दो नहीं तीन गुटों में बंटी TMC... कुछ बागी, कुछ ममता के साथ, और कुछ साइलेंट!

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से टीएमसी में भगदड़ मची हुई है. विधायकों के बाद सांसद भी बागवत की रास्ते पर चल पड़े हैं. इसके चलते टीएमसी तीन धड़ों में बंटी हुई नजर आ रही है. एक गुट ममता बनर्जी के साथ है तो बागी गुट काकोली घोष के साथ है. इसके अलावा तीसरा गुट भी है, जो साइलेंट है.

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टीएमसी कैसे तीन धड़ों में बंट गई है (Photo-ITG) टीएमसी कैसे तीन धड़ों में बंट गई है (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 09 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:01 AM IST

पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही ममता बनर्जी की पार्टी ताश के पत्ते की तरह बिखरती जा रही है. विधायक दल में बिखराव के बाद टीएमसी के सांसदों में टूट कन्फर्म हो गई है. टीएमसी के बागी गुट का दावा है कि पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद एक अलग गुट बनाने और बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन करने का फैसला किया है.

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ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका है, जो पहले ही बंगाल विधानसभा में टीएमसी विधायक दल पर अपना नियंत्रण खो चुकी हैं. वहीं, अब काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी गुट ने 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया, जिनमें से 14 सांसद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर सुवेंदु अधिकारी के साथ हुई बैठक में शामिल थे. ममता बनर्जी के करीबी लोगों ने बागी सांसदों की संख्या 12 बताई. 

ममता बनर्जी की टीएमसी दो नहीं बल्कि तीन धड़ों में बटी हुई फिलहाल नजर आ रही है. टीएमसी सांसदों का एक धड़ा लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार के साथ है तो सांसदों का दूसरा गुट अभी भी ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ा है. इसके अलावा तीसरा गुट है, जो साइलेंट मोड में है, वो न बागी गुट के साथ और न ही ममता बनर्जी के साथ दिख रहा. 

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काकोली घोष के साथ कौन-कौन सांसद
पश्चिम बंगाल में टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसद है. काकोली घोष का दावा है कि टीएमसी 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अलग व्यवस्था देने की मांग की है. टीएमसी के बागी सांसदों ने एनडीए में शामिल होने की इच्छा जतायी है. 

काकोली घोष के साथ टीएमसी के जो सांसद फिलहाल खड़े हैं, उसमें 20 सांसदों का दावा किया जा रहा है. लेकिन अभी तक जो नाम सामने आए हैं, उसमें टीएमसी के 14 सांसद के नाम है. काकोली घोष के साथ में शताब्दी रॉय, बापी हलदर, अरूप चक्रवर्ती, जून मालिया, दीपक अधिकारी (देव), कालीपदा सरेन,  जगदीश बसुनिया, असित मल, अबू ताहिर खान, खलीकुर रहमान, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी और पार्थ भौमिक हैं. 

ममता बनर्जी के साथ कौन-कौन खड़ा है
टीएमसी में टूट के बाद भी पार्टी सांसदों का एक धड़ा ममता बनर्जी के साथ खड़ा है. ममता के साथ मजबूती से खड़े रहने वाले सांसदों में अभिषेक बनर्जी, सायनी घोष, कीर्ति आजाद, महुआ मोइत्रा, सौगत रॉय, सुदीप बंद्योपाध्याय और कल्याण बनर्जी हैं. काकोली घोष ने भी इन्हीं सांसदों का नाम लेते हुए कहा कि ये टीएमसी के बागी गुट का हिस्सा नहीं हैं. इसका मतलब साफ है कि ये सांसद ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं. 

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काकोली घोष और ममता बनर्जी के साथ खड़े सांसदों के नाम सामने आ गए हैं. इस तरह से साफ है कि टीएमसी के सात सांसद अभी भी ममता बनर्जी के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़े हैं.  कीर्ति आजाद से लेकर कल्याण बनर्जी और महुआ 
मोइत्रा के बयाने से साफ जाहिर भी होता है. 

साइलेंट मोड में टीएमसी का तीसरा गुट
काकोली घोष के साथ टीएमसी के जो सांसद खड़े हैं, उन्होंने सोमवार को पहले बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर पर मिले और उसके बाद शाम को शताब्दी राय के घर पर मीटिंग की. इन दोनों ही जगहों पर टीएसी के 14 सांसद भी शामिल रहे थे. काकोली घोष ने टीएमसी के उन सांसदों के नाम भी बता दिए हैं, जो उनके साथ नहीं है. 

टीएमसी के बगावत के बीच पार्टी के कई सांसद साइलेंट मोड में खड़े नजर आ रहे हैं, जो न ही बागी गुट के साथ हैं और न ही ममता बनर्जी के पक्ष में दिख रहे. इसमें सजदा अहमद, रचना बनर्जी, प्रतिमा मोंडल, माला रॉय, मिताली बेग, शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान किसी के पक्ष में खुलकर खड़े नहीं दिख रहे हैं. इन नेताओं के कोई बयान भी सामने नहीं आ रहे हैं, जिससे उनके आगे की राजनीतिक कदम पर कोई कयास लगाया जा सके. 

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काकोली के दावे पर ममता गुट का सवाल
टीएमसी के इन 14 लोकसभा सांसदों के अलावा काकोली घोष गुट ने छह अन्य लोकसभा सांसदों के समर्थन का तो दावा किया, लेकिन उनके नाम सामने नहीं आ सके. दरअसल, दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों से बचने के लिए काकोली घोष को कम से कम 19 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है.

ममता बनर्जी के करीबी लोगों का कहना है कि बागी नेताओं को दो-तिहाई सांसदों का समर्थन हासिल नहीं है. टीएमसी के बर्धमान-दुर्गापुर से सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि ये बात बीजेपी के 'डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट' की तरफ से फैलाई जा रही है, जिसमें 20 सांसदों के होने की बात कही जा रीह है. ये झूठी और मनगढ़ंत कहानी है, क्योंकि भूपेंद्र यादव के घर पर हुई बैठक में 13 सांसद शामिल हुए थे, जिसमें12 लोकसभा से और एक राज्यसभा से थे. इनके अलावा किसी और ने इस पर दस्तखत नहीं किए हैं.
 

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