कोबरा ने काटा, फिर भी दूसरों को बचाने के लिए बुजुर्ग ने बोरे में डाला सांप, अस्पताल में मौत

उत्तर प्रदेश के गोंडा में इंसानियत और साहस की मिसाल पेश करने वाले एक बुजुर्ग सपेरे की दर्दनाक मौत हो गई. जहरीले कोबरा के डसने के बावजूद उन्होंने पहले सांप को पकड़कर सुरक्षित बोरे में बंद किया, ताकि किसी और की जान खतरे में न पड़े. अस्पताल पहुंचने के बाद इलाज चला, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.  

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कोबरा ने काटा, फिर भी दूसरों को बचाने के लिए पकड़ा सांप (Photo: itg) कोबरा ने काटा, फिर भी दूसरों को बचाने के लिए पकड़ा सांप (Photo: itg)

अंचल श्रीवास्तव

  • गोंडा,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:54 AM IST

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक अनुभवी सपेरे की बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा की कहानी दर्दनाक अंत के साथ सामने आई है. जिले के धानेपुर थाना क्षेत्र के शीर बनकट गांव निवासी 65 साल के रामलखन की जहरीले कोबरा के काटने से इलाज के दौरान मौत हो गई. खास बात यह रही कि खुद गंभीर हालत में होने के बावजूद उन्होंने पहले कोबरा को पकड़कर सुरक्षित बोरे में बंद किया, ताकि वह किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान न पहुंचा सके.

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जानकारी के अनुसार, रामलखन का परिवार पीढ़ियों से सांप पकड़ने का काम करता रहा है. खुद रामलखन को जहरीले सांपों को पकड़ने का करीब 40 से 45 वर्षों का अनुभव था. इलाके में कहीं भी सांप निकलने की सूचना मिलती थी तो लोग उन्हें ही बुलाते थे. इसी काम से उनका परिवार अपना जीवनयापन करता था.

रविवार को धानेपुर बाजार स्थित एक घर में कोबरा सांप निकलने की सूचना मिलने पर रामलखन मौके पर पहुंचे. जब वह सांप को पकड़ने का प्रयास कर रहे थे, तभी कोबरा ने उन्हें डस लिया. सांप के जहर का असर उनके शरीर में तेजी से फैलने लगा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. अपनी जान की परवाह किए बिना उन्होंने किसी तरह कोबरा को काबू में किया और उसे बोरे में बंद कर दिया.

इसके बाद परिजन उन्हें उसी बोरे के साथ जिला अस्पताल लेकर पहुंचे. बताया जाता है कि जब डॉक्टरों को पता चला कि मरीज अपने साथ जिंदा कोबरा भी लेकर आया है तो सभी हैरान रह गए. हालांकि डॉक्टरों ने बिना देर किए उन्हें भर्ती किया और एंटी स्नेक वेनम समेत आवश्यक उपचार शुरू किया.

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गोंडा मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल तिवारी ने बताया कि रामलखन गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचे थे. उन्हें तत्काल एंटी स्नेक वेनम और अन्य जरूरी आपातकालीन दवाएं दी गईं, लेकिन तब तक उनके शरीर में जहर काफी फैल चुका था. उपचार के दौरान उन्हें बचाया नहीं जा सका.

रामलखन की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है. स्थानीय लोग उन्हें एक अनुभवी और निडर सपेरा बताते हैं, जिन्होंने अंतिम समय तक दूसरों की सुरक्षा को अपनी जान से ऊपर रखा.  

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