अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं और हाल के दिनों में कीमतें देखकर रुक गए हैं, तो आप अकेले नहीं हैं. पिछले कुछ महीनों में Samsung, OnePlus, Vivo, OPPO, Realme और दूसरी कंपनियों ने कई स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ाई हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि फोन की कीमत बढ़ने का सिलसिला जारी रहेगा और साल के आखिर तक 50% तक फोन महंगे हो सकते हैं.
इसकी सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बताई जा रही है. दरअसल एआई के लिए चिप की जरूरत होती है और चिप मेकर्स इन दिनों AI कंपनियों को महंगी कीमत पर चिपसेट बेच रहे हैं.
AI चीजों को सस्ता करने आया था, लेकिन इसने स्मार्टफोन्स को महंगा कर दिया
ऐसे में चिप और दूसरे पार्ट्स की डिमांड बढ़ रही है और सप्लाई कम होने की वजह से कीमतें भी बढ़ रही हैं. यही वजह है कि अब पहले के मुकाबले वही बजट लेकर बाजार जाने पर कम ऑप्शन मिल रहे हैं.
ऐसे में एक सवाल तेजी से उठ रहा है. क्या अब सेकेंड हैंड या रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन खरीदना ज्यादा समझदारी होगी? मार्केट के आंकड़े बताते हैं कि इसका जवाब काफी हद तक 'हां' है. भारत में सेकेंड हैंड और रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन की मांग लगातार बढ़ रही है.
रिसर्च फर्म काउंटरप्वॉइंट के मुताबिक 2026 में भारत का रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन बाजार करीब 12 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ सकता है, जबकि नए स्मार्टफोन की बिक्री में गिरावट आने का अनुमान है.
मिड रेंज फोन की कीमत पर फ्लैगशिप फोन खरीद सकते हैं
इसकी सबसे बड़ी वजह कीमत है. जिस बजट में आपको नया मिड-रेंज फोन मिलता है, उसी कीमत में एक या दो साल पुराना फ्लैगशिप स्मार्टफोन मिल सकता है.
ऐसे फोन में बेहतर कैमरा, ज्यादा पावरफुल प्रोसेसर, अच्छी डिस्प्ले और वायरलेस चार्जिंग जैसे फीचर भी मिल जाते हैं. यही वजह है कि अब कई लोग नया फोन खरीदने की बजाय सेकेंड हैंड iPhone या प्रीमियम Android फोन लेना पसंद कर रहे हैं.
iPhone का प्रो मॉडल 1.30 लाख में ही लॉन्च होता है, लेकिन सेकंड हैंड मार्केट में दो जेनेरेशन पुराना प्रो आईफोन 40-50 हजार रुपये में आराम से खरीद सकते हैं. लंबे समय तक ऐपल अपडेट भी देता है और फोन लंबा भी चलता है.
इसी तरह सैमसंग का Galaxy Ultra भी लाख रुपये से ज्यादा में ही मिलता है. लेकिन कुछ जेनेरेशन पुराना अल्ट्रा आप 40-50 हजार रुपये में सेकंड हैंड मार्केट में खरीद सकते हैं. सैमसंग भी 7 साल तक का अपडेट देता है ऐसे में फोन लंबे समय तक भी चलेगा और अपडेट की भी कई टेंशन नहीं.
How To Buy Used Smartphone
हालांकि सेकेंड हैंड फोन खरीदते समय सिर्फ कम कीमत देखकर फैसला करना सबसे बड़ी गलती हो सकती है. अगर कुछ जरूरी बातों का ध्यान नहीं रखा गया, तो सस्ता फोन भी महंगा सौदा साबित हो सकता है.
चेक करें IMEI
सबसे पहले फोन का IMEI नंबर जरूर चेक करें. फोन की सेटिंग में जाकर या *#06# डायल करके IMEI नंबर देखें और उसे बॉक्स पर लिखे नंबर से मिलाएं. अगर दोनों नंबर अलग हैं या फोन के साथ बॉक्स नहीं है, तो सावधानी बरतें. यह भी देखें कि फोन कहीं ब्लैकलिस्टेड या चोरी का तो नहीं है. ऐसे फोन खरीदने से बाद में परेशानी हो सकती है.
