वाराणसी में केंद्रीय जल आयोग के बुलेटिन के अनुसार गंगा नदी का जलस्तर 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लगातार बढ़ रहा है. मौजूदा समय में जलस्तर 62.4 मीटर दर्ज किया गया है, जो चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से 7.86 मीटर और खतरे के निशान 71.26 मीटर से 8.86 मीटर नीचे है. इस बढ़ते जलस्तर के कारण पक्के घाटों की सीढ़ियां और किनारे स्थित छोटे-बड़े मंदिर बाढ़ के पानी में डूबने लगे हैं. मणिकर्णिका तीर्थ पर स्थित 9 डिग्री एंगल पर झुका प्रसिद्ध रत्नेश्वर महादेव मंदिर भी जलमग्न हो गया है. स्थिति को देखते हुए पतवार वाली नावों पर प्रतिबंध और मोटरबोट पर सुरक्षा उपकरणों के साथ लिमिटेड सवारी की अनुमति दी गई है.
पक्के घाटों का संपर्क टूटा, कई मंदिर जलमग्न
गंगा के बढ़ते जलस्तर ने घाटों के किनारे जनजीवन और धार्मिक गतिविधियों को प्रभावित किया है. पक्के घाटों की सीढ़ियां पानी में पूरी तरह समा चुकी हैं. स्थानीय पुरोहित मुकेश दुबे और नाविक बाबू साहनी के मुताबिक गंगा में जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ना शुरू हो गया है, जिससे घाटों के बीच का आपसी संपर्क कट गया है.
9 डिग्री झुका रत्नेश्वर महादेव मंदिर बना आकर्षण
मणिकर्णिका तीर्थ पर स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर बाढ़ के पानी में पूरी तरह समा चुका है. 9 डिग्री के कोण पर झुका यह मंदिर अपनी अनूठी बनावट के कारण पीसा की मीनार से तुलना के लिए जाना जाता है और लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहता है. वर्ष के अधिकांश महीनों में यह मंदिर पानी की चपेट में ही रहता है.
नाव संचालन पर सख्ती और सुरक्षा नियम लागू
तेज हवा और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. गंगा में पतवार से चलने वाली नावों के संचालन पर रोक लगा दी गई है. वहीं, मोटरबोट चालकों को क्षमता से कम सवारी बैठाने और पूरे सुरक्षा उपकरणों (लाइफ जैकेट आदि) का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं.
रोशन जायसवाल