कनाडा के जंगलों में लगी भीषण आग का असर अब अमेरिका पर भी साफ दिखाई दे रहा है. कनाडा से उठे धुएं ने अमेरिका के मिडवेस्ट से लेकर नॉर्थईस्ट तक कई राज्यों को जहरीली धुंध की चपेट में ले लिया है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वह अपने जंगलों का सही तरीके से प्रबंधन नहीं कर रह. उन्होंने कहा कि इसकी वजह से अमेरिका को गंभीर प्रदूषण झेलना पड़ रहा है.
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि कनाडा की लापरवाही के कारण अमेरिका "गंदी, प्रदूषित और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हवा" से प्रभावित हो रहा है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति पूरी तरह अस्वीकार्य है और वह इस मुद्दे पर कनाडा के प्रधानमंत्री से बात करेंगे.
यह भी पढ़ें: अमेरिका पर कुदरत का ट्रिपल अटैक! बाढ़ का कहर, धधक रहे जंगल और धुएं से निकली जाए जान
ट्रंप ने आरोप लगाया कि कनाडा ने जंगलों की सफाई और सूखी झाड़ियों को हटाने जैसे बुनियादी कदम नहीं उठाए, जबकि उसे पता था कि इससे हर साल बड़े पैमाने पर जंगलों में आग लगेगी.
राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे "जानबूझकर की गई लापरवाही" बताते हुए कहा कि इससे अमेरिका को हर साल अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है. ट्रंप ने चेतावनी दी कि इस प्रदूषण की आर्थिक कीमत मौजूदा कनाडाई आयात पर लगाए जा रहे टैरिफ में जोड़ दी जाएगी.
कनाडा में जल से 850 से ज्यादा जंगल
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कनाडा में इस समय 858 जंगलों में आग लगी हुई है, जिनमें से 111 आग पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके मैनिटोबा, सस्केचेवान और ओंटारियो प्रांत हैं.
यह भी पढ़ें: 'कनाडा-मेक्सिको बाहर', ट्रंप ने कहा- अमेरिका को फिर से बनाओ FIFA का मेजबान
अमेरिका में बिगड़ा एयर क्वालिटी
वायु गुणवत्ता पर नजर रखने वाली संस्था IQAir के मुताबिक, इस सप्ताह डेट्रॉइट, शिकागो, न्यूयॉर्क, टोरंटो और मिनियापोलिस दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे. विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों की आग से निकलने वाला धुआं सामान्य वायु प्रदूषण की तुलना में अधिक जहरीला होता है और इससे दिल के दौरे, स्ट्रोक, कैंसर, गर्भावस्था संबंधी मुश्किलें और इससे लड़ने की क्षमता पर गंभीर असर पड़ सकता है.
हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है कि सप्ताहांत में बारिश के बाद धुएं का असर कुछ कम हो सकता है. इससे न्यू जर्सी में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप फाइनल के दौरान वायु गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद जताई गई है.
aajtak.in