॉमर्शियल जहाज गुजरे. यह संख्या पहले के मुकाबले जरूर बेहतर है, लेकिन युद्ध से पहले यहां हर दिन औसतन करीब 100 जहाज गुजरते थे. यानी ट्रैफिक लौट तो रहा है, लेकिन अभी पूरी रफ्तार नहीं पकड़ पाया है.
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युद्ध के दौरान हालात बेहद खराब हो गए थे. 1 मार्च से 17 जून के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव की वजह से इस रास्ते से रोजाना औसतन सिर्फ 13 जहाज ही गुजर रहे थे. कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से अपने जहाजों का रूट बदल दिया था, जबकि कुछ ने सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी थीं.
होर्मुज स्ट्रेट में क्यों सामान्य नहीं हो पा रही ट्रैफिक?
अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने पर सहमति बनी. समझौते में कहा गया कि कॉमर्शियल जहाजों की आवाजाही तुरंत शुरू होगी. इसके बाद धीरे-धीरे जहाज लौटने लगे हैं, लेकिन समुद्री कंपनियां अब भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं.
सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा की है. जॉइंट मैरिटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में कई समुद्री खतरे हैं. कई इलाकों में अब भी बारूदी सुरंगों का खतरा है और उन्हें हटाने का काम जारी है. ऐसे में जहाजों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है.
होर्मुज स्ट्रेट की भौगोलिक स्थिति भी इसे बेहद संवेदनशील बनाती है. अपने सबसे संकरे हिस्से में यह सिर्फ 24 मील चौड़ा है. एक तरफ ईरान और दूसरी तरफ ओमान है. इतनी कम चौड़ाई होने की वजह से जहाजों के पास खतरे से बचने के लिए ज्यादा जगह नहीं होती. यही वजह है कि किसी भी सैन्य तनाव का असर सबसे पहले इसी वॉटरवे पर दिखाई देता है.
पाबंदी हटने के बाद ईरान खूब बेच रहा कच्चा तेल
समझौते के तहत अमेरिका को 19 जुलाई तक ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह हटानी है. वहीं ईरान ने भी इस दौरान जहाजों की आवाजाही को युद्ध के पूर्व स्तर तक पहुंचाने की कोशिश करने का वादा किया है. पाबंदियां हटने के बाद ईरान अब तक करीब 5 करोड़ बैरल कच्चे तेल का निर्यात कर चुका है, लेकिन खाड़ी के दूसरे देशों को अभी भी सामान्य स्तर पर निर्यात करने में दिक्कत आ रही है.
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हालांकि, सबसे बड़ा सवाल अभी भी अनसुलझा है. भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण किसका रहेगा? मौजूदा समझौते में इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. फिलहाल 60 दिनों तक जहाजों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन इसके बाद ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की योजना बना सकता है. यही वजह है कि युद्ध भले रुक गया हो, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट अब भी पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य नहीं माना जा रहा.
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