पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले का आखिरी गांव उत्तर अंदारण, तीन बीघा के पास मेखलीगंज-कुचलीबाड़ी सीमा पर स्थित है. यह गांव चारों ओर से बांग्लादेश के लालमोनिरहाट जिले के अंगरपोटा दहग्राम से घिरा हुआ है. इलाका फेंसिंग (बाड़) मुक्त होने के कारण, यहां के स्थानीय निवासियों को लगातार बांग्लादेशी अपराधियों के उत्पीड़न और अत्याचारों का सामना करना पड़ता था.
जैसे ही शाम ढलती, इस गांव में बांग्लादेश से आने वाले बदमाशों की आवाजाही बढ़ जाती. अंधेरे का फायदा उठाकर वे गौशालाओं के दरवाजे तोड़कर मवेशी चुरा लेते और वापस बांग्लादेश भाग जाते.
स्थानीय निवासी बीएसएफ में शिकायतें दर्ज कराते, जिसके चलते दोनों देशों की सीमा सुरक्षा बलों के बीच फ्लैग मीटिंग भी होती, लेकिन बदमाश ज्यादातर पकड़े नहीं जाते थे.
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इन अत्याचारों से बचने के लिए ग्रामीणों ने रात में पेट्रोलिंग शुरू कर दी थी. ग्रामीण मुख्य रूप से कृषि में लगे हुए हैं, दिन भर खेतों में कड़ी मेहनत करने के बाद वे थके-हारे घर लौटते हैं.
लेकिन जैसे ही वे रात को अपनी आंखें बंद करते, बांग्लादेशी चोरों का आतंक शुरू हो जाता. उन्होंने गांव की रखवाली करने और अपने मवेशियों को बांग्लादेशी अपराधियों से बचाने के लिए समूह बना लिए. बांग्लादेशी बदमाश पेट्रोलिंग कर रहे भारतीयों पर भी हमला करते और लूटपाट करते थे.
4 मई को नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद से बंगाल में हालात बदल गए हैं. बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से कांटेदार तार की बाड़ लगाने के लिए भूमि उपलब्ध कराने के फैसले से निवासियों ने राहत की सांस ली है. भूमि का मापन शुरू हो चुका है और बाड़ लगाने का काम जल्द ही शुरू हो जाएगा.
जानकारी के मुताबिक, शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से बांग्लादेशियों के अत्याचार रुक गए हैं. राज्य पुलिस और बीएसएफ के सहयोग से बांग्लादेशी घुसपैठ करने की हिम्मत नहीं कर रहे हैं. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि एक बार कटीले तारों की फेंसिंग का काम पूरा हो जाने के बाद, यह समस्या स्थायी रूप से हल हो जाएगी.
मंसूर हबीबुल्लाह