दुनिया के सबसे कुख्यात तानाशाहों में गिने जाने वाले एडोल्फ हिटलर का जन्म जिस घर में हुआ था, अब वहां पुलिस का दफ्तर चलने लगा है. पहली नजर में यह फैसला अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक बड़ी वजह छिपी है. (Photo - AP)
ऑस्ट्रिया की सरकार नहीं चाहती थी कि यह इमारत नव-नाजी (Neo-Nazi) विचारधारा को मानने वाले लोगों के लिए श्रद्धा या जुटान की जगह बन जाए. यही कारण है कि इस ऐतिहासिक इमारत को पुलिस स्टेशन में बदल दिया गया. (Photo - AP)
ऑस्ट्रिया के ब्राउनाउ एम इन शहर में मौजूद 17वीं सदी की इस इमारत का बुधवार को आधिकारिक तौर पर जिला पुलिस मुख्यालय के रूप में उद्घाटन किया गया. लंबे समय तक इसकी मरम्मत और बदलाव का काम चला, जिसके बाद अब यहां पुलिस का संचालन शुरू हो गया है. (Photo - AP)
हिटलर के जन्मस्थान वाली यह इमारत साल 2011 से खाली पड़ी थी. बाद में इस संपत्ति के मालिक और ऑस्ट्रियाई सरकार के बीच विवाद हुआ. आखिरकार सरकार ने इस इमारत का अधिग्रहण कर लिया. इसके बाद विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई, जिसने इस इमारत के भविष्य को लेकर सुझाव दिए. समिति का मानना था कि यहां कोई सरकारी दफ्तर या सामाजिक काम से जुड़ी संस्था बनाई जानी चाहिए. (Photo - AP)
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि अगर इस इमारत को संग्रहालय बना दिया जाता, तो भी यह नियो-नाजी विचारधारा के समर्थकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती थी. यानी संग्रहालय का उद्देश्य चाहे इतिहास बताना ही क्यों न हो, लेकिन वहां कट्टरपंथी लोगों के पहुंचने का खतरा बना रहता.वहीं, इमारत को पूरी तरह गिराने का भी विरोध किया गया, क्योंकि इससे इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थान हमेशा के लिए खत्म हो जाता. (Photo - AP)
हालांकि इमारत का बाहरी हिस्सा पूरी तरह नया रूप दिया गया है, लेकिन इसके बाहर लगा स्मारक पत्थर आज भी वहीं मौजूद है. इस पर लिखा है, शांति, आजादी और लोकतंत्र के लिए, फासीवाद फिर कभी नहीं. लाखों लोगों की मौत हमें इसकी याद दिलाती है.यह संदेश दुनिया को यह याद दिलाता है कि फासीवाद और नफरत की राजनीति ने मानव इतिहास को कितना बड़ा नुकसान पहुंचाया था. (Photo - AP)
एडोल्फ हिटलर का जन्म ऑस्ट्रिया में हुआ था, लेकिन बाद में वह जर्मनी का तानाशाह बना. उसने ऑस्ट्रिया को जर्मनी में मिलाने का समर्थन किया और 1938 में यह लक्ष्य पूरा भी कर लिया.अब उसी हिटलर के जन्मस्थान को पुलिस स्टेशन में बदलकर ऑस्ट्रिया ने साफ संदेश देने की कोशिश की है कि इतिहास को मिटाया नहीं जाएगा, लेकिन उसे नफरत फैलाने वालों का प्रतीक भी नहीं बनने दिया जाएगा. (Photo - AP)