पहली उड़ान जमीन देने वालों के नाम... जेवर एयरपोर्ट से कल लखनऊ जाएंगे 172 किसान

15 जून को जेवर एयरपोर्ट से पहली उड़ान लखनऊ के लिए रवाना होगी, जिसमें 172 किसान सफर करेंगे. एयरपोर्ट निर्माण के लिए इन्हीं किसानों ने अपनी जमीन दी थी.

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172 किसानों ने एयरपोर्ट के लिए दी है अपनी जमीन. (Photo: ITG) 172 किसानों ने एयरपोर्ट के लिए दी है अपनी जमीन. (Photo: ITG)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 14 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:00 PM IST

नोएडा के जेवर क्षेत्र में बने जेवर एयरपोर्ट से 15 जून को पहली व्यावसायिक उड़ान का संचालन किया जाएगा. यह उड़ान परियोजना के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के नए युग की शुरुआत होगी. पहली उड़ान में कुल 172 किसान सफर करेंगे, जो इस परियोजना से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े रहे हैं. साथ ही इन्हीं किसानों ने अपनी जमीन भी दी थी.

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लखनऊ पहुंचकर CM योगी से करेंगे मुलाकात
जानकारी के मुताबिक कल की पहली विशेष उड़ान लखनऊ के लिए संचालित की जाएगी. इस दौरान किसानों के साथ जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह भी मौजूद रहेंगे. सभी यात्री लखनऊ पहुंचकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे और जेवर एयरपोर्ट परियोजना के लिए अपनी भूमि देने के बदले उन्हें औपचारिक रूप से धन्यवाद ज्ञापित करेंगे.

जेवर एयरपोर्ट परियोजना के लिए स्थानीय किसानों ने अपनी हजारों एकड़ भूमि का योगदान दिया था, जिसके कारण यह विशाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परियोजना आकार ले सकी. सरकार और प्रशासन का मानना है कि बिना किसानों के सहयोग के यह परियोजना संभव नहीं थी. इसी योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से यह विशेष उड़ान आयोजित की जा रही है.

आयोजन को सफल बनाने में जुटा प्रशासन 
इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है. किसानों का कहना है कि उनकी भूमि देश और राज्य के विकास में उपयोग हो रही है, यह उनके लिए गर्व की बात है. वहीं प्रशासन ने भी इस आयोजन को सफल बनाने के लिए विशेष तैयारियां की हैं.

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जेवर एयरपोर्ट से पहली उड़ान का संचालन न केवल विमानन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह किसानों और विकास परियोजनाओं के बीच साझेदारी का प्रतीक भी है. दावा किया जा रहा है कि जब यह एयरपोर्ट पूरी तरह से चालू हो जाएगा, तो यह उत्तर भारत के सबसे बड़े विमानन केंद्रों में से एक होगा और इससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी. 15 जून की यह उड़ान इसी दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत के रूप में देखी जा रही है. 
 

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