पश्चिम बंगाल में म्युनिसिपल भर्ती घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को बड़ा अभियान चलाया. केंद्रीय एजेंसी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक और पूर्व मंत्री रहे मदन मित्रा से जुड़ी कई संपत्तियों पर एक साथ छापेमारी की है. ये कार्रवाई नगर पालिकाओं में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की जा रही है.
सूत्रों के अनुसार, मदन मित्रा से जुड़े सात ठिकानों की तलाशी ली जा रही है. इनमें कोलकाता के भवानीपुर स्थित उनका आवास, दक्षिणेश्वर में स्थित एक पांच मंजिला अपार्टमेंट और दक्षिणी बाहरी इलाके जोका में स्थित एक फ्लैट शामिल है. इसके अलावा उत्तरी कोलकाता के बेलेघाटा में एक संपत्ति, भवानीपुर और संतोषपुर के दो स्थानीय क्लबों में भी तलाशी अभियान चलाया गया.
जांच एजेंसी भवानीपुर स्थित धीरेंद्रनाथ गुप्ता रोड वाले घर पर भी पहुंची, जहां मदन मित्रा अपने परिवार के साथ रहते हैं. वहां उनसे पूछताछ भी की गई. वो वर्तमान में पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले की कमरहाटी विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं. वो राजनीति में प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं. लेकिन अक्सर अपने विवादित बयानों की वजह से चर्चा में रहे हैं.
ED का दावा है कि मदन मित्रा ने कमरहाटी और उसके पड़ोसी टीटागढ़ नगर निकाय समेत कई नगर पालिकाओं में विभिन्न पदों पर अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति कराने के लिए बिचौलियों के जरिए नकद और सोने के रूप में रिश्वत ली थी. वो ऐसी करीब 125 गैर-कानूनी नियुक्तियों से जुड़े हुए हैं. जांच एजेंसी वित्तीय दस्तावेजों और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की तलाश कर रही है.
इसके जरिए भर्ती प्रक्रिया में हुए भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की पुष्टि हो सकती है. अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी का मकसद संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और उससे जुड़े सबूत जुटाना है. ईडी का कहना है कि मौजूदा कार्रवाई की कारोबारी अयान सिल से मिली जानकारियों पर टिकी है. उनको 20 मार्च 2023 को इसी मामले में गिरफ्तार किया गया था.
जांच एजेंसी के अनुसार, अयान सिल की कंपनी 'एबीएस इन्फोजोन प्राइवेट लिमिटेड' कई नगर पालिकाओं के लिए भर्ती प्रक्रियाओं को संचालित करने में शामिल थी. आरोप है कि कंपनी सरकारी संस्थानों की भर्ती प्रक्रिया के लिए OMR शीट तैयार करने, परीक्षाएं आयोजित करने और इंटरव्यू प्रक्रिया का प्रबंधन करने में शामिल थी. जांच के दौरान गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले थे.
ED के मुताबिक, जब स्कूल जॉब रिक्रूटमेंट स्कैम के सिलसिले में अयान सिल से जुड़ी संपत्तियों की जांच की जा रही थी, तब ऐसे सबूत मिले जिनसे पश्चिम बंगाल की कम से कम सात नगर पालिकाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अवैध नियुक्तियों का खुलासा हुआ. ग्रुप-D स्टाफ, टाइपिस्ट और अन्य निचले स्तर के पदों पर नियुक्ति दिलाने के बदले उम्मीदवारों से मोटी रकम वसूली गई.
ईडी अधिकारियों का मानना है कि नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपए का लेन-देन हुआ, जिसमें कमरहाटी नगर पालिका भी प्रभावित निकायों में शामिल थी. अप्रैल 2023 में कलकत्ता हाई कोर्ट को सौंपी गई एक रिपोर्ट में ED ने दावा किया था कि अयान सिल ने विभिन्न नगर पालिकाओं में नौकरी दिलाने का वादा करके अभ्यर्थियों से 200 करोड़ से अधिक की रकम इकट्ठा की थी.
जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में अब तक 111 करोड़ रुपए जब्त किए जा चुके हैं. रिपोर्ट में कमरहाटी, टीटागढ़, कांचरापाड़ा, न्यू बैरकपुर, टाकी, हालिसहर, बारानगर, साउथ दमदम और नॉर्थ दमदम नगर पालिकाओं के नाम शामिल थे, जहां भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई थीं. प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में वर्ष 2024 में चार्जशीट दाखिल की थी.
वहीं 11 मई को TMC नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कैबिनेट में पूर्व मंत्री रहे सुजीत बोस को भी गिरफ्तार किया गया था. उन पर साउथ दमदम नगर पालिका में लगभग 150 गैर-कानूनी भर्तियों में संलिप्तता का आरोप है. उस समय सुजीत बोस नगर पालिका के वाइस-चेयरमैन के पद पर कार्यरत थे. मदन मित्रा के ठिकानों पर छापेमारी ने भर्ती घोटालों को चर्चा में ला दिया है.
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