अगर आपने कभी किसी निर्माणाधीन सड़क, पुल या बिल्डिंग के पास कुछ बुजुर्गों को खड़े होकर काम देखते हुए पाया हो, तो शायद आपको लगा होगा कि वे बस टाइमपास कर रहे हैं. लेकिन इटली में यही आदत अब एक तरह की 'नौकरी' में बदल गई है. वहां के कुछ रिटायर्ड बुजुर्ग, जो पहले सिर्फ उत्सुकतावश घंटों कंस्ट्रक्शन साइटों को देखा करते थे, अब आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक निर्माण कार्यों की निगरानी कर रहे हैं.
दिलचस्प बात यह है कि इटली में ऐसे लोगों के लिए एक खास शब्द भी है- 'उमरेल'. यह शब्द उन रिटायर्ड बुजुर्गों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो सुबह नाश्ता करने के बाद सड़क, पुल या किसी भी निर्माण स्थल के पास पहुंच जाते हैं और फिर हाथ पीछे बांधकर खड़े-खड़े काम का निरीक्षण करते रहते हैं. कई बार वे काम कर रहे मजदूरों और इंजीनियरों को सलाह भी देने लगते हैं कि काम कैसे होना चाहिए.
कैसे पड़ा 'उमरेल' नाम?
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, 'उमरेल' शब्द की शुरुआत 2005 में इटली के लेखक डेनिलो मासोटी ने की थी. यह शब्द बोलोन्या शहर की स्थानीय बोली के 'उमारेल' से निकला है, जिसका मतलब होता है 'छोटा आदमी'.
धीरे-धीरे यह शब्द पूरे इटली में इतना लोकप्रिय हो गया कि 2016 में एक फास्ट फूड कंपनी ने अपने विज्ञापन में भी इसका इस्तेमाल किया. 2021 में तो यह शब्द आधिकारिक तौर पर इटैलियन डिक्शनरी का हिस्सा भी बन गया.
कंस्ट्रक्शन साइट के 'स्थायी दर्शक'
इटली में उमरेल अक्सर समूह में दिखाई देते हैं. उनकी पहचान भी लगभग तय होती है. सिर पर कैप, जैकेट और दोनों हाथ पीछे की ओर बंधे हुए. वे निर्माण स्थल की बाड़ के पास खड़े होकर काम को बड़े ध्यान से देखते हैं और फिर उसकी समीक्षा भी करते हैं. कुछ लोग मजाक में कहते हैं कि अगर किसी सड़क पर काम चल रहा हो, तो वहां मजदूरों से पहले उमरेल पहुंच जाते हैं.
जब टाइमपास की आदत बन गई जिम्मेदारी
उत्तरी इटली के लोम्बार्डी क्षेत्र में स्थित विलासांता नाम के छोटे शहर में स्थानीय प्रशासन ने सोचा कि जब ये बुजुर्ग पहले से ही इतनी बारीकी से निर्माण कार्यों पर नजर रखते हैं, तो क्यों न उनकी इस आदत का उपयोग शहर के कामों में किया जाए.
इसके बाद नगर प्रशासन ने कुछ रिटायर्ड लोगों को स्वयंसेवक के रूप में नियुक्त किया. इनमें 69 वर्षीय रोबर्टो क्रेमोना और गैब्रिएला गराट्टी जैसे लोग शामिल हो गए. इनका काम किसी इंजीनियर की तरह निर्माण करना नहीं, बल्कि शहर में चल रहे सार्वजनिक कार्यों पर नजर रखना है. वे सड़कों के गड्ढे, खराब स्ट्रीट लाइट, टूटी फुटपाथ, घास की कटाई और सड़क निर्माण जैसे कामों की स्थिति देखकर प्रशासन को रिपोर्ट देते हैं.
उमरेल आमतौर पर झुंड में काम करते हैं, अक्सर बार में एक साथ नाश्ता करने के बाद. उनकी विशिष्ट वेशभूषा में जैकेट और टोपी शामिल होती है, और वे अक्सर अपने हाथों को पीठ के पीछे बांधकर निर्माण कार्यों में ताक-झांक करते हैं.
शहर को मिला मुफ्त का निगरानी तंत्र
हर स्वयंसेवक को शहर का एक हिस्सा सौंपा गया है. वे रोजाना दो से तीन घंटे तक अपने इलाके का निरीक्षण करते हैं. अगर कहीं कोई समस्या दिखती है, तो उसकी सूचना प्रशासन तक पहुंचाते हैं.
गैब्रिएला गराट्टी ने गार्जियन से बात करते हुए बताया कि अपने शुरुआती निरीक्षण के दौरान उन्होंने ऐसी जगहें देखीं जहां फाइबर ऑप्टिक केबल बिछाने के बाद सड़क ठीक से नहीं बनाई गई थी. वहीं एक चौराहे पर जरूरी संकेतक भी गायब थे, जो दुर्घटना का कारण बन सकते थे.अब ये बुजुर्ग सिर्फ देखने भर का काम नहीं करते, बल्कि शहर की छोटी-बड़ी समस्याओं की पहचान करके उन्हें ठीक कराने में भी मदद कर रहे हैं.
पहली शर्त- मजदूरों को परेशान नहीं करेंगे
हालांकि प्रशासन ने एक खास नियम भी बनाया है. इन स्वयंसेवकों को असली 'उमरेल' की तरह काम कर रहे लोगों को सलाह देने या परेशान करने की अनुमति नहीं है.
शहर के मेयर लोरेंजो गैली का कहना है कि एक पारंपरिक उमरेल सिर्फ देखने और टिप्पणी करने जाता है, लेकिन इन स्वयंसेवकों का उद्देश्य समस्याओं की पहचान करना और समाधान में मदद करना है.
घास काटने वाले कर्मचारी भी खुश
रिपोर्ट के अनुसार, शहर में घास काटने का काम करने वाले एक कर्मचारी फैब्रिजियो का कहना है कि उन्हें इन स्वयंसेवकों से कोई परेशानी नहीं है. उल्टा इससे काम की निगरानी बेहतर होती है.उनका कहना है कि असली परेशानी तो उन लोगों से होती है जो ऐसी समस्याओं पर बहस शुरू कर देते हैं, जो वास्तव में होती ही नहीं.
बुजुर्गों को मिला नया मकसद
ऐसे ही बुजुर्ग रोबर्टो क्रेमोना और उनके साथी इस जिम्मेदारी को बेहद गंभीरता से लेते हैं. वे अब शहर की पार्किंग व्यवस्था सुधारने जैसे नए प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहे हैं.हालांकि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी ड्यूटी को दूसरे पारिवारिक कामों के साथ संतुलित करना है.
किसी को डॉक्टर के पास जाना होता है तो किसी को अपने पोते-पोतियों की देखभाल करनी होती है.फिर भी वे आपस में समन्वय करके यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी दिन निगरानी का काम प्रभावित न हो.
क्यों खास है यह मॉडल?
इटली में यह पहल अभी बहुत आम नहीं है, लेकिन इसे एक दिलचस्प सामाजिक प्रयोग माना जा रहा है. जिस आदत को लोग पहले सिर्फ फालतू समय बिताने का तरीका समझते थे, वही अब शहर के रखरखाव में मदद कर रही है.
शायद यही वजह है कि इटली के विलासांता के ये बुजुर्ग अब खुद को सिर्फ रिटायर्ड नहीं मानते. उन्हें लगता है कि वे आज भी समाज के लिए उपयोगी हैं. और शायद यही इस पूरी कहानी का सबसे खूबसूरत पहलू है कि हाथ पीछे बांधकर कंस्ट्रक्शन देखने वाले बुजुर्ग अब उसी काम के लिए सम्मान और जिम्मेदारी दोनों पा रहे हैं.
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