इस मामले में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के अपग्रेडेशन और क्षमता वृद्धि के लिए जारी टेंडर से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है. आरोप है कि टेंडर की तकनीकी शर्तों को बदलकर यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड नामक एक कंपनी को सीधे फायदा पहुँचाया गया. बिना पायलट स्टडी कराए ऐसी शर्तें डाली गईं जिससे दूसरी कंपनियों का मुकाबला खत्म हो गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ.