अभिनेत्री जया प्रदा को नहीं मिली राहत, अदालत में होना ही पड़ेगा हाजिर, जानें पूरा मामला

अभिनेत्री से राजनेत्री बनीं जया प्रदा को आचार संहिता के उल्लंघन मामले में मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है. जया प्रदा के वकील ने सेशन कोर्ट में अपील करते हुए वारंट रिकॉल करने की प्रार्थना की थी. इसे सेशन कोर्ट ने नामंजूर कर दिया और निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा है.

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अभिनेत्री जया प्रदा (फाइल फोटो). अभिनेत्री जया प्रदा (फाइल फोटो).

आमिर खान

  • रामपुर,
  • 19 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 10:05 PM IST

मशहूर फिल्म अभिनेत्री और रामपुर की पूर्व सांसद जया प्रदा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है. 2019 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में रामपुर में लोकसभा का चुनाव लड़ने वाली जया प्रदा के खिलाफ चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया था. इस मामले की सुनवाई रामपुर की एमपी एमएलए कोर्ट में चल रही है.

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पिछली कई तारीखों से जया प्रदा अदालत नहीं पहुंची है. इसको लेकर अदालत ने एनबीडब्ल्यू जारी कर दिया था. इस वारंट के खिलाफ जया प्रदा के वकील ने सेशन कोर्ट में अपील करते हुए वारंट रिकॉल करने की प्रार्थना की थी. इसे सेशन कोर्ट ने नामंजूर कर दिया और निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा. फिलहाल, जया प्रदा को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है और उनको अदालत में हाजिर होना ही होगा.

एमपी एमएलए कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रही थी जया प्रदा

अभियोजन अधिकारी अमरनाथ तिवारी ने बताया, जया प्रदा के विरुद्ध थाना स्वार और थाना केमरी में 2019 में चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले थे. जिसमें ट्रायल चल रहा था. पिछली तिथियों में पत्रावली 313 नियत थी. जया प्रदा माननीय विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट एमपी एमएलए कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रही थी. इसमें न्यायालय के द्वारा एनबीडब्ल्यू पिछली तिथियों में जारी किया गया था.

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पिछली तिथि जो 11 दिसंबर नियत थी. उस पर जया प्रदा के अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट से आए थे. जब उनसे पूछी गया कि अब तक कितने एनबीडब्ल्यू जारी हो चुके हैं जयाप्रदा के खिलाफ. इस पर अभियोजन अधिकारी ने बताया, दो पत्रावली हैं और दोनों में लगभग चार बार जारी हुए हैं. एक में चार बार हुए हैं. पिछली तिथियां में एक में एक बार हुआ था और फिर वह रिकॉल हो गया था.

11 दिसंबर की दिए गए थे तारीख

यह सवाल जब पूछा गया कि रिवीजन खारिज क्या होता है? इस पर अभियोजन अधिकारी ने बताया, उनके प्रार्थना पत्र एनबीडब्ल्यू रिकॉल करने के लिए 11 दिसंबर की तारीख दिए थे. उनकी रिकॉल प्रार्थना पत्र को खारिज करते हुए एनबीडब्ल्यू न्यायालय ने जारी किया था. उस आदेश के विरुद्ध उन्होंने रिवीजन किया था कि अगर रिवीजन अलाव होता, तो जो एनबीडब्ल्यू का आदेश था. वह निरस्त हो जाता. 

मगर, अपीलीय न्यायालय ने कहा कि नहीं जो न्यायालय का 11 दिसंबर का आदेश है एनबीडब्ल्यू जारी करने का और आपका रिकॉल प्रार्थना पत्र निरस्त करने का. वह विधि पूर्ण उसमें हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है. आप न्यायालय में उपस्थित हुई. ये अपनी कार्यवाही कीजिए और विधि अनुसार. लेकिन वह आज भी उपस्थित नहीं हुई थी. उनके द्वारा पुनः रिकॉल करने का प्रार्थना पत्र दिया गया था, जिसके परिपेक्ष में दोनों पक्षों को सुना गया है. न्यायालय ने अपना आदेश रखा है और कल आदेश पता चल जाएगा. अभी तक तो एनबीडब्ल्यू कंटिन्यू ही है.

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