'मार्गदर्शक' ममता, तख्तापलट और नया अध्यक्ष... TMC की बगावत ये कौन सा मोड़ ले रही?

बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही ममता बनर्जी की सियासी जमीन सिकुड़ती जा रही है. पहले विधानसभा चुनाव में मात मिली, फिर विधायक और सांसदों की बगावत में उलझी और अब पार्टी पर नियंत्रण की लड़ाई छिड़ गई है. ममता बनर्जी का तख्तापलट हो चुका है, जिसके चलते अब सवाल उठने लगा है कि टीएमसी की लड़ाई कौन सा मोड़ ले रही है?

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ममता बनर्जी कैसे बागियों के चक्रव्यूह में घिरती जा रही (Photo-ITG) ममता बनर्जी कैसे बागियों के चक्रव्यूह में घिरती जा रही (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:43 PM IST

पश्चिम बंगाल की चुनावी शिकस्त खाते ही ममता बनर्जी की टीएमसी ताश के पत्ते की तरह बिखर गई. टीएमसी में मचा घमासान अब और बढ़ता जा रहा है. अब पार्टी पर कब्जा जमाने की जंग शुरू हो गई है. नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के अगुवाई वाले गुट ने ममता बनर्जी का तख्तापलट कर टीएमसी के नए अध्यक्ष को तौर पर अरूप रॉय की ताजपोशी कर दी है.  

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कोलकाता में सोमवार को बागी गुट के नेताओं की बैठक हुई, जिसमें टीएमसी में नया संगठनात्मक ढांचा का गठन किया. ममता बनर्जी को टीएमसी के अध्यक्ष से हटा दिया गया है और उनकी जगह पर एक नई लीडरशिप स्ट्रक्चर पेश किया गया. ममता बनर्जी को अब तक की सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है. 

बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी लगातार सियासी संकट में घिरती जा रही है. पहले विधायक, फिर लोकसभा सांसद बागी हुए और अब टीएमसी की कमान भी उनके हाथ से निकल गई है. इससे साफ है कि टीएमसी के भीतर सत्ता संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है और ममता के हाथों से बाजी निकलती जा रही है. 

ममता बनर्जी की जगह अरूप रॉय बने अध्यक्ष 
टीएमसी के बागी विधायकों ने सोमवार को कोलकाता के एक होटल में एक बैठक की, जिसे टीएमसी के अधिवेशन का नाम दिया गया. राज्यभर से बागी विधायक, पूर्व पार्षद और पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए. इस बैठक में टीएमसी के'दो फूलों वाला' चुनाव चिह्न प्रमुखता से दिखाया गया, लेकिन मंच पर ममता बनर्जी की तस्वीर नदारद रही, जो लंबे समय से पार्टी का मुख्य चेहरा रही हैं. 

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कोलकाता में हुए बागी नेताओं की बैठक में ममता बनर्जी को अध्यक्ष से हटाकर नए 10 सदस्यों वाली नेशनल वर्किंग कमेटी को मंजूरी दी गई. फिर  30 सदस्यों वाली कमेटी में बदल दिया गया. ममता बनर्जी की जगह पर वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया अध्यक्ष चुना गया. फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष जबकि ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा महासचिव, विधायक अखरुज्जमान अंसारी को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई. 

ममता बनर्जी के हाथ से निकलती टीएमसी 
टीएमसी के बागी विधायकों ने जिस तरह ममता बनर्जी का तख्तापलट कर नया संगठनात्मक ढांचा तैयार किया है, उससे साफ है कि ममता के हाथों से अब पार्टी निकलती जा रही है. विधायकों और सांसदों के बाद पार्टी संगठन भी हाथ से निकलता जा रहा है. बागी गुट की अगुवाई कर रहे ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि यह पूरा अधिवेशन पार्टी संविधान के अनुरूप आयोजित किया गया और इसकी जानकारी चुनाव आयोग को दी जाएगी. 

दरअसल, अब बागी गुट का अगला टारगेट टीएमसी पर कब्जा करने की है. इसीलिए टीएमसी के नई वर्किंग कमेटी के गठन के बाद बागी नेता ऋतब्रत ने कहा कि नई लीडरशिप टीम जल्द ही जिला समितियों, प्रदेश इकाई और प्रवक्ताओं के पैनल का गठन करेगी. हालांकि इस कमेटी या संगठन के ढांच में सांसद अभिषेक बनर्जी को न तो कोई पद दिया गया है, न ही उन्हें शामिल किया गया है.

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ममता बनर्जी के करीबी रहे अरूप रॉय और फिरहाद हकीम जैसे नेता ऋतब्रत बनर्जी के साथ खड़े ही नहीं है बल्कि नए लीडरशिप की अगुवाई भी करने जा रहे हैं. कोलकाता में हुए बैठक में फिरहाद हकीम के अगुवाई में 70 पूर्व पार्षद भी शामिल हुए. ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यह असली या नकली होने का सवाल नहीं है. हम ही तृणमूल कांग्रेस हैं और  इस बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी निर्वाचन आयोग को देंगे. इस तरह टीएमसी को कब्जे में लेने की जंग आगे और भी तेज होगी. 

ममता बनर्जी के लिए बागियों का प्लान क्या है? 
टीएमसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से पहले ममता बनर्जी को बागी गुट के नेताओं ने बेदखल कर दिया है और संगठनात्मक नई टीम का भी गठन कर दिया है. ममता को अध्यक्ष पद से हटाकर अरूप रॉय को पार्टी की कमान सौंप दी गई हो, लेकिन बागी नेताओं ने ममता बनर्जी के लिए खास प्लान बना रखा है. 

कोलकाता में हुए विशेष अधिवेशन में पूर्व सीएम ममता बनर्जी को लेकर नरम रुख अपना रखा और सांसद अभिषेक बनर्जी पर जमकर भड़के. बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि ममता दीदी चाहें तो हमारी मुख्य सलाहकार बन सकती हैं. ममता बनर्जी अगर मुख्य सलाहकार बनना चाहें, तो उनका स्वागत है. इस तरह टीएमसी के सलाहकार के रूप में काम करने का ऑफर भी दिया गया है. 

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ममता के साथ कितनी टीएमसी खड़ी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद से टीएमसी में बगावत का बिगुल बज गया था. सबसे पहले ऋतब्रत बनर्जी के अगुवाई में टीएमसी के विधायकों में टूट पड़ी. टीएमसी के 80 में से 60 विधायकों ने ममता बनर्जी के बजाय ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता मान लिया. इतना ही नहीं विधानसभा स्पीकर के पास जाकर ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष भी बना दिया. 

ममता बनर्जी के साथ 20 विधायक ही खड़े हैं, जिसमें से कुछ विधायकों से सुर भी बदले हुए नजर आ रहे हैं. ऋतब्रत  बनर्जी की अगुवाई में कहा जा रहा है कि 64 से ज्यादा विधायक हैं. इस लिहाज से पार्टी के पास महज 16 विधायक ही रह गए हैं. 

ममता बनर्जी को सियासी झटके सिर्फ विधायकों के ही नहीं लगे बल्कि सांसदों का मिजाज भी बदल गया. टीएमसी के टिकट पर जीतकर 28 लोकसभा सांसद आए, जिसमें से 20 सांसद बागी हो गए. इन 20 बागी सांसदों ने नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर लिया है. इसके साथ ही पार्टी के लोकसभा में सांसदों की संख्या घटकर 8 पर आ गई है. 

वहीं, टीएमसी के 13 राज्यसभा सांसद थे, जिनमें से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं.  राज्यसभा सांसद पद छोड़ने के साथ सुखेंदु शेखर ने टीएमसी को भी अलविदा कह दिया था. इसके बाद सुष्मिता देव, कोयल मलिक और प्रकाश बरिक ने राज्यसभा के साथ टीएमसी से भी इस्तीफा दे दिया. इस तरह से टीएमसी के 9 राज्यसभा सांसद फिलहाल ममता बनर्जी के साथ हैं. 

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टीएमसी की बगावत ये कौन सा मोड़ ले रही
ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर टीएमसी का गठन किया था. इसके बाद बंगाल की सियासत में संघर्ष कर 2011 में लेफ्ट के 34 साल के शासन को उखाड़ फेंका था. लेफ्ट को सत्ता से बाहर करने के बाद 2011 में ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी और 15 साल तक लगातार राज किया. 2026 के चुनाव में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी को बीजेपी के हाथों करारी मात खानी पड़ी और सत्ता से बेदखल होना पड़ा. 

बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही टीएमसी में बगावत छिड़ गई. विधायक और सांसद के बागी होने के बाद अब टीएमसी पर उनकी पकड़ ढीली ही नहीं पड़ रही बल्कि हाथ से निकल रही है. टीएमसी फिलहाल तीन गुटों में बटी हुई है, जिसमें एक धड़ा बागी विधायकों और दूसरा धड़ा बागी सांसदों का है जबकि तीसरा गुट ममता बनर्जी के साथ है. बागी गुट में सांसदों ने फिलहाल एनसीपीआई में खुद को विलय कर लिया है, लेकिन आगे की लड़ाई के लिए मॉनसून सत्र का इंतजार कर रहे हैं.

ऋतब्रत बनर्जी के अगुवाई में बागी विधायकों का जो गुट है, वो अब टीएमसी पर अपना कब्जा जमाने की कवायद शुरू कर दिया है. इसके लिए टीएमसी के वर्किंग कमेटी की बैठक कर ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाकर अरूप रॉय को बना दिया है. इसके अलावा संगठन में भी कई ऐसे चेहरे रखे गए हैं, जो ममता बनर्जी की टीम का हिस्सा हुआ करते थे. 

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बागी गुट की अगुवाई कर रहे ऋतब्रत बनर्जी ने ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के संविधान के अनुच्छेद 20 में कहा गया है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक हर तीन साल में होनी चाहिए. 2022 के बाद से टीएमसी की कोई बैठक नहीं हुई है. पार्टी के नेशनल वर्किंग कमेटी का गठन 12 फरवरी 2022 को हुआ था और उसका कार्यकाल इस साल 11 फरवरी को खत्म हो गया है. इसके बाद से कोई नई कमेटी नहीं बनाई गई. ऐसे में बागी गुट ने कहा कि  पार्टी के संगठनात्मक ढांचे का पुनर्गठन करना जरूरी हो गया था. यह एक तरह से पार्टी पर अपना कब्जा जमाने का दूसरा दांव चला है, जो ममता के लिए बड़ा झटका माना जा रहा. 

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