उत्तर प्रदेश में अवैध कोडीन सिरप नेटवर्क के खिलाफ पुलिस और एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है. लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दर्ज मुकदमे के तहत, इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल (1 लाख रुपये का इनामी) के साथ उसके दो मुख्य साथियों- वरुण सिंह और गौरव जायसवाल- को कोर्ट द्वारा भगोड़ा घोषित कर दिया गया है.
कोर्ट से लुकआउट नोटिस और गैर जमानती वारंट (NBW) जारी होने के बाद भी जब आरोपी हाजिर नहीं हुए, तो पुलिस अब इनकी संपत्ति कुर्क (धारा 82/83 के तहत) करने की तैयारी में है. शासन ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच यूपी एसटीएफ (STF) को सौंपी है. बताया जा रहा है कि पुलिसिया कार्रवाई की भनक लगते ही तीनों आरोपी दुबई भाग गए हैं. इस मामले में पुलिस अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है.
यूपी कोडीन कफ सिरप तस्करी मामला
उत्तर प्रदेश का कोडीन कफ सिरप केस राज्य के सबसे बड़े संगठित नशा तस्करी नेटवर्क में से एक है. कोडीन फॉस्फेट एक प्रतिबंधित नशीला तत्व है, जिसका इस्तेमाल कफ सिरप में होता है. इस मामले का मुख्य मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल है, जिस पर शासन ने 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है. शुभम के साथ उसके दो मुख्य सहयोगी, वरुण सिंह और गौरव जायसवाल, भी इस काले कारोबार के बड़े सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहे थे.
इन आरोपियों के खिलाफ लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है. मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने इसकी जांच यूपी एसटीएफ (STF) को सौंपी है. एसटीएफ की जांच में सामने आया कि यह गैंग फर्जी फार्मा कंपनियों, नकली ड्रग लाइसेंस और जाली बिलों के सहारे वैध फैक्ट्रियों से करोड़ों रुपये की कोडीन सिरप की खेप उठाता था. इस खेप को उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों और नेपाल-बांग्लादेश की सीमाओं पर नशेड़ियों को कई गुना महंगे दामों पर बेचा जाता था.
जब यूपी पुलिस और एसटीएफ ने इस सिंडिकेट पर शिकंजा कसा, तो शुभम, वरुण और गौरव गिरफ्तारी से बचने के लिए दुबई भाग गए. कोर्ट द्वारा गैर-जमानती वारंट (NBW) और लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद भी जब ये हाजिर नहीं हुए, तो अदालत ने तीनों को भगोड़ा घोषित कर दिया है. अब पुलिस इनके खिलाफ संपत्ति कुर्की (Attachment of Property) की कानूनी कार्रवाई कर रही है. इस बड़े नेटवर्क से जुड़े 18 सह-आरोपियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है.
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि शुभम जायसवाल और उसके साथी इस पूरे अवैध व्यापार के 'फाइनेंसर और लॉजिस्टिक्स हेड' थे. कंपनियों के नाम पर करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेन-देन किया गया और पुलिस के शिकंजे से बचने के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया.
संतोष शर्मा