WhatsApp को रेड फ्लैग, भारत का कानून मानो या देश छोड़कर जाओ, ऐसे भरेगा सरकारी खजाना

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने Meta के लिए सख्त रवैया अपनाया. सुप्रीम कोर्ट ने Meta से कहा कि भारत के कानून मानो या देश छोड़कर जाओ. साइबर कानून एक्सपर्ट और वकील विराग गुप्ता ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का Meta और WhatsApp पर क्या असर पड़ेगा.

Advertisement
सुप्रीम कोर्ट Meta को लेकर हुआ सख्त. (File Photo) सुप्रीम कोर्ट Meta को लेकर हुआ सख्त. (File Photo)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली ,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:30 AM IST

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta के लिए सख्त रवैया अपनाया. सुप्रीम कोर्ट ने Meta से कहा कि भारत के कानून मानो या देश छोड़कर जाओ. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि नागरियों का हित सर्वोपरी है. 

साइबर कानून एक्सपर्ट और वकील विराग गुप्ता ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का Meta और WhatsApp पर क्या असर पड़ेगा. डेटा को लेकर सुप्रीम कोर्ट और मेटा इससे पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं. 

Advertisement

विराग गुप्ता ने बताया है कि कैसे मेटा के WhatsApp, इंस्टाग्राम और फेसबुक मिलकर डेटा चोरी करते हैं. इसके लिए वह तीन तरीकों को अपनाते हैं. 

गुप्ता के मुताबिक, पहला तो ये तीनों कंपनियां आपस में डेटा शेयर करती हैं. दूसरा तीनों कंपनियां डेटा को देश से बाहर भेजती हैं और तीसरा CCI का केस है, जिसमें कहा था कि OTT और विज्ञापनों में जो इस कंपनी का एकाधिकार बन रहा है वह असली परेशानी की वजह है. 

डेटा से कैसे भरेगा सरकार का खजाना 

एक्सपर्ट के मुताबिक, भारत में डेटा कारोबार पर GST नहीं लगता है और अगर GST की वसूली हो जाए, तो इससे सरकार का खजाना भी भरेगा और ये कंपनियां भारत के कानून के दायरे में आएंगी. साथ ही उन्होंने कहा कि डेटा के अवैध कारोबार को रोका जाए और वैध डेटा कारोबार पर टैक्स लगाया जाए. वैध डेटा शेयरिंग से साइबर फ्रॉड में कमी आएगी. 

Advertisement

WhatsApp ने कुछ महीने पहले दिया था ये जवाब 

कुछ महीने पहले WhatsApp ने कोर्ट में एक सख्त टिप्पणी की थी. वॉट्सऐप ने सुनवाई में कहा था कि अगर एंड टु एंड एन्क्रिप्शन को रिमूव करने को कहा गया तो वह भारत से एग्जिट कर जाएंगे क्योंकि कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है. 

WhatsApp का यह मामला कब शुरु हुआ? 

WhatsApp के इस विवाद की असली जड़ प्राइवेसी पॉलिसी है. WhatsApp कई साल से यह दलील दे रहा है कि उसके मैसेज End-To-End Encrypted (E2EE) हैं, जो सेंडर्स और रिसीवर के बीच ही डिकोड होता है. अगर तीसरा शख्स उन्हें पढ़ना चाहता है तो वह ऐसा नहीं कर पाएगा. 

अब आते हैं कि WhatsApp अपनी नई पॉलिसी पर जिसमें यह साफ किया है कि वह यूज़र का मेटाडेटा, यानी किससे बात हुई, कब हुई, कितनी बार हुई, डिवाइस की जानकारी और दूसरी तकनीकी डिटेल्स Meta की बाकी कंपनियों, खासकर फेसबुक और इंस्टाग्राम के साथ शेयर कर सकता है. 

भारत सरकार पर साफ स्टैंड है कि भारतीय यूजर्स का डेटा भारत सीमा में रहना चाहिए और उसका यूज भारत के दिशानिर्देशों और कानून के तहत होना चाहिए. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement