'खिड़की तोड़कर पाइप से नीचे उतरी, किसी ने फोन नहीं उठाया', लड़की ने बताया लखनऊ अग्निकांड का मंजर

लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद दर्दनाक कहानियां लगातार सामने आ रही हैं. 15 लोगों की मौत के बीच एक जीवित बची युवती ने बताया कि कैसे उसने खिड़की तोड़कर पाइप के सहारे जान बचाई. वहीं जांच में सामने आया है कि रिहायशी मंजूरी वाली इमारत में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं.

Advertisement
 लड़की ने बताया लखनऊ अग्निकांड का मंजर (Photo: itg) लड़की ने बताया लखनऊ अग्निकांड का मंजर (Photo: itg)

समर्थ श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:57 AM IST

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र के पुरनिया इलाके में हुए भयावह अग्निकांड ने जहां 15 परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया, वहीं इस हादसे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है. आग की इस दर्दनाक घटना में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें तीन महिलाएं शामिल हैं. मृतकों की आयु 20 से 24 वर्ष के बीच बताई जा रही है.

Advertisement

जिम्मेदार व्यक्तियों पर FIR

मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने छह नामजद आरोपियों सहित अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. पुलिस अब तक रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तुशांक कृष्णा जायसवाल को गिरफ्तार कर चुकी है. अधिकारियों के अनुसार, घटना से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई लगातार जारी है.

मामले में एक एक कर कई दर्दनाक कहानियां सामने आ रही हैं. किसी ने मरने से पहले परिवार को फोन कर आखिरी बात की तो किसी खुद आग से निकलने की कोशिश में जान दे दी. 

'कोई हमारा फोन नहीं उठाया'

इसी कड़ी में बामुश्किल बची अस्पताल में भर्ती  एक युवती ने अग्निकांड की वीभत्सता के बारे में जो बताया जो कि रोंगटे खड़े कर देने वाला था. उसने बताया कि मैं बिल्डिंग में नौकरी करती थी. जब आग लगी और अफरातफरी मची को निकलने का कोई रास्ता नहीं था. मैं पाइप के सहारे नीचे उतरी. उससे पहले हम बुरी हालत में घबराए हुए फोन मिलाते रहे, कोई फोन ही नहीं उठा रहा था. कोई रास्ता नहीं था तो खिड़की तोड़कर पाइप के सहारे से नीचे उतरी. 

Advertisement

 हादसे के बाद हुई जांच में यह तथ्य सामने आया कि जिस भवन में आग लगी, उसे मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृति दी गई थी. लेकिन बाद में उसी इमारत का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाने लगा. आरोप है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण की निगरानी के बावजूद रिहायशी नक्शे पर एक व्यावसायिक परिसर विकसित हो गया, फिर भी संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »