9 वेदर सिस्टम एक्टिव, क्यों बदला-बदला है मई का मौसम?

इस मई का मौसम असामान्य रूप से ठंडा रहा है. भारी बारिश, आंधी, ओले और तेज हवाओं के साथ कई वेदर सिस्टम एक्टिव हैं. मई के पहले सप्ताह में 79% ज्यादा बारिश हुई. सुपर अल-नीनो से मौसम और बदलेगा.

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इस बार मई का मौसम इतना बदला हुआ है कि लोग भी कन्फ्यूज हुआ पड़ा है. (Photo: ITG) इस बार मई का मौसम इतना बदला हुआ है कि लोग भी कन्फ्यूज हुआ पड़ा है. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 12 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:03 PM IST

इस साल मई का महीना काफी अनोखा साबित हो रहा है. आमतौर पर मई में तेज गर्मी और लू का कहर होता है, लेकिन इस बार कई इलाकों में मौसम थोड़ा ठंडा रहा है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश, आंधी, ओले, तेज हवाएं और लू जैसी घटनाएं एक साथ देखी जा रही हैं. इस माह कई अलग-अलग वेदर सिस्टम एक्टिव हैं, जिसकी वजह से देश का तापमान सामान्य से कम बना हुआ है.

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11 मई को मुन्नार की खाड़ी और श्रीलंका के पास एक कम दबाव का क्षेत्र बन गया. 10 मई को पश्चिमोत्तर भारत में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव. 9 मई को जम्मू-कश्मीर के कुछ इलाकों में लू पड़ी, जबकि 8 मई को पटना के आसपास हवाओं की रफ्तार 135 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा रिकॉर्ड की गई. 

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इनके अलावा देश के कई हिस्सों में भारी बारिश, गरज-चमक के साथ बारिश, ओले पड़ना, तेज सतही हवाएं, लू और गर्म रातें देखी गईं. मार्च से ही 90 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा तेज हवाएं कई जगहों पर चल रही हैं, जो समुद्र में होने वाले गंभीर चक्रवाती तूफान जितनी तेज हैं.

9 वेदर सिस्टम एक साथ एक्टिव 

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11 मई को भारत और आसपास के समुद्रों में कुल नौ वेदर सिस्टम एक्टिव थे. इनमें एक कम दबाव क्षेत्र, एक पश्चिमी विक्षोभ, चार कम दबाव की ट्रफ और चार साइक्लोनिक सर्कुलेशन शामिल थे. जल्द ही दक्षिण-पश्चिम मानसून की हवाएं भी शामिल हो सकती हैं. IMD ने 7 मई को पूर्वानुमान किया था कि तीसरे सप्ताह में मानसून दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पहुंच सकता है.

मई के पहले सप्ताह में पूरे देश में सामान्य से 79 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई. मध्य भारत में 226 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 161 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई. मार्च से 11 मई तक पूरे देश में 6 प्रतिशत अतिरिक्त बारिश हुई. गुजरात में 315 प्रतिशत, बिहार में 180 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 149 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई. बारिश और बादलों की वजह से कई जगहों पर अधिकतम तापमान कम रहा, जिससे गर्मी कम हुई. 

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सुपर अल-नीनो का खतरा

विश्व मौसम संगठन (WMO) के अनुसार, मई-जुलाई तक सुपर अल-नीनो आ सकता है. अल-नीनो के कारण भारत का मौसम और भी अनिश्चित हो सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग, नमी का बढ़ता प्रवाह और हवाओं में बदलाव के कारण मौसम की घटनाएं कई तरह की हो रही हैं. यही वजह है कि मानसून से पहले ही देश में मानसून जैसी स्थितियां बन रही हैं.

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गर्मी क्यों कम हुई?

आमतौर पर मई में पूरे देश में भीषण गर्मी पड़ने की उम्मीद की जाती थी, लेकिन अलग-अलग वेदर सिस्टम की वजह से अधिकतम तापमान को कई इलाकों में कम रहा. भारी बारिश, आंधी और बादल छाए रहने से दिन ठंडे रहे और गर्मी कम हुई. हालांकि, कुछ इलाकों में लू और गर्म रातों की समस्या भी बनी रही. 

मुन्नार की खाड़ी का कम दबाव क्षेत्र अगले 48 घंटों में और मजबूत हो सकता है. अरब सागर में भी ऊपरी हवा का चक्रवाती सिस्टम एक्टिव है. सुपर अल-नीनो के आने के साथ मौसम की जटिलता बढ़ेगी. किसान, आम नागरिक और प्रशासन को तैयार रहना चाहिए क्योंकि मौसम की घटनाएं अप्रत्याशित रूप ले सकती हैं.

इस मई का मौसम साबित कर रहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत का मौसम पहले से कहीं ज्यादा अनिश्चित हो गया है. एक ही समय में बारिश, ओले, लू, तेज हवाएं और गर्म रातें एक साथ हो रही हैं. सुपर अल-नीनो के आने के साथ यह चुनौती और बढ़ सकती है. इसलिए मौसम विभाग की सलाह को गंभीरता से लेना जरूरी है.

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