पश्चिम बंगाल: ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति का मामला कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचा, स्पीकर के फैसले पर 11 जून को होगी सुनवाई

पश्चिम बंगाल का सियासी ड्रामा अब कलकत्ता हाईकोर्ट तक पहुंच गया है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर जो विवाद उस पर 11 जून को सुनवाई होगी. स्पीकर द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किए जाने के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं.

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बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विवाद पहुंचा कलकत्ता हाईकोर्ट - बाएं तरफ ममता बनर्जी और दाएं तरफ ऋतब्रत बनर्जी (Photo: PTI) बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विवाद पहुंचा कलकत्ता हाईकोर्ट - बाएं तरफ ममता बनर्जी और दाएं तरफ ऋतब्रत बनर्जी (Photo: PTI)

इंद्रजीत कुंडू / तपस सेनगुप्ता

  • कोलकाता, पश्चिम बंगाल,
  • 08 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:59 PM IST

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को मिली हार के बाद पार्टी के अंदर की कलह अब खुलकर सामने आ गई है. कोलकाता से लेकर दिल्ली तक सोमवार को सियासी ड्रामा तेज हो गया है. इन सब के बीच बड़ी खबर है कि बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद की सुनवाई अब कलकत्ता हाईकोर्ट में होगी. 

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कलकत्ता हाईकोर्ट के सामने उस फैसले पर सवाल खड़े किए गए हैं जिसमें ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी गई थी. यह मामला जस्टिस कृष्णा राव की बेंच के सामने आया. अदालत ने इस याचिका को सुनवाई के लायक मानते हुए स्वीकार कर लिया और अगली तारीख 11 जून तय कर दी.

क्या है पूरा विवाद?

पश्चिम बंगाल की विधानसभा में एक अहम पद को लेकर कुछ दिन पहले विवाद खड़ा हो गया. यह पद है नेता प्रतिपक्ष का, यानी विधानसभा में जो पार्टी सत्ता में नहीं होती, उसकी तरफ से जो सबसे बड़ा नेता बोलता है, उसे नेता प्रतिपक्ष कहते हैं. यह पद बहुत जरूरी होता है क्योंकि यही नेता सरकार से सवाल पूछता है और विपक्ष की आवाज उठाता है.

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अब हुआ यह कि विधानसभा के स्पीकर रथिंद्र बोस ने इस पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी को मान्यता दे दी. लेकिन इसी पद पर एक और नेता सोवांदेब चट्टोपाध्याय भी दावा कर रहे थे. सोवांदेब को लगा कि स्पीकर का यह फैसला गलत है और उन्हें यह पद मिलना चाहिए था.

इसलिए सोवांदेब चट्टोपाध्याय ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी. उनकी तरफ से वकील शिर्षन्या बनर्जी ने अदालत को बताया कि स्पीकर ने सोवांदेब की जगह ऋतब्रत को यह जिम्मेदारी क्यों दी, यह सही नहीं है. उन्होंने अदालत से मांग की कि इस फैसले में दखल दिया जाए.

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