एक गलती, सालों की कमाई खत्म! OTP स्कैम कैसे करता है मिनटों में बड़ा नुकसान

OTP एक सिक्योरिटी लेयर होती है. लेकिन यही सिक्योरिटी लेयर लोगों पर भारी पड़ रहा है. स्कैमर्स अलग अलग तरह से लोगों से कैसे भी करके OTP लेते हैं फिर शुरू होता है साइबर फ्रॉड. आइए जानते हैं कैसे होता है OTP स्कैम.

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OTP स्कैम (Photo for representation) OTP स्कैम (Photo for representation)

मुन्ज़िर अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 06 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:35 PM IST

फोन पर एक कॉल आता है. सामने वाला खुद को बैंक का कर्मचारी बताता है. आवाज़ में भरोसा होता है, बातों में जल्दी. कहा जाता है कि आपके अकाउंट में कुछ गड़बड़ दिख रही है या फिर KYC अपडेट नहीं है. इसी बीच एक OTP आता है. सामने वाला कहता है, बस कन्फर्मेशन के लिए बताना है.

यहीं से OTP स्कैम शुरू होता है. और अक्सर यहीं पर कहानी खत्म भी हो जाती है.

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भारत में डिजिटल पेमेंट बढ़ने के साथ OTP स्कैम सबसे तेजी से फैलने वाला साइबर अपराध बन चुका है. UPI, बैंकिंग ऐप्स, ई-कॉमर्स और यहां तक कि सोशल मीडिया अकाउंट्स तक इस स्कैम की चपेट में आ रहे हैं. खास बात यह है कि अब इसमें सिर्फ बुज़ुर्ग या कम पढ़े-लिखे लोग ही नहीं, बल्कि टेक समझने वाले युवा भी फंस रहे हैं.

OTP स्कैम काम कैसे करता है?

OTP यानी वन टाइम पासवर्ड. यह सिस्टम इसलिए बनाया गया था ताकि सिर्फ असली यूज़र ही अपने अकाउंट तक पहुंच सके. लेकिन स्कैमर्स ने इसी सुरक्षा को सबसे कमजोर कड़ी बना दिया है. इसे सेकंड लेयर सिक्योरिटी या टू फैक्टर ऑथेन्टिकेशन भी कहा जाता है. 

आज OTP स्कैम सिर्फ OTP बताइए तक सीमित नहीं है. पहले आपको डराया जाता है, फिर भरोसा बनाया जाता है. स्कैमर आपके बैंक का नाम, कभी-कभी आपकी आखिरी ट्रांजैक्शन या शहर तक जानता है. यह जानकारी डेटा लीक, फर्जी ऐप्स या ऑनलाइन फॉर्म्स से आती है.

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जब सामने वाला आपकी डिटेल सही-सही बोलता है, तो शक कम हो जाता है. और जैसे ही OTP शेयर होता है, स्कैमर आपके अकाउंट में लॉग-इन कर लेता है या UPI ऑटो-डेबिट सेट कर देता है. कई मामलों में कुछ ही मिनटों में अकाउंट खाली हो जाता है.

UPI और बैंक अकाउंट सबसे आसान टारगेट क्यों हैं?

UPI तेज़ है, रियल-टाइम है और ट्रांजैक्शन तुरंत पूरा हो जाता है. यही वजह है कि स्कैमर्स इसे सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. एक बार OTP मिलते ही पैसे निकालने में उन्हें वक्त नहीं लगता.

बैंक बाद में साफ कह देता है कि OTP आपने खुद शेयर किया था. यहीं पर मामला कमजोर हो जाता है और पैसा वापस मिलने की उम्मीद भी कम हो जाती है.

सबसे खतरनाक गलतफहमी

अक्सर लोग सोचते हैं कि OTP तो सिर्फ एक बार के लिए होता है, इससे ज्यादा नुकसान क्या होगा. यही सोच सबसे बड़ी गलती है.

OTP असल में आपकी डिजिटल चाबी है. आपने चाबी दे दी, तो दरवाज़ा खुद खुल जाएगा. बैंक, पुलिस या कोई कस्टमर केयर कभी भी OTP नहीं मांगता. अगर कोई मांग रहा है, तो वह बैंक नहीं है.

स्कैम टेक्नोलॉजी से ज्यादा दिमाग का खेल है

OTP स्कैम टेक्निकल से ज्यादा साइकोलॉजिकल है. इसमें डर दिखाया जाता है, जल्दी मचाई जाती है और खुद को अथॉरिटी की तरह पेश किया जाता है.

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अभी नहीं बताया तो अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा,  लाइन मत काटिए या  सिस्टम में दिख रहा है... इस तरह की बातें आपको सुनने को मिलेंगे. 

इन शब्दों से इंसान सोचने का वक्त ही नहीं पाता. यही स्कैम की असली ताकत है.

सरकार और बैंक क्या कहते हैं

RBI और सरकार लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि OTP किसी के साथ साझा न करें. बैंक भी साफ कहते हैं कि OTP सिर्फ ग्राहक के लिए होता है. इसके बावजूद शिकायतें बढ़ रही हैं, क्योंकि स्कैमर्स हर बार नया तरीका निकाल लेते हैं.

अगर OTP शेयर हो जाए तो क्या करें

अगर OTP शेयर हो चुका है और पैसे कट गए हैं, तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई जरूरी है. सबसे पहले अपने बैंक को जानकारी दें, UPI ऐप में शिकायत दर्ज करें और 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें. इसके साथ ही साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करना भी जरूरी है.

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