आंखों देखी: धुंआ, चीखें और भगदड़... लखनऊ अग्निकांड ने लील लीं 15 जिंदगियां

लखनऊ अग्निकांड में कई नौजवानों की जान चली गई. इस दर्दनाक घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. सोमवार को लगी भीषण आग ने देखते ही देखते 15 लोगों की जिंदगी छीन ली. वहीं, आग की भयावह लपटों से घबराकर एक शख्स ने पहली मंजिल की खिड़की खोली और अपनी जान बचाने के लिए नीचे छलांग लगा दी.

Advertisement
इमारत के ग्राउंड फ्लोर, फर्स्ट फ्लोर और सेकंड फ्लोर से आग की ऊंची-ऊंची लपटें बाहर निकल रही थीं.(Photo: ITG) इमारत के ग्राउंड फ्लोर, फर्स्ट फ्लोर और सेकंड फ्लोर से आग की ऊंची-ऊंची लपटें बाहर निकल रही थीं.(Photo: ITG)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 22 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:53 PM IST

सोमवार का दिन था, तारीख 22 जून. सड़कों पर रोजाना की तरह गाड़ियों की रफ्तार और लोगों की चहल-पहल जारी थी. रूटीन खबरों के बीच अचानक दोपहर को एक फोन बजता है. दूसरी तरफ से आवाज आती है, अलीगंज थाना क्षेत्र के पुरनिया चौराहे के पास एक बिल्डिंग में भीषण आग लग गई है. शुरुआत में लगा कि शायद कोई छोटी-मोटी आग होगी या शॉर्ट सर्किट का मामला होगा. लेकिन जैसे ही खबर मिली कि इमारत तीन मंजिला है, दिल धक से रह गया. 

Advertisement

बिना वक्त गंवाए मैं ग्राउंड जीरो के लिए निकला, जो मेरे स्थान से करीब 25 मिनट की दूरी पर था. रास्ते में था, तभी सोशल मीडिया पर एक वीडियो तैरने लगा, कुछ लोग खिड़की से पाइप के सहारे नीचे उतरने की कोशिश कर रहे थे. यह वीडियो देखते ही समझ आ गया कि यह कोई मामूली आग नहीं, बल्कि एक खौफनाक अग्निकांड में तब्दील हो चुकी है.

तभी खबर मिली कि राजधानी लखनऊ के जिलाधिकारी, कमिश्नर और ज्वाइंट सीपी खुद मौके पर पहुंच रहे हैं. मैं भी महज 7 मिनट की दूरी पर था. जैसे ही पुरनिया चौराहे के मोड़ पर पहुंचा, सामने 6 दमकल की गाड़ियां खड़ी थीं. सायरन की आवाजें और चारों तरफ मची अफरा-तफरी गवाही दे रही थी कि अंदर का मंजर बेहद खौफनाक है.

यह भी पढ़ें: ना इमरजेंसी एग्जिट, ना कोई रास्ता... लखनऊ अग्निकांड में घोर लापरवाही आई सामने

Advertisement

बहुमंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर, फर्स्ट फ्लोर और सेकंड फ्लोर से आग की ऊंची-ऊंची लपटें बाहर निकल रही थीं. इस भयंकर आग और काले धुएं के गुबार के बीच से रूह कंपा देने वाली चीखें सुनाई दे रही थीं. 

वो आवाजें साफ तौर पर वहां फंसे लोगो की थीं. चीखों की तीव्रता से अंदाजा हो गया था कि अंदर कम से कम 20 से 22 लोग फंसे हुए हैं. तभी मेरी आंखों के सामने एक दिल दहला देने वाला नजारा दिखा. आग की लपटों से घबराकर एक शख्स ने पहली मंजिल की खिड़की खोली और सीधे नीचे छलांग लगा दी. यह मंजर देखकर वहां मौजूद भीड़ के रोंगटे खड़े हो गए. पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने तुरंत उसे उठाया और गंभीर हालत में नजदीकी अस्पताल भिजवाया.

इस इमारत की सबसे बड़ी खामी यह थी कि इसमें आने और जाने का एक ही रास्ता (एंट्री-एग्जिट) था और उसी मुख्य रास्ते पर आग का तांडव सबसे ज्यादा था. अंदर फंसे नौजवान लगातार मदद की गुहार लगा रहे थे. इसी बीच हाइड्रोलिक फायर टेंडर (अग्निशमन वाहन) मौके पर पहुंचा. 

दमकलकर्मियों ने पहले सेकंड और थर्ड फ्लोर की आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन जब कामयाबी नहीं मिली, तो आला अधिकारियों ने तुरंत बगल के घर का दरवाजा खटखटाया और सीधे ऊपर पहुंच गए.

