ईरान को लेकर डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सख्त रूप अपनाए हुए हैं. फॉक्स से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि स्ट्रेट बहुत जल्द खुल जाएगा, नहीं तो बहुत जोरदार हमला होगा और उसके बाद भी स्ट्रेट खुल जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने दोहराया कि ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं हासिल कर सकेगा. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब उनकी ही सेना ने कहा है कि होर्मुज खुला है. वहीं ईरान-ओमान में शिपिंग कॉरिडोर बनाने पर वार्ता चल रही है.
होर्मुज को लेकर सस्पेंस के बीच ट्रंप के बयान में साफ चेतावनी दिखी. उनका कहना रहा कि ईरान के पास पहले से परमाणु हथियार नहीं हैं और यह स्थिति औपचारिक तौर पर भी कायम रहेगी. ट्रंप ने कहा कि इस माईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है.
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ईरान-ओमान में होर्मुज को लेकर चल रही वार्ता
फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट बहुत जल्द खुल जाएगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका की तरफ से "बहुत जोरदार हमला" किया जाएगा. ट्रंप ने इसके साथ ही दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा. उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच होर्मुज को फिर से खोलने को लेकर बातचीत में प्रगति की खबरें सामने आ रही हैं, हालांकि अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है.
ट्रंप ने होर्मुज को लेकर अपनी चेतावनी दोहराते हुए कहा कि स्ट्रेट बहुत जल्द खुलने वाला है, नहीं तो अमेरिका की ओर से बेहद कड़ा हमला होगा और उसके बाद भी यह रास्ता खोल दिया जाएगा. इससे साफ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति समुद्री रास्ते को खुलवाने के लिए सैन्य विकल्प को अभी भी बातचीत की मेज पर बनाए हुए हैं.
ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं रखेगा. परमाणु हथियारों को लेकर ट्रंप पहले भी कई बार कह चुके हैं कि किसी भी समझौते की सबसे बड़ी शर्त यही होगी कि तेहरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके. अमेरिकी प्रशासन भी फिलहाल होर्मुज को फिर से खोलने के साथ ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लंबी अवधि के समझौते की कोशिश कर रहा है.
'दूसरे राष्ट्रपति 50 साल पहले कर सकते थे'
ट्रंप ने अपने पिछले राष्ट्रपतियों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यह समस्या 50 साल से ज्यादा समय से चली आ रही है और दूसरे अमेरिकी राष्ट्रपति इसे पहले ही हल कर सकते थे. ट्रंप ने दावा किया कि उनके सामने एक समय ऐसा आया था जब एक बहुत बड़ा हमला होने वाला था, लेकिन बातचीत का रास्ता खुला और उन्होंने उसे आगे बढ़ाने का फैसला किया.
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ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने नेतृत्व में किए गए प्रयास के तौर पर पेश करते हुए कहा कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होता तो दुनिया की तस्वीर बिल्कुल अलग होती. हालांकि, मौजूदा समय में कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं. ईरान और ओमान होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को लेकर एक व्यवस्था पर बातचीत कर रहे हैं और अमेरिका भी इसमें शामिल है. रिपोर्ट्स के मुताबिक संभावित अंतरिम समझौते में करीब 60 दिनों की व्यवस्था पर विचार हो रहा है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर सहमति अभी बाकी है.
यानी ट्रंप के ताजा बयान में एक तरफ बातचीत और समझौते की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ ईरान के लिए सैन्य कार्रवाई की खुली चेतावनी भी. होर्मुज को लेकर आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कूटनीतिक प्रयास रंग लाते हैं या ट्रंप की धमकी के मुताबिक अमेरिका फिर सैन्य रास्ता अपनाता है.मले में उनका रुख बिल्कुल साफ है और किसी ढील की गुंजाइश नहीं है.
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