बरेली में जनगणना ड्यूटी के बीच सरकारी टीचरों को मिला 100 कुंतल भूसा जुटाने का टारगेट, शिक्षक संघ भड़का- 'क्या कल गोबर भी उठवाएंगे?'

बरेली में बेसिक शिक्षा विभाग के एक नए फरमान ने सरकारी शिक्षकों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है. जनगणना के महत्वपूर्ण कार्य में लगे शिक्षकों को अब अनिवार्य रूप से प्रति स्कूल 46 किलो भूसा इकट्ठा करने का आदेश दिया गया है, जिस पर शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध जताया है.

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बरेली बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दिया डीएम के आदेश का हवाला (Photo- ITG) बरेली बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दिया डीएम के आदेश का हवाला (Photo- ITG)

कृष्ण गोपाल राज

  • बरेली ,
  • 28 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:18 PM IST

Uttar Pradesh News: बरेली में बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिला अधिकारी के आदेश का हवाला देते हुए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को सरकारी शिक्षकों से अनिवार्य रूप से भूसा दान कराने का निर्देश जारी किया है. वर्तमान में जनगणना के कार्य में व्यस्त चल रहे शिक्षकों को अब बेसहारा गोवंश के भरण-पोषण के लिए प्रत्येक स्कूल से 46 किलो और हर खंड से कुल 100 कुंतल भूसे का इंतजाम करने का जिम्मा सौंपा गया है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस आदेश पत्र में साफ कहा गया है कि नियम का उल्लंघन करने वाले स्कूलों और शिक्षकों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी. शिक्षा विभाग के इस अजीबोगरीब फरमान के बाद नवाबगंज, भोजीपुरा और भुता समेत तमाम क्षेत्रों के शिक्षक नेताओं और प्रधानाध्यापकों ने इस व्यवस्था का खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया है.

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सोशल मीडिया पर आदेश वायरल

बरेली के बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से पत्र जारी होते ही नवाबगंज, भोजीपुरा और भुता क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारियों ने अपने-अपने इलाकों में शिक्षकों को इसे लागू करने का निर्देश दे दिया है. इसके तहत प्रत्येक शिक्षक को 46 किलो भूसा एकत्रित करने का लक्ष्य मिला है. इस आदेश की कॉपियां अब सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रही हैं, जिससे शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. शिक्षकों का कहना है कि उन्हें अब गांव-गांव जाकर दान मांगना पड़ेगा.

'कल गोबर भी उठवाएंगे'- शिक्षक संघ ने जताया तीखा विरोध

इस आदेश से नाराज शिक्षक नेताओं और प्रधानाध्यापकों ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है. शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने इसे शिक्षकों का अपमान और उनका पतन बताया है. वहीं, प्रधानाध्यापक वीरेंद्र कुमार और हेमंत कुमार का कहना है कि जनगणना के बीच ऐसा अव्यवहारिक आदेश थोपना पूरी तरह गलत है. शिक्षकों ने तंज कसते हुए कहा कि एक हाथ में सरकारी किताबें और दूसरे हाथ में भूसे का कट्टा लेकर चलना अपमानजनक है. उन्होंने अंदेशा जताया कि भविष्य में उनसे गोबर उठवाने या नाली साफ कराने के आदेश भी दिए जा सकते हैं.

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जिलाधिकारी ने दी सफाई, गोवंश को गोद लेने की अपील की

इस पूरे विवाद पर जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में कार्रवाई की कोई बात नहीं है और वे इस मामले को दिखवा रहे हैं. डीएम ने अपील करते हुए कहा कि निराश्रित गोवंश के संरक्षण और देखभाल के लिए पूरे जनपद वासियों को आगे आना चाहिए और इसे एक धार्मिक व व्यक्तिगत कार्य के रूप में देखना चाहिए. उन्होंने स्कूलों से गोवंश को गोद लेने की अपील की और कहा कि जैसे मेधावियों को स्कूटी या टीवी मरीजों को गोद लिया जाता है, वैसे ही गोवंश की भलाई के लिए स्वेच्छा से दान करना चाहिए.

गौरतलब है कि बरेली में शिक्षकों से भूसा इकट्ठा कराने के प्रशासनिक आदेश पर महिला शिक्षिकाओं ने तीखा आक्रोश व्यक्त किया है. शिक्षिका रीता बत्रा का कहना है कि उनका मुख्य कार्य बच्चों का भविष्य बनाना और शिक्षा देना है.  यदि वे गांव-गांव जाकर भूसा इकट्ठा करने जैसा काम करेंगी, तो ग्रामीणों की नजर में शिक्षकों की गरिमा और प्रतिष्ठा पूरी तरह खत्म हो जाएगी. 

वहीं, शिक्षिका राखी गंगवार ने बताया कि चार-पांच दिन पहले निराश्रित गोवंश के लिए स्वैच्छिक भूसा दान का निर्देश आया था, जिसे बाद में अधिकारियों ने प्रति विद्यालय 46 किलो से लेकर 1 कुंतल तक अनिवार्य कर दिया. आदेश न मानने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.  उन्होंने कहा कि यह फरमान शिक्षकों की मर्यादा के खिलाफ है.  शिक्षक पहले से ही इस भीषण गर्मी में जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमों, बोर्ड परीक्षाओं और बीएलओ ड्यूटी जैसे तमाम सरकारी कार्यों को पूरी निष्ठा से कर रहे हैं.  गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा प्राप्त है और उनके संरक्षण के लिए अन्य विभागों के कार्यकर्ताओं को लगाया जाना चाहिए.  सभी सरकारी काम करने का यह मतलब कतई नहीं है कि शिक्षकों को भूसा जुटाने जैसे गरिमाहीन कार्यों में झोंक दिया जाए. 

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