'ईद पर न पहनेें नए कपड़े', जाने जेल में बंद आजम खान ने समर्थकों से क्यों की ये अपील

रामपुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान ने अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर मुस्लिम समुदाय से खास अपील की है. सपा नेता युसूफ मलिक के मुताबिक आजम खान ने कहा है कि ईरान में हुई घटनाओं के विरोध में इस बार ईद के दिन काले कपड़े पहनकर और काली पट्टी बांधकर नमाज अदा की जाए. साथ ही लोगों से नए कपड़े न पहनने और सादगी से ईद मनाने की अपील की गई है.

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आमिर खान

  • रामपुर,
  • 14 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:02 PM IST

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में आ गए हैं. रामपुर जेल में बंद आजम खान ने अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर मुस्लिम समुदाय से एक खास अपील की है. उन्होंने कहा है कि ईरान पर हुए हमले और उसमें मासूम बच्चियों की मौत के विरोध में इस बार ईद सादगी के साथ मनाई जाए और काले कपड़े पहनकर विरोध जताया जाए.

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दरअसल, रामपुर जेल में बंद आजम खान से उनकी पत्नी और समाजवादी पार्टी की नेता डॉक्टर तंजीन फातिमा और मुरादाबाद के सपा नेता युसूफ मलिक मुलाकात करने पहुंचे थे. मुलाकात के बाद जेल के बाहर मीडिया से बात करते हुए युसूफ मलिक ने आजम खान का संदेश साझा किया.

अमेरिका-ईरान संघर्ष पर आजम खान की अपील

युसूफ मलिक ने बताया कि आजम खान ने खासकर मुस्लिम समुदाय, विशेष रूप से सुन्नी मुसलमानों से अपील की है कि वो ईरान में हुई घटनाओं पर शोक और विरोध दर्ज कराएं. उन्होंने कहा कि ईद के दिन काले कपड़े पहनें, काली पट्टी बांधें और नए कपड़े न बनवाएं. साथ ही ईद के मौके पर खुशी का प्रदर्शन करने से भी बचें.

युसूफ मलिक के मुताबिक आजम खान का कहना है कि ईरान में जो घटनाएं हुई हैं, उनमें कई मासूम बच्चियों की जान गई है और यह पूरी मुस्लिम दुनिया के लिए दुखद घटना है. इसलिए इस दर्द और दुख को व्यक्त करने के लिए ईद के दिन विरोध का प्रतीक अपनाया जाना चाहिए.

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'ईद पर न पहनें नए कपड़े': आजम खान

गौरतलब है कि मोहम्मद आजम खान फिलहाल विभिन्न मामलों में सजा मिलने के बाद रामपुर जेल में बंद हैं. इसके बावजूद वह समय-समय पर राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार सामने रखते रहते हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेल में रहते हुए भी आजम खान के बयान अक्सर सुर्खियों में आ जाते हैं. इस बार भी उनके संदेश ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है. 

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