बैटरी हेल्थ भी चेक करें
फोन खरीदने से पहले उसकी बैटरी की स्थिति जरूर देखें. अगर आप iPhone खरीद रहे हैं तो बैटरी हेल्थ आसानी से देखी जा सकती है. Android फोन में यह जानकारी हमेशा नहीं मिलती, लेकिन बैटरी कितनी देर चलती है और चार्जिंग सामान्य है या नहीं, यह जरूर चेक करें.
अगर बैटरी पहले ही काफी खराब हो चुकी है तो बाद में उसे बदलने का खर्च भी जोड़ना पड़ेगा. फोन की स्क्रीन को भी ध्यान से देखें. कई बार ऊपर से स्क्रीन बिल्कुल ठीक दिखती है, लेकिन उसमें डेड पिक्सल, टच की दिक्कत या डिस्प्ले बदलने का इतिहास हो सकता है. ब्राइटनेस बढ़ाकर अलग-अलग रंग देखकर जांचना बेहतर रहता है.
कैमरा टेस्ट करें
कैमरा भी अच्छी तरह टेस्ट करें. सिर्फ फोटो खींचकर ही नहीं, बल्कि वीडियो रिकॉर्डिंग, अल्ट्रा वाइड कैमरा, टेलीफोटो कैमरा और सेल्फी कैमरा भी चलाकर देखें. कई बार सेकेंड हैंड फोन में किसी एक कैमरे में दिक्कत होती है जिसका पता बाद में चलता है.
कनेक्टिविटी चेक करें
इसके अलावा स्पीकर, माइक्रोफोन, वाइब्रेशन मोटर, Wi-Fi, Bluetooth, GPS, फिंगरप्रिंट सेंसर और फेस अनलॉक जैसी चीजें भी जरूर चेक करें. अगर इनमें से कोई फीचर ठीक से काम नहीं कर रहा है तो बाद में उसे ठीक कराना महंगा पड़ सकता है.
अगर फोन में पानी जाने से नुकसान हुआ है तो उससे भी बचना चाहिए. कई स्मार्टफोन में लिक्विड डैमेज इंडिकेटर होता है जिससे पता चल सकता है कि फोन के अंदर कभी पानी गया है या नहीं. फोन के स्क्रू भी ध्यान से देखें. अगर स्क्रू पर ज्यादा निशान हैं तो हो सकता है कि फोन कई बार खोला गया हो.
सॉफ्टवेयर अपडेट कब तक मिलेगा ये भी चेक करें
फोन खरीदने से पहले यह भी देखें कि उसे आगे कितने साल तक सॉफ्टवेयर अपडेट मिलेंगे. अगर कोई फोन पहले ही चार-पांच साल पुराना हो चुका है और उसे अब अपडेट नहीं मिलने वाले, तो बेहतर होगा कि थोड़ा नया मॉडल चुना जाए. आज के समय में सिक्योरिटी अपडेट भी उतने ही जरूरी हैं जितने नए फीचर.
कुछ महीने की वॉरंटी भी मांगें
अगर बजट थोड़ा ज्यादा है तो कोशिश करें कि किसी भरोसेमंद रिफर्बिश्ड प्लेटफॉर्म या ऑफिशियल रीसेलर से फोन खरीदें. ऐसे प्लेटफॉर्म पर फोन की जांच की जाती है और कई मामलों में वारंटी भी मिल जाती है. इससे जोखिम काफी कम हो जाता है. रिसर्च बताती है कि अब खरीदार सिर्फ सस्ता फोन नहीं चाहते, बल्कि वारंटी और भरोसेमंद क्वालिटी भी चाहते हैं.
मोलभाव करना भी अच्छी डील का हिस्सा है. अगर फोन में हल्के स्क्रैच हैं लेकिन परफॉर्मेंस अच्छी है तो कीमत कम कराई जा सकती है. साथ ही बाजार में उसी मॉडल की औसत कीमत पहले ऑनलाइन जरूर देख लें ताकि ज्यादा पैसे न देने पड़ें.
आज के समय में सेकेंड हैंड फोन खरीदना पहले जैसा जोखिम भरा नहीं रह गया है. अगर सही जांच-पड़ताल करके फोन खरीदा जाए तो कम बजट में काफी बेहतर डिवाइस मिल सकता है.
खासकर ऐसे समय में जब नए स्मार्टफोन लगातार महंगे हो रहे हैं, सेकेंड हैंड और रिफर्बिश्ड बाजार कई लोगों के लिए समझदारी भरा ऑप्शन बनकर उभर रहा है.
आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क