इंसान आधे दिमाग से भी पहचान सकता है चेहरे और शब्द: स्टडी

अक्सर बीमारी या चोट की वजह से इंसान के दिमाग के एक हिस्से को निकाल दिया जाता है. ऐसी स्थिति में भी वह इंसान लोगों के चेहरे और शब्दों को पहचान सकता है. हाल ही में एक शोध किया गया है जिसमें इसे साबित किया गया है. साथ ही शोध में मस्तिष्क की प्लास्टिसिटी के बारे में बताया गया है.

Advertisement
दिमाग का एक हिस्से से भी चेहरे और शब्द पहचान सकता है मरीज (Photo: Getty)  दिमाग का एक हिस्से से भी चेहरे और शब्द पहचान सकता है मरीज (Photo: Getty)

aajtak.in

  • पिट्सबर्ग,
  • 19 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 3:35 PM IST

इंसान के दिमाग का बायां और दायां हिस्सा शब्दों और चेहरों को पहचानने के लिए जाना जाता है. एक नए शोध से पता चला है कि लोगों के दिमाग का ये आधा हिस्सा न भी हो, तो भी वे शब्द और चेहरे अच्छी तरह पहचान सकते हैं.  

अभी प्रकाशित नहीं हुआ है. लेकिन शोध के लेखकों का कहना है कि इस खोज से मस्तिष्क की प्लास्टिसिटी के बारे में नई जानकारी मिल सकती है. इस शोध में कहा गया है कि सर्जरी के बाद, अतिरिक्त कामों को करने के लिए एक हिस्सा खुद को फिर से रीवायर कर सकता है.

Advertisement

यह पता लगाने के लिए कि क्या एक ही हिस्सा चेहरों और शब्दों की पहचान करने में सक्षम होता है, शोधकर्ताओं ने 40 ऐसे वयस्क वॉलेंटियर की मदद ली, जिनके दिमाग के आधे हिस्से को बचपन में ही निकाल (Hemispherectomy) दिया गया था. मिर्गी के गहन मामलों और दिमाग के एक हिस्से में पड़ने वाले दौरों पर काबू पाने के लिए ऐसा करना आखिरी विकल्प होता है.

दिमाग का एक हिस्सा खो चुके मरीज भी चेहरे पहचान सकते हैं (Photo: Getty)  

इन लोगों को महज सेकंड के तीन-चौथाई हिस्से के लिए, चार-अक्षर वाला शब्द और एक चेहरा दिखाया गया था. इससे पहले उन्हें केवल 150 मिलीसेकंड के लिए कोई और शब्द या चेहरा दिखाया गया था. फिर उसे पूछा गया था कि उन्हें दिखाए गए शब्द और चेहरे एक ही थे या अलग-अलग.

Advertisement

हालांकि मरीजों ने सामान्य लोगों से बेहतर परफॉर्म नहीं किया लेकिन उनमें चेहरे और शब्द पहचाने की औसत सटीकता दर 80 प्रतिशत से ज्यादा थी. शोधकर्ताओं ने पाया कि मरीजों के दिमाग का जो हिस्सा निकाल दिया गया था, ये सटीकता उस हिस्से पर निर्भर नहीं थी. 

एक दूसरे प्रयोग में, शोधकर्ताओं ने सभी प्रतिभागियों को उन शब्दों और चेहरों को पहचानने को कहा जो स्क्रीन के किनारे पर दिखाई देते हैं, न कि बीच में. जो चीजें दृश्य के बाएं हिस्से में देखी जाती हैं, वे आम तौर पर दिमाग के दाएं हिस्से से कंट्रोल होती हैं. और दाईं तरफ की चीजें दिमाग के बाएं हिस्से से.

 

सामान्य लोगों ने इस बार भी बेहतर प्रदर्शन किया. लेकिन ये आश्चर्य की बात थी कि दिमाग के केवल एक हिस्से वाले लोगों के प्रदर्शन में बहुत अंतर नहीं था. कुल मिलाकर, नतीजे बताते हैं कि विकसित हो रहा दिमाग का एक हिस्सा, वो चाहे बायां हो या दायां, चेहरे और शब्दों की पहचान के लिए खुद को ढाल लेता है. हालांकि इस तरह की प्लास्टिसिटी उम्र पर भी निर्भर करती है.

Advertisement

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »