इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) ने अपने कोलकाता के वाइस-प्रेसिडेंट राधारमण दास को संगठन की सभी जिम्मेदारियों से हटा दिया है. राधारमण दास को मीडिया, सरकारी अधिकारियों या किसी भी सार्वजनिक मंच पर संगठन का प्रतिनिधित्व करने से रोक दिया गया है.
यह कार्रवाई राधारमण दास द्वारा सियासी और धार्मिक रूप से संवेदनशील मुद्दों पर कई साल तक सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने के बाद की गई है.
हालांकि, ISKCON का आधिकारिक तौर पर कहना है कि यह अनुशासनात्मक कार्रवाई उनके विचारों की वजह से नहीं, बल्कि संगठन के नियमों और प्रक्रियाओं का बार-बार उल्लंघन करने की वजह से की गई है.
ISKCON ने क्या कहा है?
रविवार को जारी एक मीडिया बयान में इस्कॉन ने कहा कि दास को 'अनिवार्य छुट्टी' पर भेज दिया गया है. उन्हें संगठन की तरफ से कोई बात न करने या कोई काम न करने का निर्देश दिया गया है.
संगठन ने कहा कि 100 से ज्यादा देशों में काम करने वाली एक ग्लोबल संस्था के तौर पर, इस्कॉन अपने सदस्यों के लिए तय नियमों, मानकों और नैतिक दिशानिर्देशों का पालन करता है. उसने कहा कि दास से कई सालों तक 'कई बार अनुरोध' करने के बाद सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं.
इस्कॉन के मुताबिक, राधारमण दास संगठन की प्रक्रियाओं का पालन करने में नाकाम रहे, उन्होंने संगठन के आधिकारिक रुख के खिलाफ जाकर एकतरफा कदम उठाए और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर के मामलों में दखल दिया. संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके कुछ कदमों से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सदस्यों की सुरक्षा और भलाई खतरे में पड़ गई.
इस्कॉन ने कहा कि उन्होंने अनिवार्य छुट्टी के दौरान दास को अपने कामकाज के तरीके पर विचार करने और उसे सुधारने के लिए प्रोत्साहित किया था.
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राधारमण दास ने क्या कहा?
इस्कॉन के बयान के तुरंत बाद, दास ने कन्फर्म किया कि उन्हें उनकी सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है और मीडिया, सरकारी अधिकारियों या किसी भी पब्लिक फोरम के सामने ऑर्गनाइजेशन को रिप्रेजेंट न करने का निर्देश दिया गया है.
उन्होंने कहा, "मैं अधिकारियों द्वारा लिए गए फैसलों का सम्मान करता हूं और मुझे दिए गए निर्देशों का पालन करूंगा."
राधारमण दास ने उन 6 वजहों का जिक्र किया, जिनकी वजह से उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई. उनके मुताबिक, इन वजहों में बांग्लादेश में हिंदुओं और भक्तों पर कथित जुल्म के बारे में सार्वजनिक रूप से बोलना और मीडिया को इंटरव्यू देना, चिन्मय कृष्ण प्रभु का समर्थन करना, पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को कानूनी नोटिस भेजना और कॉमेडियन सुरलीन कौर के खिलाफ साइबर शिकायत दर्ज करना शामिल था.
हालांकि, राधारमण दास ने यह दावा नहीं किया कि इस्कॉन को उनके विचारों के कंटेंट पर कोई आपत्ति थी. इसके बजाय, उन्होंने उन वजहों को दोहराया जो संगठन ने उन्हें बताई थीं.
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ISKCON ने क्यों लिए ऐसा फैसला?
यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल सरकार के उस ऐलान के कुछ वक्त बाद सामने आया है, जिसमें कहा गया था कि इस्कॉन कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के तहत आने वाले स्कूलों में मिड-डे मील तैयार करने और बांटने में मदद करेगा.
पिछले कुछ साल में राधारमण दास इस्कॉन के सबसे प्रमुख सार्वजनिक चेहरों में से एक बनकर उभरे थे. वे अक्सर संगठन की धार्मिक गतिविधियों से हटकर मुद्दों पर अपनी राय रखते थे, जिनमें बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ व्यवहार, सनातन धर्म और राजनीति से जुड़े अन्य विवादित मामले शामिल थे.
हालांकि, दास ने इस कार्रवाई को अपनी इन्हीं सार्वजनिक टिप्पणियों से जोड़ा है, लेकिन इस्कॉन का कहना है कि यह फैसला संगठन के नियमों के बार-बार उल्लंघन, बिना इजाजत सार्वजनिक रूप से दखल देने और ऐसे कामों की वजह से लिया गया, जो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर थे.
राधारमण दास ने कहा, "मुझे इतने साल तक जो प्यार और समर्थन मिला, उसके लिए मैं आभारी हूं और इस्कॉन की लगातार तरक्की और सफलता के लिए प्रार्थना करता हूं."
अनिर्बन सिन्हा रॉय