Aravalli Hills Must Visit Destinations: भारत के कई शहर घूमने के लिए हर साल देश-विदेश से कई लोग आते हैं और उन्हीं में से एक राजस्थान भी है. यहां की पहचान सिर्फ रेगिस्तान, ऊंट और राजघरानों से नहीं है, बल्कि यहां की पहाड़ियां, किले, महल और सदियों पुरानी कहानियां भी देश के इतिहास को अपने अंदर समेटे हुए हैं.
क्या आपने कभी सोचा है कि राजस्थान की तपती रेत और गर्म हवाओं के बीच भी ठंडक का एहसास आखिर कहां से आता है? इसका जवाब है अरावली की प्राचीन पर्वतमाला, जो लगभग 2.5 अरब सालों से मजबूती के साथ खड़ी है. ये पहाड़ सिर्फ चट्टानों का समूह नहीं, बल्कि भारत की प्राकृतिक धरोहर हैं.
अरावली पर्वत श्रृंखला थार रेगिस्तान की गर्म हवाओं और रेगिस्तान के फैलाव को रोकने में अहम भूमिका निभाती है, जिसकी वजह से उत्तर भारत के कई इलाकों का पर्यावरण और हरियाली बैलेंस बनी रहती है. अगर आप ऐसी यात्रा करना चाहते हैं जहां आपको प्रकृति के साथ-साथ इतिहास को करीब से जानने का मौका मिले, तो माउंट आबू से लेकर सरिस्का तक का अरावली क्षेत्र आपके लिए शानदार हो सकता है.
इस पूरे इलाके में कई ऐसे ऐतिहासिक रत्न छिपे हैं, जहां पहुंचकर ऐसा लगता है जैसे आप किसी किताब के पन्नों में नहीं, बल्कि इतिहास के बीच खड़े हैं. आइए जानते हैं अरावली की पहाड़ियों से जुड़े ऐसे ही 5 शानदार ऐतिहासिक जगहों के बारे में, जिन्हें अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल किया जा सकता है.
माउंट आबू और दिलवाड़ा जैन मंदिर
अरावली की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बसा माउंट आबू राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन है. समुद्र तल से करीब 1,722 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह जगह गर्मी से राहत पाने के लिए तो पॉपुलर है ही, लेकिन इतिहास और धर्म में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी यहां बहुत कुछ है. यहां की सबसे खास ऐतिहासिक धरोहरों में दिलवाड़ा जैन मंदिर का नाम सबसे ऊपर आता है.
सफेद संगमरमर से बने इन मंदिरों की बारीक नक्काशी देखकर आपको अंदाजा हो जाएगा कि सदियों पहले कारीगरों ने पत्थर पर कितनी बारीकी से काम किया होगा. मंदिरों की छतों, खंभों और दीवारों पर की गई नक्काशी इसकी खूबसूरती को और बढ़ाती है. माउंट आबू में गुरु शिखर और नक्की झील जैसे स्थल भी यात्रा को यादगार बनाते हैं.
चित्तौड़गढ़ का किला
अगर इतिहास में आपकी दिलचस्पी राजपूतों के शौर्य और वीरता की कहानियों में है, तो चित्तौड़गढ़ किला आपको जरूर पसंद आएगा. एक ऊंची पहाड़ी पर फैला यह विशाल किला राजस्थान के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक माना जाता है. किले के अंदर मौजूद कई महल, मंदिर और ऐतिहासिक स्मारक यहां के गौरवशाली अतीत की कहानी बताते हैं.
किले में एंट्री करते समय इसके बड़े दरवाजे और रास्ते आपको पुराने समय की याद दिलाते हैं. यहां विजय स्तंभ समेत कई ऐतिहासिक संरचनाएं देखने को मिलती हैं. चित्तौड़गढ़ की यात्रा सिर्फ एक किला देखने का अनुभव नहीं है, बल्कि यह राजपूताना इतिहास, संघर्ष और वीरता को करीब से महसूस करने का मौका भी देती है.
कुंभलगढ़ किला
अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित कुंभलगढ़ किला राजस्थान के सबसे शानदार ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है. 15वीं शताब्दी में राणा कुंभा द्वारा बनवाया गया यह किला अपनी विशाल दीवारों और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के लिए फेमस है. किले की दीवारें पहाड़ियों के बीच काफी दूर तक फैली हुई हैं और इसे देखने पर अंदाजा होता है कि पुराने समय में राजाओं के लिए सुरक्षा कितनी अहम हुआ करती थी.
कुंभलगढ़ का इतिहास महाराणा प्रताप से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि उन्हें इसी किले का जन्मस्थान माना जाता है. किले के अंदर मंदिर, महल और अन्य ऐतिहासिक संरचनाएं मौजूद हैं, पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहां से आसपास का अरावली क्षेत्र भी बेहद खूबसूरत नजर आता है. इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता को एक साथ देखना चाहते हैं, तो कुंभलगढ़ आपकी यात्रा का खास पड़ाव हो सकता है.
नीमराना किला
अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित नीमराना किला इतिहास और शाही वास्तुकला को करीब से देखने का एक अलग अनुभव देता है. यह ऐतिहासिक किला अपनी ऊंचाई और पहाड़ी पर बने अपने खास ढांचे के कारण दूर से ही काफी अट्रैक्टिव है. किले के अंदर बने महल, आंगन, झरोखे और सजावटी वास्तुकला राजस्थान के शाही दौर की याद दिलाते हैं.
आज यह जगह अपने हेरिटेज अनुभव के लिए भी जानी जाती है, यहां पहुंचकर आप पुराने किले की वास्तुकला को देखने के साथ अरावली की पहाड़ियों का खूबसूरत नजारा भी देख सकते हैं. अगर आप दिल्ली-एनसीआर से वीकेंड ट्रिप का प्लान बना रहे हैं, तो नीमराना इतिहास और घूमने-फिरने का अच्छा मेल साबित हो सकता है.
भानगढ़ किला और सरिस्का का इलाका
अरावली की यात्रा का एक दिलचस्प पड़ाव भानगढ़ किला भी हो सकता है. सरिस्का से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह किला अपने खंडहरों, पुराने मंदिरों, बाजारों और महलों के अवशेषों के कारण इतिहास लवर्स को अट्रैक्टिव लगता है. 17वीं शताब्दी में बनाए गए इस किले के आसपास कभी एक समृद्ध बस्ती हुआ करती थी.
आज भानगढ़ को लोग अक्सर इसकी भुतहा कहानियों की वजह से जानते हैं, लेकिन इन कहानियों से अलग देखें तो यह जगह अपने ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व के लिए भी खास है. किले के आसपास फैली अरावली की पहाड़ियां और पुराने खंडहर मिलकर इसे एक अलग ही माहौल देते हैं. इसके बाद आप सरिस्का की ओर बढ़ सकते हैं, जहां इतिहास और जंगल का अनोखा मेल देखने को मिलता है.
इसलिए अगली बार अगर आप राजस्थान घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो केवल पॉपुलर शहरों तक सीमित रहने के बजाय अरावली की पहाड़ियों में छिपे इन ऐतिहासिक रत्नों को भी अपनी यात्रा में शामिल करें. यह सफर आपको सिर्फ खूबसूरत नजारे नहीं दिखाएगा, बल्कि भारत के इतिहास के उन पन्नों से भी रूबरू कराएगा, जिन्हें पढ़ने के बजाय आप अपनी आंखों से महसूस कर सकेंगे.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क