यह भी पढ़ें: ग्रिल पकड़ लटका, फिर जमीन पर आकर गिरा शख्स, लखनऊ आग का खौफनाक वीडियो

Advertisement

प्रशासन ने फैसला लिया कि बगल के घर की दीवार को तोड़कर इस जलती हुई इमारत के अंदर दाखिल हुआ जाएगा. अंदर से आ रही चीखें इतनी खौफनाक थीं कि क्या पुलिस, क्या प्रशासन और क्या आम जनता... सबकी रूह कांप उठी थी. अंदर कितने लोग जिंदा बचे हैं, इसका अंदाजा किसी को नहीं था. यह रेस्क्यू ऑपरेशन करीब दो से तीन घंटे तक चला.

हालात बेकाबू होते देख मौके पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक भी पहुंच गए. लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की टीम, नगर निगम की टीम और ड्रिलिंग मशीनें मंगवाई गईं. पुलिस और रेस्क्यू टीम ने सूझबूझ से पहले दीवार को तोड़ा, लेकिन अंदर इतना घना और जहरीला धुआं भरा था कि पैर रखना भी भारी पड़ रहा था. इसके बाद हथौड़े और ड्रिलिंग मशीन से दीवार पर दूसरा बड़ा छेद किया गया. छेद होते ही धुएं का एक भयंकर गुबार बाहर निकला.

इसी बीच डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने फोन पर किसी उच्च अधिकारी से बात की और उनके शब्द थे, जितनी भी एंबुलेंस हैं, सारी की सारी इस समय अलीगंज भेज दो. 

यह सुनते ही वहां खड़े हर किसी का कलेजा कांप गया. साफ हो चुका था कि अंदर बड़ा हादसा हो चुका है. एंबुलेंस के पहुंचते ही ऊपर की तरफ 6 स्ट्रेचर मांगे गए. कुछ ही देर में जब पहली डेड बॉडी सामने आई, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं. 2 घंटे से मौके पर डटे डिप्टी सीएम बृजेश पाठक, एलडीए की टीम और पुलिस अधिकारी स्तब्ध थे.

Advertisement

अभी एक बॉडी नीचे आई ही थी कि उसके बाद लगातार तीन और शव नीचे लाए गए. तभी ऊपर से एक रेस्क्यू कर्मी चिल्लाया इतने स्ट्रेचर से कुछ नहीं होगा, और स्ट्रेचर ऊपर भेजो. यह सुनते ही वहां सन्नाटा पसर गया. देखते ही देखते लाशों की गिनती शुरू हुई जो खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी. 

पहली बॉडी, दूसरी बॉडी, तीसरी... और देखते ही देखते 15 नौजवानों की डेड बॉडीज बाहर निकाली गईं. वहां मौजूद हर पत्रकार, पुलिसकर्मी और आला अधिकारी बस बेबसी से उन शवों को गिन रहा था. 15 मासूम नौजवानों ने इस अग्निकांड में अपनी जान गंवा दी थी.

इस महात्रासदी की खबर मिलते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सारे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम और दौरा रद्द कर दिया और सीधे लखनऊ के लिए रवाना हुए. करीब 2 घंटे के भीतर सीएम योगी आदित्यनाथ सीधे अलीगंज के घटना स्थल पर पहुंचे. उनके साथ डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री को पूरे घटनाक्रम और रेस्क्यू ऑपरेशन का ब्यौरा दिया. मुख्यमंत्री उस प्रभावित इमारत के अंदर भी गए जहां से 15 नौजवानों के शव निकाले गए थे.

मुख्यमंत्री ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा मेरी हृदय से इच्छा थी कि आज मैं अलीगढ़ के कार्यक्रम में रहूं, लेकिन मुझे अत्यंत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि लखनऊ में एक भीषण अग्निकांड की दुखद घटना हुई है.

Advertisement

इसकी चपेट में कुछ बच्चे आए हैं और उनकी असामयिक मौत हुई है. इसलिए मुझे तत्काल वापस लखनऊ आना पड़ा. जिन्होंने अपनी जान गंवाई है, उनके परिजनों के प्रति मैं अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. इस पूरे मामले की जांच के लिए पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव (गृह) को मौके पर जाकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. दोषियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा, मामले की तह तक जाकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

अलीगंज का यह इलाका आज चीखों और अपनों को खोने के गम में डूबा हुआ है. इस दर्दनाक हादसे ने पूरी राजधानी को हिलाकर रख दिया है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »