इस बार सबसे ज्यादा ओले पड़ने की घटनाएं हो रही हैं यूपी-बिहार में, साइंटिफिकली जानिए ओले क्यों पड़ते हैं

इस साल यूपी-बिहार में असामान्य रूप से ज्यादा ओले पड़ रहे हैं. क्लाइमेट चेंज और बार-बार आने वाले वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से तेज अपड्राफ्ट बन रहा है, जिससे बड़े ओले गिर रहे हैं.

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इस साल यूपी और बिहार में ओले पड़ने की घटनाएं बहुत हुई हैं. (File Photo: PTI) इस साल यूपी और बिहार में ओले पड़ने की घटनाएं बहुत हुई हैं. (File Photo: PTI)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST

इस साल उत्तर प्रदेश और बिहार में ओले पड़ने की घटनाएं बहुत ज्यादा हो रही हैं. मार्च, अप्रैल और मई 2026 में कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और साथ में बड़े-बड़े ओले गिरे हैं. किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं. आम और लीची के बागान नुकसान में हैं. कई जगहों पर लोगों की जान भी गई है. आमतौर पर गर्मियों से पहले प्री- मानसून में ओले पड़ते हैं, लेकिन इस बार इनकी संख्या और तीव्रता असामान्य रूप से ज्यादा है.

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ओले कैसे बनते हैं? 

ओले बनने की प्रक्रिया बादलों में होती है, खासकर उन ऊंचे और शक्तिशाली बादलों में जिन्हें Cumulonimbus Clouds कहते हैं. जब तेज गर्मी पड़ती है तो जमीन से पानी भाप बनकर ऊपर उठता है. यह भाप ठंडी हवा से मिलकर पानी की बूंदों में बदल जाती है. 

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इन बादलों में बहुत तेज ऊपर की ओर हवा का झोंका होता है. ये हवा पानी की बूंदों को बहुत ऊपर ले जाती है, जहां तापमान जीरो डिग्री से भी नीचे होता है. वहां ये बूंदें जमकर बर्फ के छोटे कण बन जाती हैं. 

ये बर्फ के कण फिर नीचे गिरते हैं लेकिन बीच में फिर से तेज दवा उन्हें ऊपर धकेल देता है. रास्ते में ये सुपरकूल्ड पानी की बूंदों से टकराते हैं और उन पर नई परत जम जाती है. इस तरह कई परतें बनती जाती हैं. ओला बड़ा होता जाता है. जब ओला भारी हो जाता है कि ऊपर की हवा उसे और नहीं उठा पाती, तब वह जमीन पर गिरता है.

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छोटे ओले पिघलकर बारिश बन जाते हैं, लेकिन बड़े ओले तेजी से गिरते हैं. यूपी-बिहार में इस बार जो ओले गिरे, वे अक्सर गोल्फ बॉल के साइज तक के थे.

इस साल यूपी-बिहार में ओले ज्यादा क्यों?

2026 में उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बहुत बदल गया है. वैज्ञानिकों के अनुसार मुख्य कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की सक्रियता है. ये पश्चिम से आने वाली मौसम प्रणालियां हैं जो हिमालय क्षेत्र में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश-आंधी लाती हैं. इस साल ये विक्षोभ बार-बार आ रहे हैं. मई तक असर बना हुआ है.

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दूसरा बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है. ग्लोबल वार्मिंग से हवा ज्यादा गर्म हो रही है. गर्म हवा ज्यादा नमी सोख सकती है. जब यह नमी तेजी से ऊपर उठती है तो बहुत शक्तिशाली बादल बनते हैं. ऊपर जाने वाली तेज हवा पैदा होती है, जो ओले बनाने के लिए जरूरी है. 

इस साल अप्रैल-मई में भीषण गर्मी के बाद अचानक ठंडी हवा और नमी का मेल हो रहा है. गर्म जमीन के ऊपर ठंडी हवा आने से वायुमंडल में अस्थिरता बढ़ गई है, जिससे तूफान, बिजली, तेज हवाएं और ओले बन रहे हैं. IMD ने भी कई बार यूपी, बिहार, झारखंड और आसपास के राज्यों में ओले गिरने की चेतावनी जारी की थी.

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कृषि और आम लोगों पर असर

यूपी और बिहार कृषि प्रधान राज्य हैं. इस बार ओलों ने गेहूं, मक्का, आम, लीची और अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है. कई जगहों पर पेड़ उखड़ गए, छतें क्षतिग्रस्त हुईं और पशु भी मारे गए. बिहार में कुछ जिलों में ओले के साथ बिजली गिरने से लोगों की मौतें भी हुई हैं.

वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे भीषण मौसम की घटनाएं बढ़ेंगी. गर्मी बढ़ने, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के पैटर्न बदलने और अस्थिर वायुमंडल के कारण आने वाले सालों में ओले, तेज बारिश और आंधी की घटनाएं और आम हो सकती हैं.

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क्या करें बचाव के लिए?

  • IMD की चेतावनी आने पर घर के अंदर रहें.
  • खेतों में पक्की छत या नेट का इस्तेमाल करें जहां संभव हो.
  • आम-लीची जैसे फलों के बागानों में समय पर सुरक्षा उपाय करें.
  • पुराने मकानों और पेड़ों से दूर रहें.

इस साल यूपी-बिहार में रिकॉर्ड स्तर पर ओले पड़ रहे हैं. यह सिर्फ मौसम की सामान्य घटना नहीं, बल्कि बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन का संकेत है. हमें सतर्क रहना होगा और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर रहना होगा.

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