प्रेमानंद महाराज को हंसाने वाले जॉनी-जोजो 30 घंटे बाद मिले... चेहरे पर लौटी मुस्कान, ई-रिक्शा में रह गया था बैग

मथुरा-वृंदावन में प्रेमानंद जी महाराज को हंसाने वाले पपेट्स 'जोजो' और 'जॉनी' करीब 30 घंटे बाद मिल गए. इसके बाद जयपुर के कलाकार राहुल मिश्रा के चेहरे पर मुस्कान लौट आई. दरअसल, राहुल यहां एक गेस्ट हाउस पहुंचे थे. इसी दौरान सामान उतारने और रूम देखने के दौरान उनका बैग ई-रिक्शा में रह गया था. रिक्शा वाला मौके से फरार हो गया था. उसी बैग में जोजो और जॉनी थे.

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कलाकार राहुल मिश्रा का बैग लेकर फरार हो गया था ई-रिक्शा चालक. (Photo: Screengrab) कलाकार राहुल मिश्रा का बैग लेकर फरार हो गया था ई-रिक्शा चालक. (Photo: Screengrab)

मदन गोपाल शर्मा

  • मथुरा,
  • 07 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:17 PM IST

मथुरा-वृंदावन की पवित्र गलियों में एक दिलचस्प घटना ने 30 घंटे तक एक कलाकार को परेशान कर दिया. जयपुर के कलाकार राहुल मिश्रा के दो खास पपेट्स- जोजो और जॉनी गुम हो गए थे. ये वही मुखौटे हैं, जिनके जरिए उन्होंने वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज के सामने अपनी कला का प्रदर्शन कर लोगों को हंसी और मनोरंजन दिया था.

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घटना गुरुवार रात की है, जब राहुल मिश्रा अपने साथियों के साथ वृंदावन परिक्रमा के लिए पहुंचे थे. प्रेम मंदिर के पास एक गेस्ट हाउस में कमरा बुक करने के दौरान वे अपना बैग ई-रिक्शा में ही भूल गए. कुछ ही देर बाद जब वे बाहर आए तो ई-रिक्शा चालक वहां से गायब था और बैग भी साथ ले गया था. बैग में राहुल मिश्रा के दो खास पपेट्स (मुखौटे)- जोजो और जॉनी थे... ये सिर्फ मास्क नहीं थे, बल्कि उनकी परफॉर्मेंस की जान थे.

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जब राहुल गेस्ट हाउस से बाहर आए, तो ई-रिक्शा वहां नहीं था. न बैग था, न चालक. पहले तो लगा कि शायद आस-पास ही होगा, लेकिन धीरे-धीरे ये तलाश चिंता में बदल गई. रात बीती, सुबह हुई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. अब मामला सिर्फ बैग का नहीं था, बल्कि उसमें रखे उन खास पपेट्स का था, जिनके बिना कलाकार की पहचान अधूरी थी.

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राहुल ने अपने साथियों के साथ मिलकर तलाश शुरू की, लेकिन घंटों बीतते चले गए. आखिरकार मामला पुलिस तक पहुंचा और कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई. उम्मीद थी कि शायद अब कोई सुराग मिलेगा, लेकिन कहानी में असली मोड़ अभी बाकी था. इसके बाद राहुल ने खुद ही कमान संभाल ली.

गेस्ट हाउस के मैनेजर की सलाह पर उन्होंने दो बाइक लीं और अपने साथियों के साथ अलग-अलग रास्तों पर ई-रिक्शा की तलाश शुरू कर दी. वृंदावन की गलियों में रात के अंधेरे में एक छोटी सी उम्मीद के साथ खोज जारी रही. रात करीब 12 बजे एक साथी को ई-रिक्शा प्रेम मंदिर के पास से गुजरता हुआ दिखाई दिया.

सूचना मिली, पीछा शुरू हुआ. कुछ देर बाद ई-रिक्शा बांके बिहारी मंदिर के पास रुका. यहीं पर राहुल ने चालक को पहचान लिया. जब बैग के बारे में पूछा गया, तो जवाब मिला- घर पर रखा है. अब पूरा ग्रुप उसके घर पहुंचा. और वहां जो मिला, उसने 30 घंटे की टेंशन को खत्म कर दिया. कमरे में बैग था... और उसी बैग में सुरक्षित थे वो दोनों मुखौटे- जोजो और जॉनी. उस पल राहुल मिश्रा के चेहरे पर जो राहत आई, वो किसी भी परफॉर्मेंस से बड़ी थी.

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ई-रिक्शा चालक ने अपनी गलती मानी और माफी मांगी. मामला यहीं खत्म हो सकता था, इसलिए राहुल ने किसी कानूनी कार्रवाई से इनकार कर दिया. पुलिस को भी जानकारी दी गई, लेकिन कहानी का फोकस अब गुस्सा नहीं, बल्कि राहत था. राहुल ने अपने साथियों का धन्यवाद किया, जिन्होंने रात-दिन मेहनत करके इस पूरे मामले को एक सफल अंत तक पहुंचाया.

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