'अवामी लीग पर बैन लोकतंत्र के खिलाफ', तसलीमा नसरीन ने किया शेख हसीना का समर्थन

बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को लोकतंत्र के खिलाफ बताया है. उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को गैरकानूनी घोषित कर बैन नहीं किया जाना चाहिए. तसलीमा ने शेख हसीना के देश छोड़ने और अवामी लीग कार्यकर्ताओं पर हो रहे अत्याचारों का भी जिक्र किया.

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तस्लीमा नसरीन ने आवामी लीग को चुनाव लड़ने देने की मांग की. (File Photo) तस्लीमा नसरीन ने आवामी लीग को चुनाव लड़ने देने की मांग की. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:48 AM IST

निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश की अवामी लीग पर लगाए गए प्रतिबंध की निंदा की है. उन्होंने इस फैसले को 'लोकतंत्र के खिलाफ' करार दिया है. उनके मुताबिक किसी भी राजनीतिक दल को गैरकानूनी घोषित करके बैन नहीं किया जाना चाहिए.

अवामी लीग पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 2025 में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत बैन लगा दिया था. इस पर तसलीमा नसरीन ने कहा, 'किसी भी राजनीतिक दल पर प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए. जिस तरह से अवामी लीग की शेख हसीना को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, वो सवाल खड़े करता है.'

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बता दें कि अगस्त 2024 में बड़े पैमाने पर हुए सरकार विरोधी हिंसक आंदोलनों के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा था. इसके साथ ही उन्हें बांग्लादेश से भागना पड़ा था और वो तब से भारत में रह रही हैं.

अवामी लीग पर से तुरंत हटे प्रतिबंध

कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तसलीमा नसरीन ने अवामी लीग पर बैन को लेकर कहा कि मैं चाहती हूं कि ये बैन जल्द से जल्द हटे. पार्टी को चुनावों में हिस्सा लेने की इजाजत दी जाए और शेख हसीना बांग्लादेश वापस लौटें.

उन्होंने आगे कहा कि हसीना के देश छोड़ने के बाद अवामी लीग के कार्यकर्ताओं को भारी हिंसा का सामना करना पड़ा. कई कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई. तसलीमा ने कहा, 'शेख हसीना वापस जाना चाहती हैं, लेकिन मुझे नहीं पता कि ये मुमकिन होगा या नहीं. लेकिन मेरे मामले में तो कोई भी मुझे वापस नहीं बुलाना चाहता. मैं अपने देश कैसे वापस जाऊं?'

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अल्पसंख्यकों पर जताई चिंता

तसलीमा ने इस दौरान बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों (विशेषकर हिंदुओं) पर हो रहे अत्याचारों पर भी चिंता जताई. उन्होंने जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की तत्काल रिहाई की मांग की. उन्होंने कहा, 'चाहे मोहम्मद यूनुस का शासन रहा हो या आज का तारिक रहमान का दौर, बांग्लादेश अंधेरे से बाहर नहीं निकल पाया है. धार्मिक कट्टरपंथी ताकतें लगातार मजबूत हो रही हैं. महिलाओं को आज भी आजादी और पिता की संपत्ति में बराबर का हक नहीं हैं.'

कट्टरपंथी ताकतों के बढ़ते प्रभाव पर हमला बोलते हुए तसलीमा ने कहा, 'अब जमात-ए-इस्लामी जैसी पार्टी मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभर रही है. वो महिलाओं की समानता के खिलाफ हैं और शरिया कानून चाहते हैं. अगर ऐसा हुआ तो वहां कोई भी अल्पसंख्यक जिंदा नहीं रह पाएगा.'

छात्र आंदोलन और मदरसों पर गंभीर आरोप

2024 के छात्र आंदोलन पर सवाल उठाते हुए तसलीमा ने कहा कि शुरुआत में लगा था कि स्टूडेंट्स कोटा सिस्टम को खत्म करने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं. तब शेख हसीना ने उनकी मांगें मान भी ली थीं. लेकिन फिर भी सरकार को गिरा दिया गया और बाद में पता चला कि इस आंदोलन के पीछे 'जिहादी' (इस्लामिक कट्टरपंथी) थे.

उन्होंने मदरसों को लेकर दावा किया कि मदरसे बिना किसी सरकारी निगरानी के चल रहे हैं, जहां गैर-मुस्लिमों के खिलाफ नफरत सिखाई जाती है. उन्होंने मांग की कि सरकार को सभी मदरसों पर सख्त कंट्रोल रखना चाहिए और एजुकेशन सिस्टम में सुधार करने चाहिए.

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19 साल बाद कोलकाता वापसी

बता दें कि तसलीमा नसरीन लगभग 19 साल बाद कोलकाता वापस लौटी हैं, जहां शनिवार को रवींद्र सदन में आयोजित एक राज्य सरकार के कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित किया गया. 2007 में उनकी किताब 'द्विखंडितो' पब्लिश होने के बाद उनका भारी विरोध हुआ था. ऐसे में तत्कालीन वाममोर्चा सरकार को उन्हें शहर से बाहर भेजना पड़ा था.

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