होर्मुज पर 20 फीसदी टोल से पीछे हटे ट्रंप, बताया कैसे करेंगे टैक्स की भरपाई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत कार्गो शुल्क लगाने के अपने प्रस्ताव को वापस ले लिया है. उन्होंने कहा कि अब खाड़ी देशों के साथ बड़े व्यापार और निवेश समझौते किए जाएंगे.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 24 घंटे के भीतर होर्मुज पर टोल वाले बयान से U-टर्न ले लिया है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 24 घंटे के भीतर होर्मुज पर टोल वाले बयान से U-टर्न ले लिया है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:52 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत कार्गो शुल्क लगाने के अपने प्रस्ताव को वापस ले लिया. ट्रंप ने कहा कि अब इसकी जगह खाड़ी (गल्फ) देशों के साथ बड़े व्यापार और निवेश समझौते किए जाएंगे, जो अमेरिका के लिए कहीं अधिक लाभदायक साबित होंगे. ट्रंप ने दावा किया कि इन समझौतों के तहत अमेरिका में "भारी निवेश" होगा और इससे लाखों नए रोजगार पैदा होंगे.

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ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि मिडिल ईस्ट के नेताओं के साथ हुई 'बेहद सकारात्मक बातचीत' के बाद उन्होंने 20 प्रतिशत अमेरिकी Reimbursement Fee लगाने का फैसला बदल दिया है. उनकी जगह अब खाड़ी देशों के साथ व्यापार और निवेश समझौतों पर जोर दिया जाएगा.

उन्होंने कहा, 'इन निवेशों का आकार बहुत बड़ा होगा. इससे अमेरिका में नई फैक्ट्रियां, और इंडस्ट्री स्थापित होंगी, जिससे हेल्दी सैलरी वाली नौकरियां पैदा होंगी.'

एक दिन पहले किया था 20% शुल्क का ऐलान

ट्रंप ने सोमवार को ऐलान किया था कि अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य का "गार्जियन" बनेगा और इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले सभी कार्गो पर 20 प्रतिशत शुल्क वसूलेगा. उनका तर्क था कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका उठा रहा है, इसलिए इसकी लागत की भरपाई अन्य देशों को करनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा था कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य सभी देशों के लिए खुला रहेगा, लेकिन ईरान के जहाजों और ईरानी कार्गो पर पूर्ण प्रतिबंध (Iranian Blockade) लगाया जाएगा.

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अमेरिकी सेना की तारीफ

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना की वजह से हॉर्मुज जलडमरूमध्य सुरक्षित है और तेल की आपूर्ति पहले से कहीं अधिक सुचारु रूप से जारी है. उन्होंने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन, सेंटकॉम प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर और अमेरिकी सशस्त्र बलों की सराहना की. उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान से जुड़े जहाजों और ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले कार्गो पर "पूर्ण नाकेबंदी" लागू रहेगी.

ईरान ने किया था विरोध

ट्रंप की घोषणा के तुरंत बाद ईरान ने अमेरिका की भूमिका को सिरे से खारिज कर दिया था. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने 20 प्रतिशत शुल्क के प्रपोजल पर तंज कसते हुए कहा था, "20 प्रतिशत तो बहुत ज्यादा है, हम निष्पक्ष रहेंगे."

ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने भी साफ कहा कि वह अमेरिका को हॉर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण या निगरानी नहीं करने देगा. तेहरान ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी सेना ने ईरान की अनुमति के बिना इस जलमार्ग में हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा. साथ ही क्षेत्रीय देशों को भी अमेरिका के साथ सहयोग न करने की चेतावनी दी गई.

तनाव के बीच बदली रणनीति

ट्रंप का यह नया फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है. दोनों देशों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई जारी हैं. ऐसे माहौल में ट्रंप द्वारा कार्गो शुल्क का प्रस्ताव वापस लेकर उसकी जगह व्यापार और निवेश समझौतों पर जोर देना उनकी रणनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरानी जहाजों पर प्रतिबंध जारी रहेगा और अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा.

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