भारत के ठंडे रेगिस्तान में क्या मौसम बदल रहा है? लद्दाख में लगातार 5वें साल सामान्य से ज्यादा बारिश

इस मॉनसून में बरसते बादलों इतनी बारिश की कि लद्दाख में खूब ज्यादा भीगा. लगातार पांच साल से बदलता बारिश का पैटर्न वैज्ञानिकों की नजर में है.

Advertisement
इस साल लद्दाख में मॉनसूनी बारिश सामान्य से कहीं ज्यादा हुई है. (File Photo: Getty) इस साल लद्दाख में मॉनसूनी बारिश सामान्य से कहीं ज्यादा हुई है. (File Photo: Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:18 PM IST

भारत के ठंडे रेगिस्तान लद्दाख का मौसम तेजी से बदलता दिख रहा है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, 15 जुलाई 2026 तक लद्दाख में सामान्य से 65% ज्यादा मॉनसूनी बारिश हुई है. लगातार पांचवें साल यहां सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है. 

इस साल पूरे देश में सिर्फ लद्दाख ही ऐसा केंद्र शासित प्रदेश है, जिसे IMD ने 'लॉर्ज एक्सेस रेनफॉल' यानी सामान्य से बहुत ज्यादा बारिश वाली श्रेणी में रखा है. वैज्ञानिक अब यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर यहां बारिश का पैटर्न क्यों बदल रहा है और इसका आगे क्या असर हो सकता है.

Advertisement

आमतौर पर लद्दाख को कम बारिश वाला ठंडा रेगिस्तान माना जाता है. लेकिन पिछले कुछ सालों से यहां मॉनसून पहले जैसा नहीं रहा. दूसरी तरफ, जहां हर साल अच्छी बारिश होती है, वहां इस बार बारिश कम हुई है. 1 जून से 15 जुलाई के बीच मेघालय में 55% और केरल में 32% कम बारिश दर्ज की गई. ऐसे में लद्दाख के आंकड़ों ने मौसम वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है.

यह भी पढ़ें: कैसे चलती हुई हाइड्रोजन ट्रेन में फ्यूल क्रिएट होगा? क्या रॉकेट टेक्नोलॉजी से काम करेगा

लद्दाख में बढ़ती बारिश सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं है. इससे बादल फटना, अचानक बाढ़ आना और लैंडस्लाइड जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है. इसलिए वैज्ञानिक इस बदलाव पर लगातार नजर रख रहे हैं.

पिछले पांच साल में कैसे बदली तस्वीर?

IMD के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में लद्दाख में 21.9 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो उस समय के सामान्य स्तर से 42% कम थी. इसके बाद 2022 में IMD ने पूरे देश के औसत बारिश के आंकड़े अपडेट किए. इसके बाद लद्दाख की सामान्य मॉनसूनी बारिश 37.7 मिलीमीटर से घटकर 22.3 मिलीमीटर मानी जाने लगी.

Advertisement

इसी साल से लगातार ज्यादा बारिश का दौर शुरू हुआ. 2022 में यहां 37.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 69% ज्यादा थी. 2023 में 45.2 मिलीमीटर बारिश हुई, यानी सामान्य से 103% ज्यादा. 2024 में भी सामान्य से 17% ज्यादा बारिश दर्ज हुई. फिर 2025 में सबसे बड़ा रिकॉर्ड बना. उस साल 98.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 342% ज्यादा थी. अगस्त 2025 में अकेले 80.2 मिलीमीटर बारिश हुई, जो 1973 के बाद किसी भी अगस्त महीने की सबसे ज्यादा बारिश थी.

ज्यादा बारिश क्यों बन रही है चिंता?

लद्दाख का मौसम और वहां की जमीन कम बारिश के हिसाब से बनी है. इसलिए जब कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होती है, तो नुकसान का खतरा बढ़ जाता है. पिछले कुछ सालों में कई जगह बादल फटने, अचानक बाढ़ और लैंडस्लाइड की घटनाएं हुई हैं.

यह भी पढ़ें: मॉनसून का रिवर्स गियर... जानिए आने वाले दिनों में मौसम में कैसा बदलाव होगा

22 और 23 जुलाई 2023 को लेह में बादल फटने से कई घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचा था. कई सड़कें भी बंद हो गई थीं, जिससे लोगों की आवाजाही और जरूरी सामान की सप्लाई पर असर पड़ा था.

वैज्ञानिक क्या मानते हैं?

मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (MP-IDSA) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2005 से 2023 के बीच लद्दाख में 15 बार बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गईं. रिपोर्ट में क्लाइमेट चेंज को ऐसे बदलते मौसम की एक बड़ी वजह माना गया है.

Advertisement

हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार बढ़ रही बारिश का लद्दाख के पर्यावरण, खेती, पानी के स्रोत और वहां रहने वाले लोगों पर लंबे समय में क्या असर होगा, इसे समझने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है.

फिलहाल इतना साफ है कि लद्दाख में मॉनसून पहले जैसा नहीं रहा. लगातार पांच साल से सामान्य से ज्यादा बारिश यह दिखाती है कि हिमालयी इलाकों का मौसम बदल रहा है. आने वाले समय में इस बदलाव पर नजर रखना और इसके असर को समझना बहुत जरूरी होगा.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »