क्या सच में काम के बाद भी जिंदगी होती है? या फिर हम ऑफिस से निकलने के बाद भी दिमाग से काम ही करते रहते हैं? जर्मनी में चार साल बिताने वाली एक भारतीय युवती का कहना है कि वहां जाकर उन्हें सबसे बड़ा लाइफ लेसन मिला. उनका दावा है कि जर्मनी ने उन्हें सिखाया कि काम से डिस्कनेक्ट होकर जिंदगी से दोबारा कैसे जुड़ा जाता है. उनका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
यह वीडियो दिल्ली की रहने वाली हिमानी शर्मा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट @zeal_to_fly पर शेयर किया है. हिमानी पिछले चार साल से जर्मनी में रह रही हैं और अब जल्द ही दुबई शिफ्ट होने वाली हैं. विदेश छोड़ने से पहले उन्होंने वहां सीखी सबसे बड़ी सीख लोगों के साथ शेयर की.
'शाम 6 बजे के बाद लोग सचमुच अपनी जिंदगी जीते हैं'
वीडियो में हिमानी कहती हैं कि जर्मनी में शाम के करीब 6 बजे के बाद माहौल पूरी तरह बदल जाता है. ज्यादातर दुकानें बंद हो जाती हैं, ऑफिस का काम खत्म हो जाता है और लोग अपनी जिंदगी जीने लगते हैं.उनके मुताबिक, लोग घंटों कैफे में बैठकर बातें करते हैं, एक कॉफी या ड्रिंक को आराम से एंजॉय करते हैं और उस समय सिर्फ उसी पल में जीते हैं.
भारत के हसल कल्चर पर क्या बोलीं?
हिमानी ने अपने अनुभव शेयर करते हुए कहा कि भारत में अक्सर दोस्तों से मिलने पर भी लोग पूरी तरह फ्री नहीं होते. कोई फोन चेक कर रहा होता है, कोई ऑफिस के मैसेज का जवाब दे रहा होता है, तो कोई जल्दी-जल्दी खाना खाकर निकलने की सोचता है.उन्होंने कहा कि जर्मनी में रहने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि काम जरूरी है, लेकिन काम के बाद अपनी जिंदगी को समय देना भी उतना ही जरूरी है.
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आखिर हसल कल्चर क्या है?
हसल कल्चर उस सोच को कहा जाता है, जिसमें लगातार काम करना, हर समय उपलब्ध रहना और हमेशा व्यस्त रहना ही सफलता का पैमाना मान लिया जाता है. पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में इस संस्कृति को लेकर बहस तेज हुई है और कई विशेषज्ञ वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखने पर जोर देते हैं.
रिसर्च क्या कहती है?
ओईसीडी (आर्थिक सहयोग और विकास संगठन) के आंकड़ों के अनुसार, जर्मनी उन देशों में शामिल है जहां औसतन काम के घंटे कई अन्य विकसित देशों की तुलना में कम हैं. वहीं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि लगातार काम के बारे में सोचते रहने से तनाव, थकान और बर्नआउट का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए काम के बाद खुद, परिवार और दोस्तों के लिए समय निकालना मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है.
हिमानी का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं. कई यूजर्स ने कहा कि भारत में भी बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस की जरूरत है. वहीं कुछ लोगों का मानना था कि भारत और जर्मनी की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए दोनों की तुलना पूरी तरह सही नहीं मानी जा सकती.
अब दुबई जा रही हैं हिमानी
हिमानी ने बताया कि चार साल जर्मनी में बिताने के बाद अब वह दुबई शिफ्ट हो रही हैं. हालांकि, उनका कहना है कि जर्मनी से सीखी यह आदत वह हमेशा अपने साथ रखेंगी काम खत्म होने के बाद खुद और अपनों के लिए समय निकालना.यही वजह है कि उनका वीडियो सिर्फ एक विदेशी अनुभव नहीं, बल्कि वर्क-लाइफ बैलेंस पर नई बहस की शुरुआत बन गया है और सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है.
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