महीनेभर गायब रहा टैंकर अचानक भारत के पास दिखा, ईरान युद्ध के बीच पहली बार LNG टैंकर ने पार किया होर्मुज

अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण बंद होर्मुज स्ट्रेट से पहली बार एक एलएनजी टैंकर गुजरा है. यह टैंकर महीनेभर बाद भारत के पास पहुंच गया है. टैंकर यूएई की एडीएनओसी कंपनी का है, जिसकी क्षमता 1,36,357 घन मीटर है.

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एलएनजी टैंकर ने होर्मुज पार कर लिया है (Photo: ADNOC) एलएनजी टैंकर ने होर्मुज पार कर लिया है (Photo: ADNOC)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 28 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:00 PM IST

फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान जंग शुरू होने के बाद से बंद हुआ होर्मुज स्ट्रेट अब भी लगभग बंद ही है. इस बीच ईरान ने मित्र देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, के कुछ जहाजों को होर्मुज पार करने की इजाजत दी है. लेकिन अब भी सैकड़ों की संख्या में जहाज होर्मुज पार करने के इंतजार में पानी में खड़े हैं.

होर्मुज से कुछ तेल और एलपीजी के टैंकर तो पार हुए हैं लेकिन अब तक एक भी एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) टैंकर होर्मुज पार नहीं कर पाया है. लेकिन अब खबर है कि एक एलएनजी टैंकर ने होर्मुज पार कर लिया है और वो अब भारत के पास दिख रहा है.

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समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि यूएई की एडीएनओसी (ADNOC) की ओर से मैनेज किए जाने वाले एक एलएनजी टैंकर ने होर्मुज स्ट्रेट पार कर लिया है और फिलहाल भारत के पास दिखाई दे रहा है. अगर इसकी पुष्टि होती है, तो 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला भरा हुआ एलएनजी टैंकर होगा जिसने होर्मुज पार किया है.

1,36,357 घन मीटर क्षमता वाला यह टैंकर एडीएनओसी लॉजिस्टिक्स एंड सर्विसेज की ओर से ऑपरेट होता है. इसे आखिरी बार 30 मार्च को खाड़ी क्षेत्र में देखा गया था. ICIS LNG Edge, मरीनट्रैफिक और LSEG (London Stock Exchange Group) के आंकड़ों के अनुसार, यह अब भारत के पश्चिमी तट के पास दिखाई दिया है. 

इससे संकेत मिलता है कि जहाज ने होर्मुज पार करने के लिए एक तरीका अपनाया और अपना सिग्नल बंद कर लिया जिससे इसके बारे में पता लगाना कुछ समय के लिए मुश्किल हो गया था. अब जबकि इसने गायब रहते हुए होर्मुज पार कर लिया है, तब जाकर अपना सिग्नल ऑन किया जिससे इसके होर्मुज पार करने की जानकारी बाहर आई है.

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LNG कहां इस्तेमाल होता है और भारत कितना LNG खरीदता है?

एलएनजी द्रवीकृत प्राकृतिक गैस है, जिसे -162°C तापमान पर ठंडा करके तरल रूप में बदल दिया जाता है. इससे इसका वॉल्यूम 600 गुना कम हो जाता है, जिससे इसे जहाजों के जरिए दूर-दूर तक आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है. 

एलएनजी को इस्तेमाल के लिए तरल से गैसीय रूप में बदला जाता है फिर इसे प्राकृतिक गैस की तरह इस्तेमाल किया जाता है. कई उद्योगों में इसका इस्तेमाल होता है जैसे- 

बिजली उत्पादन: गैस-आधारित पावर प्लांट्स में कोयला या तेल की जगह क्लिनर के रूप में इस्तेमाल होता है. यह सौर या पवन ऊर्जा के साथ बैकअप के रूप में भी काम करता है.

उद्योग: उर्वरक जैसे यूरिया, पेट्रोकेमिकल्स, स्टील, सीमेंट, ग्लास आदि उद्योगों में ईंधन या कच्चे माल के रूप में एलएनजी का इस्तेमाल होता है.

घरेलू और कमर्शियल इस्तेमाल: रसोई गैस, हीटिंग, हॉट वॉटर और कमर्शियल बिल्डिंग्स में भी यह इस्तेमाल होता है.

परिवहन: भारी ट्रकों, बसों, जहाजों और कभी-कभी रेल में भी इसे इस्तेमाल किया जाता है. यह डीजल से ज्यादा साफ जलता है और कार्बन उत्सर्जन कम करता है.

इसके अलावा दूरदराज के इलाकों में ऊर्जा सप्लाई और पेट्रोकेमिकल्स,प्लास्टिक्स, दवाइयां बनाने में भी कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होता है.

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भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी खरीदार है और यह अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, क्योंकि घरेलू उत्पादन सीमित है. वित्त वर्ष 2024-2025 में भारत ने लगभग 27-28 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) LNG आयात किया था.

भारत कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान, अमेरिका और अंगोला आदि देशों से एलएनजी आयात करता है. 

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