150 साइबर ठग पकड़े गए, फिर 9 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज, पैसे लेकर छोड़ने का आरोप

लखनऊ के समिट बिल्डिंग से अमेरिका में साइबर ठगी के मामले में करीब 150 लोगों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस विभाग ने अपने ही 9 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है. साइबर क्राइम पुलिस के 3 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड और 6 को लाइन हाजिर किया है. आरोप है कि कार्रवाई के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने पैसे लेकर कुछ आरोपियों को छोड़ दिया था.

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साइबर ठगी के मामले में  50 लोग गिरफ्तार. (Photo: Representational) साइबर ठगी के मामले में 50 लोग गिरफ्तार. (Photo: Representational)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ ,
  • 11 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:14 PM IST

अमेरिका में साइबर ठगी के मामले में कार्रवाई के दौरान पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने के बाद विभाग ने अपने ही पुलिसकर्मियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. लखनऊ के समिट बिल्डिंग से साइबर फ्रॉड के मामले में करीब 150 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. अब इस मामले की जांच के बाद साइबर क्राइम पुलिस से जुड़े कुल 9 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है. पुलिस विभाग की तरफ से की गई कार्रवाई में साइबर क्राइम पुलिस के 3 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है. वहीं 6 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है. यह कार्रवाई साइबर फ्रॉड मामले में पुलिस की कार्रवाई के दौरान सामने आए आरोपों की जांच के बाद की गई है.

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आरोप है कि समिट बिल्डिंग में साइबर फ्रॉड के खिलाफ कार्रवाई के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने पैसे लेकर कुछ आरोपियों को छोड़ दिया था. मामले की जांच शुरू होने के बाद पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी पड़ताल की गई. जांच के बाद कुल 9 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है. समिट बिल्डिंग से अमेरिका में साइबर ठगी के मामले में करीब 150 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी. इस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को पकड़ा गया था. इसके बाद कुछ पुलिसकर्मियों पर आरोप लगे कि उन्होंने पैसे लेकर कुछ आरोपियों को कार्रवाई से बचा लिया. इन आरोपों की जांच के बाद अब पुलिस विभाग ने अपने ही कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है.

150 गिरफ्तारियों के बाद पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई

साइबर क्राइम के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच पुलिसकर्मियों पर हुई इस कार्रवाई से पुलिस की भूमिका और उसकी निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. यह सवाल भी उठ रहा है कि साइबर फ्रॉड के खिलाफ अभियान के दौरान पुलिसकर्मियों की निगरानी कितनी प्रभावी थी. इसी बीच राजनीतिक बयान भी सामने आया है. बयान में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा गया कि आज ये लोग प्रोपेगेंडा कर रहे हैं, लेकिन उनसे पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने पहले क्या किया था.

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बयान में कहा गया कि पहले बीमारी से मौतें होती थीं और गरीब का बच्चा मरता था, लेकिन उस समय विपक्षी दल मौन रहते थे. आरोप लगाया गया कि उस समय गरीबों के साथ खड़े होने वाला कोई नहीं था. बयान में गोरखपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था का भी जिक्र किया गया. कहा गया कि आज गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्वस्थ है और एम्स भी बन गया है. इसके साथ ही गोरखपुर के साथ कुशीनगर, महराजगंज, देवरिया, सिद्धार्थनगर और बहराइच में भी मेडिकल कॉलेज बनाए गए हैं.

पुलिस पर आरोपियों को छोड़ने का आरोप

बयान में कहा गया कि मेडिकल कॉलेजों की एक लंबी श्रृंखला खड़ी हो गई है. इसके लिए सरकार की इच्छाशक्ति और साफ नीयत को जरूरी बताया गया. कहा गया कि जब नीति बन जाती है तो निर्माण भी हो जाता है और इसी का परिणाम है कि यहां मेडिकल कॉलेज बन गया है. इस पूरे मामले में एक तरफ साइबर फ्रॉड के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और करीब 150 गिरफ्तारियों का मामला है, वहीं दूसरी तरफ उसी कार्रवाई से जुड़े 9 पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई ने पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 3 पुलिसकर्मियों के सस्पेंड और 6 के लाइन हाजिर होने के बाद अब यह कार्रवाई पुलिस विभाग के भीतर जवाबदेही के तौर पर भी देखी जा रही है.
 

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