ना IIT, ना IIM… फिर भी कुणाल शाह को WhatsApp की कमान! लेकिन असली कहानी डेटा की है

वॉट्सऐप के नए सीईओ के तौर पर भारतीय कुणाल शाह को चुना गया है. सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे इंस्पिरेशनल स्टोरी बता रहे हैं तो कुछ का कहना कि मेटा ने क्रेड के जरिए इंडियन यूजर्स का डेटा हासिल करने के लिए ऐसा किया है.

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आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:02 PM IST

WhatsApp के नए ग्लोबल हेड के तौर पर कुणाल शाह का नाम सामने आने के बाद ज्यादातर चर्चा उनकी डिग्री को लेकर हो रही है. कोई कह रहा है कि उनके पास IIT या IIM की डिग्री नहीं है, तो कोई उनकी कॉलेज ड्रॉपआउट यात्रा को सफलता की मिसाल बता रहा है.

हालांकि इस पूरी कहानी में शायद सबसे अहम सवाल कहीं पीछे छूट गया है. सवाल यह नहीं है कि कुणाल शाह कौन हैं, बल्कि यह है कि Meta ने आखिर WhatsApp के लिए कुनाल शाह को ही क्यों चुना?

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सत्य नडेला और सुंदर पिचाई जैसे भारतीय मूल के टॉप टेक सीईओ दरअसल टेक बैकग्राउंड के हैं और पिचाई आईआईटी से हैं. ऐसे में लोग सोशल मीडिया पर ये बात कर रहे हैं कि कुणाल शाह का बैकग्राउंड भी ऐसा नहीं है फिर भी वॉट्सऐप ने ग्लोबल सीईओ बनाया है, इसकी वजह क्या है?

क्रेड की वजह से कुणाल शाह बने WhatsApp CEO?

दरअसल कुणाल शाह पिछले कई सालों से CRED चला रहे हैं. पहली नजर में क्रेड सिर्फ एक फिनटेक ऐप लगता है, लेकिन टेक इंडस्ट्री में इसे भारत के सबसे प्रीमियम यूजर बेस वाले प्लेटफॉर्म्स में गिना जाता है.

क्रेड के यूजर्स आमतौर पर क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं, समय पर बिल चुकाते हैं और उनकी खरीदारी की क्षमता देश के औसत इंटरनेट यूजर से कहीं ज्यादा मानी जाती है. यही वजह है कि क्रेड सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि हाई-वैल्यू कंज्यूमर बिहेवियर को समझने वाली मशीन बन चुका है. ये भी कह सकते हैं कि ये भारतीय प्रीमियम यूजर्स का डेटा कलेक्शन का सॉलिड टूल है.

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क्रेड के पास यूजर्स का ना सिर्फ फिनांशियल डेटा है, बल्कि उनकी कार्स का भी पूरा लेखा जोखा है. कब गाड़ी कहां सर्विस हो रही है यहां तक. इस प्लेटफॉर्म पर पेमेंट से लेकर शॉपिंग, क्विज, लोन, इंश्योरेंस जैसे रिकॉर्ड हैं. 

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WhatsApp के पास पहले से ही भारत में 50 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं. भारत वॉट्सऐप का सबसे बड़ा बाजार है. लेकिन इतने बड़े यूजर बेस के बावजूद वॉट्सऐप की सबसे बड़ी चुनौती हमेशा कमाई का मॉडल रही है.

क्या क्रेड का तमाम यूजर डेटा Meta के साथ शेयर होगा?

Meta कई सालों से WhatsApp Pay, बिजनेस मैसेजिंग और कॉमर्स के जरिए कमाई बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे वह सफलता नहीं मिली जो Google Pay, PhonePe या Paytm जैसे प्लेटफॉर्म हासिल कर चुके हैं.

यहीं पर कुणाल शाह की एंट्री दिलचस्प हो जाती है. FreeCharge से लेकर  तक कुनाल शाह ने बार-बार दिखाया है कि वह सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि लोगों की खर्च करने की आदतों को समझते हैं.

क्रेड की पूरी स्ट्रैटिजी इसी बात पर बनी है कि यूजर कैसे सोचता है, पैसा कैसे खर्च करता है और किस तरह के ऑफर उसे आकर्षित करते हैं. Meta को शायद अब ऐसे ही लीडर की जरूरत है जो वॉट्सऐप को सिर्फ चैटिंग ऐप नहीं, बल्कि एक बड़े पेमेंट और कॉमर्स प्लेटफॉर्म में बदल सके.

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भारत में यह बदलाव और भी इंपॉर्टेंट हो सकता है. आज करोड़ों भारतीय वॉट्सऐप पर बात करते हैं, फोटो भेजते हैं और बिजनेस चलाते हैं. अगर फ्यूचर में यही प्लेटफॉर्म पेमेंट, लोन, शॉपिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज का भी बड़ा केंद्र बनता है तो उसके पास यूजर की जिंदगी से जुड़ी बेहद अहम जानकारी होगी. ऐसे में डेटा, प्राइवेसी और मार्केट पर कंट्रोल जैसे सवाल भी उठना नैचुरल हैं.

यही वजह है कि एक्सपर्ट्स इस डेवेलपमेंट को मेटा के भारतीय यूजर्स पर कंट्रोल की तरह देख रहे हैं. उनके मुताबिक Meta भारत में अपने अगले बड़े दांव की तैयारी कर रहा है. भारत पहले ही दुनिया का सबसे बड़ा वॉट्सऐप बाजार है और डिजिटल पेमेंट्स के मामले में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. ऐसे में अगर वॉट्सऐप पेमेंट्स और कॉमर्स में आक्रामक तरीके से उतरता है तो इसका असर पूरे फिनटेक सेक्टर पर पड़ सकता है.

IIT, IIM की डिग्री नहीं, फिर भी किया कमाल

कुणाल शाह की कहानी निश्चित तौर पर दिलचस्प है. उन्होंने न IIT से पढ़ाई की, न IIM से. कॉलेज छोड़ने के बाद उन्होंने छोटे-छोटे काम किए, फिर FreeCharge बनाया और बाद में CRED खड़ा किया.

मुंबई के विल्सन कॉलेज से कुणाल शाह ने फिलॉसफी में बीए किया है. बाद में उन्होंने पार्ट टाइम एमबीए के लिए एनरॉल किया, लेकिन अपना बिजनेस बनाने के लिए उसे बीच में ही छोड़ दिया. 

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लेकिन वॉट्सऐप में उनकी एंट्री की असली अहमियत उनकी डिग्री या उनकी निजी सफलता की कहानी नहीं है. असल कहानी यह है कि दुनिया का सबसे बड़ा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म अब ऐसे व्यक्ति के हाथ में जा सकता है जिसने अपना पूरा करियर लोगों के पैसे, खर्च करने की आदतों और डिजिटल व्यवहार को समझने में बिताया है.

 

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