'ये नेता पूरी तरह बेकार, ममता बनर्जी के नाम पर टिके थे...' TMC में बगावत पर भड़कीं महुआ मोइत्रा

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 28 साल के इतिहास में पहली बार पार्टी दो हिस्सों में बंट गई है. महुआ मोइत्रा ने बागी नेताओं पर तीखा हमला करते हुए उन्हें पूरी तरह बेकार बताया और कहा कि ये नेता ममता बनर्जी के दम पर टिके थे. उन्होंने बीजेपी पर भी आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों के जरिए उनकी पार्टी को तोड़ा जा रहा है.

Advertisement
महुआ मोइत्रा ने बागी विधायकों को जमकर खरी-खोटी सुनाई. (Photo- ITG) महुआ मोइत्रा ने बागी विधायकों को जमकर खरी-खोटी सुनाई. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:13 AM IST

बंगाल में हार के बाद अब तृणमूल कांग्रेस बड़े आंतरिक संकट से गुजर रही है. पार्टी में हुई बड़ी बगावत के बाद टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी विधायकों पर बेहद तीखा हमला बोला है. मोइत्रा ने बगावत करने वाले नेताओं को 'पूरी तरह से बेकार' बताया है. 

मोइत्रा ने बागी नेताओं को लेकर कहा कि ये नेता अब तक सिर्फ ममता बनर्जी के दम पर टिके हुए थे. उनके मुताबिक अब इन नेताओं में विपक्ष की बेंच पर बैठकर बीजेपी से लड़ने की हिम्मत नहीं बची है.

Advertisement

'इंडिया टुडे' से एक खास बातचीत में महुआ मोइत्रा ने बीजेपी पर केंद्रीय एजेंसियों के दम पर पार्टी को तोड़ने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बागी विधायकों को गिरफ्तारी और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई की धमकी देकर पाला बदलने के लिए मजबूर किया गया है. 

'ये लोग पूरी तरह बेकार हैं'

महुआ मोइत्रा ने बागी टीएमसी नेताओं को लेकर कहा कि ये लोग सालों तक सत्ता में रहने के बाद अब विपक्ष में नहीं बैठना चाहते. ऐसे में ये नेता अपने लिए एक 'सुरक्षित' रास्ता चुन रहे हैं.

बागी नेताओं को सीधी चुनौती देते हुए मोइत्रा ने कहा, ये लोग पूरी तरह बेकार हैं. ये पार्टी में रहकर सिर्फ ममता दीदी के करिश्मे का फायदा उठाते रहे हैं. अगर जाना है, तो आज ही अपने दम पर बाहर चले जाइए. अपनी रीताब्रत कांग्रेस बनाइए और जो मन आए वो कीजिए, लेकिन खुद को तृणमूल कांग्रेस मत कहिए.

Advertisement

यह भी पढ़ें: करारी हार, फिर भी अभिषेक की वाहवाही चाहती थीं ममता, TMC में विद्रोह की पूरी कहानी!

28 साल के इतिहास में पहली बार दोफाड़ हुई टीएमसी

बता दें कि तृणमूल कांग्रेस के 28 साल के इतिहास में बुधवार को पहली बार ऐसा नजारा देखा गया जब पार्टी दो हिस्सों में बंटती नजर आई. टीएमसी के 58 बागी विधायकों ने विधानसभा में पार्टी के विधायी दल पर कब्जा कर लिया. इन विधायकों ने निष्कासित नेता रीताब्रत बनर्जी को अपना नया नेता चुन लिया, जिन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर से मान्यता भी मिल गई है.

खुद को विधानसभा में 'असली' तृणमूल कांग्रेस घोषित करने के बाद बागी गुट के नेता रीताब्रत बनर्जी ने थोड़ा नरम रुख अपनाने की कोशिश की. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी से नए विधायी दल के 'मुख्य सलाहकार' के रूप में काम करने की अपील की है.

इस मामले पर महुआ मोइत्रा ने बीजेपी को घेरते हुए कहा कि अब बीजेपी सिर्फ पार्टियां तोड़ने से ही संतुष्ट नहीं है. वो अब उन राज्यों में विपक्ष का नेता भी खुद तय करना चाहती है, जहां उसने चुनाव जीते हैं. पूरा देश इस खेल को देख रहा है.

*शुभेंदु अधिकारी पर लगाया 'ऑपरेशन' का आरोप

Advertisement

महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि विधायकों को तोड़ने का ये पूरा ऑपरेशन बीजेपी की तरफ से प्लान किया गया था. उन्होंने मौजूदा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर आरोप लगाते हुए कहा, 'शुभेंदु अधिकारी जानते हैं कि किस विधायक की क्या कमजोरी है. उन्होंने हर विधायक पर वन-टू-वन ऑपरेशन किया है. जैसे मोताबाड़ी की विधायक सबीना यास्मिन से कहा गया कि मोताबाड़ी हिंसा के मामले में एनआईए उन्हें पकड़ लेगी.'

मोइत्रा ने आगे कहा, 'जावेद खान जैसे दो लोगों से कहा गया कि उनके इलाके में हुए अवैध निर्माण के लिए उन्हें और उनके बेटे को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. यानी हर व्यक्ति की कोई न कोई दुखती रग दबाई गई है.'

'15 साल सत्ता का सुख भोगा, अब संघर्ष से डर रहे'

दलबदल करने वाले नेताओं को लेकर मोइत्रा ने कहा कि इनमें से कई नेताओं को 15 साल तक सत्ता में रहने की आदत हो चुकी है. अब वो एक विपक्षी दल के रूप में काम करने की क्षमता खो चुके हैं. वो बीजेपी, पुलिस, ईडी या सीबीआई का सामना नहीं करना चाहते, वो बस सुरक्षित रहना चाहते हैं.

हालांकि, मोइत्रा ने इस बात से साफ इनकार किया कि पार्टी अंदर से टूट रही है. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी और पार्टी का कोर ग्रुप ही असली तृणमूल है और वो सब मिलकर नए सिरे से शुरुआत करेंगे. उन्होंने चुनाव आयोग की ओर से बागी गुट को मान्यता मिलने की संभावनाओं को भी खारिज कर दिया. 

Advertisement

मोइत्रा ने कहा कि जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस छोड़ी थी, तब उन्होंने खुद कागज-पेन उठाकर पार्टी का चुनाव चिह्न बनाया था. जो नेता खुद अपना सिंबल बनाकर लड़ सकती है और तीन बार मुख्यमंत्री बन सकती है, वो दोबारा नया सिंबल बनाकर लड़ लेगी. वो बागी कोई भी सिंबल या तस्वीर ले लें, वो कभी तृणमूल कांग्रेस नहीं बन पाएंगे.

अभिषेक बनर्जी का किया बचाव

बागी विधायकों का दावा है कि उनका ये विद्रोह ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं, बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ है. इस पर मोइत्रा ने सवाल उठाया कि अगर ऐसा था, तो इन विधायकों ने कुछ ही हफ्ते पहले टीएमसी के टिकट पर चुनाव क्यों लड़ा था? 

यह भी पढ़ें: ममता बनर्जी के कुनबे में मचे गृहयुद्ध में आगे क्या होने वाला है, TMC के कद्दावर नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने बताई अंदर की बात

केंद्रीय एजेंसियों के बढ़ते शिकंजे के बीच अभिषेक बनर्जी का बचाव करते हुए मोइत्रा ने कहा कि अभिषेक एक मजबूत नेता हैं और वो इसका सामना करेंगे. उनका डीएनए समझौते करने का नहीं है, चाहे उन्हें जेल ही क्यों न जाना पड़े.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »