अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. लगातार 11वें दिन अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए. इसी बीच यमन के ईरान समर्थित हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में नौसैनिक नाकाबंदी (Maritime Embargo) का ऐलान कर दिया. इससे मिडिल ईस्ट में एक और नया मोर्चा खुलने की आशंका बढ़ गई है.
अब तक दुनिया की नजर होर्मुज स्ट्रेट पर थी, जहां ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है. लेकिन हूतियों के इस ऐलान के बाद बाब अल-मंदेब भी वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई के लिए बड़ा संकट बन सकता है. यही वजह है कि इसे होर्मुज के जवाब में ईरान की नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
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हूतियों ने कहा कि उनका समुद्री प्रतिबंध तुरंत प्रभाव से लागू होगा. इसके जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने चेतावनी दी कि वह इस नाकाबंदी का सैन्य जवाब देगा. साथ ही बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले अपने जहाजों की सुरक्षा बढ़ाने का भी ऐलान किया है.
ईरान पर अमेरिका की लगातार 11वें दिन बमबारी
उधर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उसने ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, एयर डिफेंस सिस्टम और समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया है ताकि ईरान की होर्मुज स्ट्रेट में हमले करने की क्षमता कमजोर की जा सके. अमेरिका का दावा है कि उसकी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मई की शुरुआत से अब तक करीब 900 व्यापारिक जहाज और 45 करोड़ बैरल कच्चा तेल सुरक्षित रूप से इस मार्ग से गुजर चुका है.
हालांकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई जारी रखी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक उसने होर्मुज स्ट्रेट में एक तेल टैंकर को निशाना बनाया, जिसके बाद पायलट टीम को जहाज छोड़ना पड़ा. वहीं कुवैत ने भी आरोप लगाया कि ईरान ने उसके बिजली और डिसैलिनेशन प्लांट्स पर हमला किया, हालांकि बाद में आग पर काबू पा लिया गया.
अमेरिका-ईरान से 10 दिन के सीजफायर की पेशकश
इन घटनाओं के बीच कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं. ब्रिटिश न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्षेत्रीय मध्यस्थों ने अमेरिका और ईरान के सामने 10 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव रखा है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी संकेत दिए हैं कि उसे कुछ नए प्रस्ताव मिले हैं, हालांकि उसने इनकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की.
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जंग के बढ़ते दायरे का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है. ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि अमेरिकी कच्चे तेल के दाम भी बढ़े हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज के साथ बाब अल-मंदेब में भी जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो दुनिया की तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है. एक बार फिर इसका गंभीर असर एशियाई देशों पर पड़ सकता है.
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