उत्तर प्रदेश: फांसी की सजा के बाद टूटा विराज, रातभर नहीं सोया, मासूम को पटककर मार डाला था

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के शिकोहाबाद स्थित यादव कॉलोनी में एक बच्चे की हत्या का मामला सामने आया था. इस मामले में अदालत ने एक आरोपी को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है. आरोप लगाया गया था कि जितेंद्र पाठक ने डेढ़ साल के मासूम आरव को सड़क पर पटककर उसकी हत्या कर दी थी.

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नियमों के अनुसार विराज को अब अपनी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने का अधिकार है. (Photo: Screengrab) नियमों के अनुसार विराज को अब अपनी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने का अधिकार है. (Photo: Screengrab)

सुधीर शर्मा

  • फिरोजाबाद,
  • 11 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:58 PM IST

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में मासूम की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद जिला कारागार में बंद विराज उर्फ जितेंद्र पाठक पूरी रात बेचैन रहा. जेल सूत्रों के अनुसार उसने रातभर नींद नहीं ली, बैरक में बंद अन्य बंदियों से भी कोई बातचीत नहीं की और भोजन भी नहीं किया. शनिवार को भी वह गुमसुम रहा. सजा सुनाए जाने के बाद उससे मिलने उसके परिवार का कोई सदस्य जिला कारागार नहीं पहुंचा.

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बता दें, आरोप है कि 30 मई को बदायूं निवासी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने डेढ़ साल के मासूम आरव को सड़क पर पटककर उसकी हत्या कर दी. इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया. जिला जज ने आरोपी को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई. 

नियमों के अनुसार विराज को अब अपनी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने का अधिकार है. वह स्वयं अथवा जेल प्रशासन के माध्यम से 30 दिन के भीतर अपील दाखिल कर सकता है. अगर हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिलती है तो वह सुप्रीम कोर्ट और उसके बाद राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर कर सकेगा. जब तक सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उसे सामान्य बंदियों की तरह जिला कारागार में ही रखा जाएगा.

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विराज को लेकर दूसरी जेल, विशेषकर सेंट्रल जेल में शिफ्ट किए जाने और जल्द फांसी दिए जाने की चर्चाएं भी चल रही हैं, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं होगा. जेल प्रशासन के अनुसार अभी ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है.

दरअसल, विराज के खिलाफ दो अन्य मुकदमे भी विचाराधीन हैं, जिनकी सुनवाई फिरोजाबाद की अदालत में होनी है. पहला मुकदमा अपराध संख्या 404/2026 में बीएनएस की धारा 109 के तहत पुलिस मुठभेड़ के दौरान हत्या के प्रयास से जुड़ा है. दूसरा मामला आर्म्स एक्ट के तहत अवैध हथियार बरामदगी का है. इन मामलों में जारी वारंट के आधार पर उसकी पेशी जिला न्यायालय में होगी. ऐसे में फिलहाल उसे फिरोजाबाद जिला कारागार से दूसरी जेल में स्थानांतरित किए जाने की संभावना नहीं है.

शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि सभी मामलों में प्रभावी पैरवी की जाएगी. उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष का प्रयास रहेगा कि किसी भी स्तर पर आरोपी को राहत न मिल सके.

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