देवदत्त पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ लगातार दो टेस्ट में शतक जड़कर टीम इंडिया में अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है. लेकिन उनकी बल्लेबाजी में सिर्फ रनों और शतकों की चमक नहीं है. श्रीलंका की स्पिन मददगार परिस्थितियों में पडिक्कल ने एक ऐसी तकनीक दिखाई है, जो उन्हें दूसरे बल्लेबाजों से अलग करती है. वह खराब गेंद का इंतजार नहीं करते, बल्कि स्पिनरों की अच्छी गेंदों को भी रन बनाने के मौके में बदल देते हैं.
पडिक्कल की इस बल्लेबाजी का सबसे खास पहलू है क्रीज की गहराई का इस्तेमाल. स्पिनर जब गुड लेंथ पर गेंद डालते हैं तो पडिक्कल आगे बढ़ने की बजाय कई बार पीछे जाकर गेंद को अपने शॉट के लिए तैयार करते हैं. कट, पंच और पुल उनके प्रमुख हथियार हैं. यही बैकफुट गेम श्रीलंका में उनके लिए लगातार रन जुटाने का जरिया बना है.
117 में स्पिन के खिलाफ 52 रन बैकफुट से
कोलंबो में खेली गई 117 रनों की पारी में पडिक्कल ने स्पिनरों के खिलाफ बैकफुट से 52 रन बनाए. इनमें से 47 रन गुड लेंथ गेंदों पर आए. उन्होंने स्पिनरों की 59 गुड लेंथ गेंदों पर पीछे जाकर शॉट खेलने की कोशिश की.
यह आंकड़ा बताता है कि पडिक्कल सिर्फ खराब गेंद मिलने का इंतजार नहीं कर रहे थे. उनकी कोशिश अच्छी गेंद को भी अपने लिए स्कोरिंग गेंद में बदलने की थी. टेस्ट क्रिकेट में यही फर्क एक अच्छे बल्लेबाज और मैच जिताने वाले बल्लेबाज के बीच दिखाई देता है.
निचले स्तर के क्रिकेट में बल्लेबाज खराब गेंदों का इंतजार करके रन बना सकता है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में अच्छी गेंदों की संख्या ज्यादा होती है. ऐसे में बल्लेबाज को उन्हीं गेंदों के खिलाफ रन बनाने का रास्ता तलाशना पड़ता है. पडिक्कल फिलहाल यही करते दिख रहे हैं.
एक ही गेंद पर कई शॉट का विकल्प
पडिक्कल की खासियत सिर्फ पीछे जाने में नहीं है. वह बैकफुट से कई तरह के शॉट खेल सकते हैं. रेगुलर कट के अलावा लेट कट, स्क्वॉयर के सामने कट, स्कॉवायर और सामने की तरफ पुल और पंच उनके शॉट्स में शामिल हैं.
कई बार गेंद में सिर्फ थोड़ी सी चौड़ाई उनके लिए काफी होती है. वह अपनी पहुंच का इस्तेमाल करके स्पिनर की अच्छी लेंथ को भी बाउंड्री में बदलने की क्षमता रखते हैं.
कोलंबो में इसका असर तब दिखा जब श्रीलंकाई गेंदबाजों ने बल्लेबाजों की लय रोकने के लिए लेग साइड के बाहर गेंदबाजी शुरू की. शुभमन गिल कुछ हद तक अपनी लय खो बैठे और गेंदों को पैड करने लगे, लेकिन पडिक्कल ने अपने फुटवर्क का इस्तेमाल किया और ऐसी गेंदों को कट करके रन निकालते रहे.
साई सुदर्शन से तुलना में भी बड़ा फर्क
पडिक्कल के इस अंदाज की तुलना भारत के एक और युवा बल्लेबाज साई सुदर्शन से भी की जा सकती है. दोनों स्पिन के खिलाफ क्रीज में पीछे जाकर खेलने को पसंद करते हैं. हालांकि दोनों के पीछे जाने के बाद रन बनाने के तरीके में बड़ा अंतर नजर आता है.
अपने शुरुआती करियर में पडिक्कल स्पिनरों की गुड लेंथ गेंदों पर करीब 52 प्रतिशत बार पीछे गए हैं, जबकि साई सुदर्शन का आंकड़ा 60 प्रतिशत है. लेकिन इसके बाद रन बनाने की रफ्तार में पडिक्कल आगे हैं. स्पिनरों की गुड लेंथ पर पीछे जाकर खेलने के बाद सुदर्शन का स्ट्राइक रेट करीब 36 और पडिक्कल का करीब 61 रहा है.
हालांकि यह सीधी तुलना नहीं है. दोनों ने अलग-अलग परिस्थितियों और अलग गुणवत्ता के गेंदबाजों का सामना किया है. फिर भी आंकड़े बताते हैं कि पडिक्कल पीछे हटने के बाद सिर्फ गेंद को रोकने के बजाय उस पर हमला करने की ज्यादा कोशिश करते हैं.
नंबर-3 पर मजबूत हुई दावेदारी
लगातार दो शतक के बाद पडिक्कल ने भारत के नंबर-3 स्थान पर अपनी दावेदारी बेहद मजबूत कर दी है. बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने भी उनके इरादे, धैर्य और बल्लेबाजी की गति की तारीफ की है.
कोटक ने माना कि पडिक्कल ने जिस तरह बल्लेबाजी की और अपनी पारी को शतक में बदला, वह टीम के लिए बड़ी सकारात्मक बात है. हालांकि उन्होंने साई सुदर्शन के प्रदर्शन को भी नजरअंदाज नहीं किया. सुदर्शन भी अच्छी बल्लेबाजी कर चुके हैं और दोनों ही युवा बल्लेबाजों में काफी संभावनाएं हैं.
पडिक्कल की एक और खासियत यह है कि वह जरूरत के मुताबिक ओपनिंग के साथ-साथ नंबर-3 और यहां तक कि नंबर-5 पर भी बल्लेबाजी कर सकते हैं. यही बहुमुखी प्रतिभा टीम मैनेजमेंट के लिए अतिरिक्त विकल्प पैदा करती है.
श्रीलंका के बाद अब असली टेस्ट
श्रीलंका में पडिक्कल ने स्पिन के खिलाफ जो तरीका अपनाया है, वह निश्चित रूप से उनकी बल्लेबाजी में एक बड़ा हथियार बनकर उभरा है. लेकिन अब चुनौती सिर्फ स्पिन की नहीं होगी.
भारत का अगला बड़ा टेस्ट दौरा न्यूजीलैंड में है, जहां परिस्थितियां श्रीलंका से अलग होंगी. इसके बाद जनवरी 2027 में ऑस्ट्रेलिया की टीम भारत दौरे पर आएगी और बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के मुकाबले भारतीय परिस्थितियों में खेले जाएंगे.
ऐसे में पडिक्कल के लिए श्रीलंका वाली सफलता को आगे ले जाने की चुनौती होगी. उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी बल्लेबाजी का यही मूल सिद्धांत बनाए रखना होगा- अच्छी गेंद का सम्मान, लेकिन रन बनाने का मौका मिले तो पीछे हटकर भी हमला.
दो टेस्ट में दो शतक ने पडिक्कल को फिलहाल चर्चा के केंद्र में ला दिया है. अब देखना यह होगा कि श्रीलंका में खोजा गया उनका यह ‘बैकफुट फॉर्मूला’ न्यूजीलैंड और फिर भारत में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट की अगली चुनौतियों में कितना कारगर साबित होता है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क