14 अप्रैल को जनता की मेहनत से ₹12,000 करोड़ में तैयार हुआ दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे, दो महीने से भी कम समय में ही कुछ हिस्सों में भारी गिरावट आ गई है. ऐसा लगता है जैसे कोई दो उल्का पिंड गिर गए हों या सड़क की आँखें निकल गई हों. इसकी हालत ऐसे हो गई है जैसे कागज पर पानी के छीटें मारे गए हों, जबकि मानसून की पहली बारिश भी जमकर नहीं हुई. यह स्थिति सरकार और निर्माण एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती है.