नकली टैबलेट, फर्जी GST नंबर और लाइसेंस... गाजियाबाद में फेक Liv-52 फैक्ट्री का भंडाफोड़, 5 आरोपी गिरफ्तार

गाजियाबाद के मुरादनगर में पुलिस और स्वॉट टीम ने नकली Liv-52 दवाइयों की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है. कार्रवाई में 50 हजार नकली टैबलेट, पैकिंग सामग्री और एक कार बरामद की गई. इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो फर्जी लाइसेंस और दस्तावेजों के सहारे दवाइयां बेचकर जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे थे.

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लिवर की दवा में ज़हर!(Photo: Mayank Gaur/ITG) लिवर की दवा में ज़हर!(Photo: Mayank Gaur/ITG)

मयंक गौड़

  • गाजियाबाद,
  • 08 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:52 PM IST

गाजियाबाद के मुरादनगर थाना क्षेत्र में नकली दवाइयों के अवैध कारोबार का बड़ा मामला सामने आया है. स्वॉट टीम ग्रामीण जोन और मुरादनगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में Liv-52 नाम की दवा की भारी मात्रा में नकली टैबलेट बरामद की गई हैं. यह दवा लिवर से जुड़ी बीमारियों में इस्तेमाल की जाती है, ऐसे में इस फर्जीवाड़े ने जनस्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डाल दिया था.

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पुलिस ने इस मामले में कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो लंबे समय से नकली Liv-52 टैबलेट बनाकर बाजार में सप्लाई कर रहे थे. बरामदगी और गिरफ्तारियों के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है.

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कंपनी की शिकायत पर दर्ज हुआ मुकदमा

डीसीपी ग्रामीण जोन सुरेंद्र नाथ तिवारी के मुताबिक, एक नामी दवा कंपनी ने थाना मुरादनगर में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में बताया गया था कि कुछ लोग Liv-52 दवा की नकली टैबलेट बनाकर फर्जी दस्तावेजों, नकली जीएसटी नंबर और जाली औषधि लाइसेंस के सहारे बाजार में बेच रहे हैं.

कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि नकली दवाइयां ट्रांसपोर्ट के जरिए अलग-अलग शहरों में भेजी जा रही हैं, जिससे आम लोगों की सेहत को बड़ा नुकसान हो सकता है. शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर पुलिस टीमों का गठन किया गया.

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संयुक्त कार्रवाई में पांच आरोपी गिरफ्तार

लगातार जांच और मुखबिर की सूचना पर स्वॉट टीम ग्रामीण जोन और मुरादनगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की. इस दौरान अभियोग में वांछित पांच आरोपियों मयंक अग्रवाल, अनुप गर्ग, तुषार ठाकुर, आकाश ठाकुर और नितिन त्यागी को गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी.

गिरफ्तारी के समय पुलिस ने 50 हजार नकली Liv-52 टैबलेट, 500 रेपर शीट, 1200 हरे रंग के ढक्कन, 1200 सफेद प्लास्टिक की डिब्बियां और एक कार बरामद की. बरामद सामान से साफ है कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था.

कम लागत में बनती थी नकली दवा

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नकली टैबलेट बेहद कम लागत में तैयार की जाती थीं. एक डिब्बी टैबलेट बनाने में करीब 35 से 40 रुपये का खर्च आता था, जिसे बाजार में करीब 100 रुपये में बेचा जाता था. असली दवा की कीमत इससे कहीं ज्यादा होती है, जिससे आरोपी मोटा मुनाफा कमा रहे थे.

आरोपियों ने बताया कि डिब्बी, ढक्कन और रेपर अलग-अलग जगहों से तैयार कराए जाते थे, जबकि टैबलेट बाहर की लैब से बनवाकर एक जगह इकट्ठा की जाती थीं.

जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर अपराध

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार Liv-52 जैसी दवा लिवर की सुरक्षा, पाचन सुधार, फैटी लिवर, शराब से होने वाले नुकसान और भूख न लगने जैसी समस्याओं में इस्तेमाल होती है. ऐसी स्थिति में अगर मरीजों को नकली दवा मिलती, तो बीमारी ठीक होने के बजाय लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता था.

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पुलिस ने गिरफ्तार पांचों आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है. साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य छह फरार आरोपियों की तलाश के लिए टीमें लगाई गई हैं. पुलिस का कहना है कि नकली दवाइयों के इस गोरखधंधे को पूरी तरह खत्म करने के लिए आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.

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