उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र में तीन बहनों द्वारा एक ही युवक से शादी करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. मामले में बाल कल्याण समिति (CWC) के हस्तक्षेप और तीन दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट मांगने पर युवतियों ने समिति के सामने पेश होकर अपना अपराध स्वीकार किया. युवतियों ने लिखित बयान में कबूला कि सस्ती लोकप्रियता और फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए उन्होंने यह प्रैंक वीडियो बनाया था. पुलिस और हिंदू संगठनों के दबाव के चलते डर की वजह से वे इस प्रैंक को सच साबित करने में लगी रहीं और सच बताने में देरी हुई.
CWC के सामने युवतियों का सच
बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश होकर देविका उर्फ सावित्री ने स्वीकार किया कि योजना प्रैंक को एक-दो दिन में ही खोलने की थी. हालांकि, पुलिस प्रशासन और हिंदू संगठनों के दबाव तथा कार्रवाई के डर से वे प्रैंक को छिपाती रहीं. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वे तीनों सगी बहनें नहीं बल्कि मौसेरी बहनें हैं.
मंदिर का इनकार और चेयरमैन का वीडियो
वायरल वीडियो में हवन बेदी, सिंदूर दान और फेरे लेते हुए दिखाया गया था. वीडियो चामुंडा मंदिर का बताया गया, लेकिन पुजारियों ने ऐसी शादी से साफ इनकार किया. वीडियो में हसनपुर नगर पालिका चेयरमैन और कुछ महिलाएं भी दिख रही थीं, जिसके बाद विवाद बढ़ा था और विरोध के बीच युवतियों ने शादी असली होने का दावा किया था.
अध्यक्ष का बयान और प्रैंक का अंत
CWC अमरोहा के अध्यक्ष अतुलेश भारद्वाज ने बताया कि ढौरिया गांव से जुड़े इस वायरल प्रकरण में थाने और जिला प्रोबेशन कार्यालय से रिपोर्ट मांगी गई थी. लड़कियों ने बयान दर्ज कराते हुए स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि उन्होंने कोई शादी नहीं की है और यह सिर्फ फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए बनाया गया एक प्रैंक वीडियो था.
बी एस आर्य